ब्रिटेन के मुसलमानों का जॉनसन सरकार के ख़िलाफ़ फूटा ग़ुस्सा
ब्रिटेन का मुस्लिम समुदाय इस देश के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन द्वारा ईदे क़ुरबान को मौक़े पर कोरंटाइन के अचानक लिए गए फ़ैसले से काफ़ी रोष में है।
समाचार एजेंसी इर्ना की रिपोर्ट के मुताबिक़, ब्रिटेन में मौजूद मुस्लिम समाज के संगठनों और समितियों ने ब्रिटिश प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन द्वारा अचानक लिए गए फ़ैसले की कड़ी आलोचना की है। इन संगठनों और समितियों का यह आरोप था कि ईदे क़ुरबान के मौक़े पर जॉनसन द्वारा ब्रिटेन में अचानक कोरंटाइन लागू करने का फ़ैसला, उनकी मुस्लिम विरोधी नीतियों का एक हिस्सा थी। ब्रिटिश मुसलमानों ने बोरिस जॉनसन पर ईद के कार्यक्रमों को जाबूझकर मुसलमानों से छीनने का भी आरोप लगाया।
संविधान के विशेषज्ञ और ब्रिटिश मुस्लिम काउंसिल के अध्यक्ष हारून ख़ान ने ब्रिटिश सरकार द्वारा जल्द बाज़ी में लिए गए फ़ैसले को ख़तरनाक बताया और कहा कि, यह एक सोची समझी साज़िश है जिसको लेकर आने वाले दिनों में बड़ी बहस छिड़ने वाली है। ब्रिटिश प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन ने ईदे क़ुरबान से पहले शुक्रवार को एक कार्यक्रम में ब्रिटेन में फिर से कोरोना वायरस के फैलते संक्रमण की ओर इशारा करते हुए कहा था कि, इस वायरस की रोकथाम के लिए उनकी सरकार ने देश के उत्तरी शहरों में एक बार फिर से सीमित्ताओं को लागू करने का फ़ैसला लिया है।
उल्लेखनीय है कि ब्रिटिश प्रधानमंत्री ने यह फ़ैसला ऐसी स्थिति में किया है कि जब इस देश के मीडिया के अनुसार बोरिस जॉनसन ने कोरोना वायरस को निंयत्रित करने के लिए जो कार्यवाहियां की हैं वह यूरोपीय देशों में सबसे कमज़ोर साबित हुई हैं। स्वयं ब्रिटिश प्रधानमंत्री ने भी कोरोना वायरस से मुक़ाबले को लेकर अपनी सरकार की नाकामी की बात स्वीकार की है। उन्होंने कहा था कि, इस वायरस के आरंभ में हमारी सरकार ने आरंभिक सप्ताहों और महीनों में सही से काम नहीं किया था। (RZ)
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