चीन, ताक़त के बाद भी क्यों नहीं अमरीका से युद्ध चाहता ?
पिछले दो सप्ताहों के दौरान चीन और अमरीका में तनाव बढ़ गया है यहां तक कि अमरीका के राष्ट्रपति ने बीजिंग के साथ संबंध खत्म करने तक की धमकी दी है। चीन और अमरीका के संबंध जिस चरण से गुज़र रहे हैं उसे देखते हुए दुनिया के बहुत से विश्लेषक यह अनुमान लगाने में व्यस्त हैं कि इन दो देशों के मध्य किसी टकराव की कितनी संभावना है?
सच्चाई यह है कि वाशिंग्टन और बीजिंग के बीच तनाव में वृद्धि की वजह केवल कोरोना ही नहीं है बल्कि यह तनाव बहुत पुराना है। चीन की आर्थिक, सैनिक और तकनीकी शक्ति से अमरीका का डर कोई आज का नहीं है और यह कम से कम सन 2001 से 2009 के बीच जार्ज बुश के राष्ट्रपति काल से संबंधित है।
उस समय अधिकांश लोग, प्रशांत महासागर के क्षेत्र के बारे में अमरीका की विदेश नीतियों में बड़े बदलाव की ज़रूरत पर बल दे रहे थे। बाराक ओबामा के दौर में भी यह चर्चा जारी रही और अमरीका ने चीन के आस पास के देशों जैसे जापान, फिलीपीन, इंडोनेशिया, आस्ट्रेलिया से संबंध गहरे किये ताकि इन देशों में चीन के प्रभाव को कम किया जा सके।
चीन ने अमरीका के साथ इस प्रकार के सहयोग को अपने क्षेत्रीय साम्राज्य पर एक प्रकार से हमला समझा जिसका मक़सद चीन के आर्थिक, व्यापारिक और सैनिक प्रभाव को कम करना है।
यही वजह है कि चीन ने भी उत्तरी कोरिया और रूस जैसे अपने क्षेत्रीय घटकों के साथ संबंध को मज़बूत किया और इसी तरह विश्व स्तर पर विशेष कर मध्य पूर्व, अफ्रीका और युरोप में अपना आर्थिक प्रभाव बढ़ाया जिसकी वजह से चीन में असाधारण रूप से आर्थिक विकास देखा गया और देखते देखते चीन, अमरीका के बाद दुनिया की दूसरी बड़ी शक्ति बन गया। अगर चीन इसी तरह से प्रयास करता रहा तो बहुत जल्द अमरीका को भी पीछे छोड़ देगा। अमरीका और चीन के वर्तमान तनाव के पीछे एक वजह यह भी बतायी जा रही है।
ट्रम्प चूंकि एक व्यापारी हैं इस लिए उन्हें बहुत अच्छी तरह से मालूम है कि चीन पर अमरीका की बढ़ती निर्भरता से केवल चीन की शक्ति बढ़ेगी और अमरीका की शक्ति कम होगी। इसी लिए ट्रम्प ने सत्ता में पहुंचते ही अमरीका व चीन की अर्थ व्यवस्था को एक दूसरे से दूर करने का प्रयास शुरु कर दिया था।
अमरीकी सरकार ने अपने इस मिशन के लिए अमरीकी कंपनियों को चीन से निकलने और अपनी 14 अरब डालर की पुंजी को फिलीपीन और वियतनाम जैसे देशों में लगाने के लिए प्रोत्साहित किया। इसी प्रकार हालिया कई हफ्तों के दौरान अमरीका की कई फेडरल एजेन्सियों ने चीनी बाज़ार से अपने फंड बाहर निकालने की कोशिश की है।
निश्चित रूप से चीन अमरीका के साथ व्यापारिक युद्ध नहीं चाहता इस लिए नहीं कि इस प्रकार का टकराव कभी कभी सैन्य टकराव में बदल जाता है बल्कि इस लिए कि चीन अपनी अर्थ व्यवस्था को बेहद मज़बूत बनाना चाहता है और इसके लिए अमरीका से व्यापारिक संबंध बनाए रखना बेहद ज़रूरी है क्योंकि अमरीका, चीनी उत्पादों का एक बहुत बड़ा बाज़ार हैं जिसका मूल्य पांच सौ अरब डालर है।
इस लिए चीन और अमरीका में गंभीर टकराव की संभावना बहुत कम है और ज़्यादा से ज़्यादा यह होगा कि चीन, अमरीका के कुछ हितों के सामने पीछे हट जाएगा जिसका मक़सद ट्रम्प को चुप और खुश करना होगा और चीन के इस सहयोग से ट्रम्प के अगले राष्ट्रपति चुनाव में जीतने की संभावना बढ़ जाएगी। Q.A. साभार, अलअरबी अलजदीद