अमरीका और राष्ट्रपति चुनाव में विदेशी हस्तक्षेप का बखेड़ा!
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अमरीका के राष्ट्रपति चुनाव में सिर्फ़ दो दिन बचे हैं और इस चुनाव में ईरान, रूस व चीन के साइबर हस्तक्षेप की संभावना ने अमरीका में हंगामा मचा रखा है।
(last modified 2023-04-09T02:55:50+00:00 )
Nov ०१, २०२० १९:४१ Asia/Kolkata
  • अमरीका और राष्ट्रपति चुनाव में विदेशी हस्तक्षेप का बखेड़ा!

अमरीका के राष्ट्रपति चुनाव में सिर्फ़ दो दिन बचे हैं और इस चुनाव में ईरान, रूस व चीन के साइबर हस्तक्षेप की संभावना ने अमरीका में हंगामा मचा रखा है।

रोएटर्ज़ न्यूज़ एजेंसी ने जानकार सूत्रों के हवाले से रिपोर्ट दी है कि रूसी हैकर्ज़ के एक गुट ने, जिस पर अमरीका के सन 2016 के राष्ट्रपति चुनाव में हस्तक्षेप का आरोप है, जारी वर्ष के आरंभ में केलिफ़ोर्निया व इंडियाना राज्यों में डेमोक्रेटिक पार्टी के ईमेल्ज़ को हैक करके वाॅशिंग्टन व न्यूयाॅर्क में साइबर हमले किए हैं।  इस रिपोर्ट के अनुसार इन हैकर्ज़ की गतिविधियों की समीक्षा से तीन नवम्बर के चुनाव में हस्तक्षेप के लिए रूस की शैली का पता चलता है। रोएटर्ज़ ने इन हैकर्ज़ के हमलों का निशाना बनने वाले कुछ केंद्रों की तरफ़ इशारा किया है जिनमें अमेरिकन प्रोग्रेस सेंटर, विदेश संबंध परिषद और कारनेगी इंस्टीट्यूट शामिल हैं।

 

अलबत्ता इन केंद्रों का कहना है कि इस प्रकार का कोई प्रमाण नहीं है जिससे पता चलता हो कि हैकर्ज़ इन केंद्रों में सेंध लगाने में कामयाब हो गए हों। बताया जाता है कि इन हैकर ग्रुप्स में से एक, रूस की सैन्य गुप्तचर सेवा के नियंत्रण में है और उसी ने सन 2016 के चुनाव में हिलेरी क्लिंटन के चुनावी दल के ईमेलों को हैक किया था। 2016 के चुनाव में ट्रम्प के प्रतिस्पर्धी चाहे वे डेमोक्रेट्स हों या रिपब्लिंस इस बात की कोशिश कर रहे थे कि चुनाव में रूस के हस्तक्षेप का मामला उठा कर ट्रम्प को वाइट हाउस में मनमानी करने से रोक दें। इस समय भी ऐसा ही लगता है कि यह विषय ट्रम्प के प्रतिस्पर्धियों के एक चुनावी हथकंडे में बदल गया है। अलबत्ता ट्रम्प की सुरक्षा व गुप्तचर संस्थाएं भी बेकार नहीं बैठी हैं और वे भी ईरान व चीन पर अमरीका के राष्ट्रपति चुनाव में हस्तक्षेप का आरोप लगा कर इस संबंध में अपने चुनावी प्रतिस्पर्धियों के हथंकडे की धार कम कर दें।

 

रोएटर्ज़ ने एक अन्य रिपोर्ट में अमरीकी अधिकारियों के हवाले से कहा है कि ईरानी हैकर्ज़ ने अक्तूबर के आरंभ में अमरीका के हज़ारों मतदाताओं को धमकी भरे ईमेल भेज कर मतदाताओं के डेटा तक आसानी से पहुंच बना ली है। एफ़बीआई और अमरीका की आंतरिक सुरक्षा के मंत्रालय ने एक संयुक्त बयान में कहा है कि ये ईमले भेजने वाले, कम से कम एक राज्य में मतदाताओं के डेटा तक पहुंचने में कामयाब रहे हैं। वाॅशिंग्टन पोस्ट ने भी अमरीका की आंतरिक सुरक्षा के मंत्रालय के हवाले से रूस और ईरान के साथ ही चीन पर भी अमरीका के आगामी राष्ट्रपति चुनाव में साइबर हस्तक्षेप का आरोप लगाया है।

 

ईरान व चीन पर चुनाव में साइबर हस्तक्षेप के आरोप लगाने के पीछे यह तर्क पेश किया जा रहा है कि राष्ट्रपति चुनाव में डेमोक्रेट प्रत्याशी जो बाइडन के जीतने से इन दोनों देशों को ही सबसे ज़्यादा फ़ायदा होगा क्योंकि ट्रम्प ने परमाणु समझौते से निकल कर और ईरान पर कड़े प्रतिबंध लगा कर और इसी तरह चीन पर व्यापारिक सीमितताएं लागू करके इन दोनों देशों की अर्थव्यवस्था को बहुत ज़्यादा नुक़सान पहुंचाया है। इसी के साथ अमरीका की आंतरिक सुरक्षा के मंत्रालय ने देश के राष्ट्रपति चुनाव में विदेशी हस्तक्षेप के बारे में पाई जाने वाली चिंताओं को दूर करने की कोशिश भी की है और इसी परिप्रेक्ष्य में उसने वादा किया है कि वह चुनाव की रक्षा के लिए अब तकी सबसे बड़ी कार्यवाही शुरू करने जा रहा है ताकि पिछले चुनाव में रूस के हस्तक्षेप की पुनरावृत्ति को रोक सके और इसी तरह ईरान व चीन के नए ख़तरों से निपट सके। वाॅशिंग्टन पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक़ अमरीका की आंतरिक सुरक्षा के मंत्रालय की साइबर यूनिट, मतदान वाले दिन एक साइबर वाॅर रूम बनाने का इरादा रखती है ताकि पूरे देश के किसी भी स्थान से चुनावी अधिकारी किसी भी समय किसी भी तरह की संदिग्ध गतिविधि के बारे में उससे संपर्क कर सकें। (HN)

 

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