मंगलवार की शाम अमरीका हार गयाः थामस फ़्रेडमैन
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अमरीका के मशहूर लेखक और टीकाकार थामस फ़्रेडमैन का कहना है कि अमरीकियों को अब तक यह पता नहीं चल सका है कि चुनाव कौन जीता लेकिन यह बात सब जानते हैं कि हार अमरीका की हुई है।
(last modified 2023-04-09T02:55:50+00:00 )
Nov ०५, २०२० १७:०० Asia/Kolkata
  • मंगलवार की शाम अमरीका हार गयाः थामस फ़्रेडमैन

अमरीका के मशहूर लेखक और टीकाकार थामस फ़्रेडमैन का कहना है कि अमरीकियों को अब तक यह पता नहीं चल सका है कि चुनाव कौन जीता लेकिन यह बात सब जानते हैं कि हार अमरीका की हुई है।

फ़्रेडमैन ने न्यूयार्क टाइम्ज़ को साक्षात्कार देते हुए कहा कि ट्रम्प के शासन के चार सालों में पूरा देश बुरी तरह विभाजित हुआ, यह चार साल अमरीका के इतिहास में सबसे ज़्यादा धोखाधड़ी वाले चार साल थे। ट्रम्प ने अमरीकी लोकतंत्र के दो बेहद अहम स्तंभों यानी हक़ीक़त और विश्वास पर जमकर हमले किए।

ट्रम्प ने एक दिन भी एसा नहीं गुज़ारा जब वह पूरे अमरीकी राष्ट्र के राष्ट्रपति रहे हों, उन्होंने सारे उसूल तोड़े, इस तरह से परम्पराओं को ध्वस्त किया कि आज तक कोई भी राष्ट्रपति इसकी हिम्मत नहीं कर सका था। यह सिलसिला मंगलवार की शाम तक जारी रहा जब उन्होंने अमरीका के चुनावों में धांधली का संदेह जताया और सुप्रीम कोर्ट से हस्तक्षेप करने और मतदान रुकवाने की मांग की।

 

अगर बाइडन चुनाव जीतते हैं तो बहुत कम अंतर से जीतेंगे। यह कोई इतनी बड़ी जीत नहीं होगी जो ट्रम्प और उनके इर्द गिर्द रहने वालों को यह संदेश दे कि बस अब बहुत हो चुका, हमारे सामने से चले जाइए और इस देश में अब दोबारा विभाजनकारी नीतियों को हरगिज़ जगह नहीं मिलनी चाहिए।

फ़्रेडमैन ने कहा कि ट्रम्प ने कैंपेन के दौरान कई बार एसा रवैया अपनाया जिससे यह साबित हुआ कि वह केवल गोरों के नेता हैं।

आने वाले समय में रिपब्लिकन्स यह ज़ाहिर करने की कोशिश करेंगे कि वह गोरों का नेतृत्व करते हैं और सत्ता पर क़ब्ज़ा जमाने के लिए हर रास्ता अपनाएंगे। फ़्रेडमैन कहते हैं कि इसका मतलब यह है कि रिपब्लिकन पार्टी का भविष्य अब ट्रम्पिज़्म के रास्ते पर चलेगा। यह मानना है हार्वर्ड युनिवर्सिटी के प्रोफ़ेसर गौतम मुकुंद का।

 

मुकुंद ने आगे कहा कि ट्रम्पिज़्म की एक ख़ास टैक्टिक यह रही कि कभी अमरीकी बहुमत का समर्थन हासिल करने की कोशिश नहीं की गई और रिपब्लिकन पार्टी यही काम भविष्य में करेगी जैसे उसने सुप्रीम कोर्ट में अपने जजों को भर दिया है। अमरीका में जो अब तक की व्यवस्था रही है उसके तहत रिपब्लिकन्स को वाइट हाउस, सेनेट, और दूसरी संस्थाओं पर क़ब्ज़ा जमाने का पूरा मौक़ा मिल जाएगा हालांकि अमरीकी जनता का अधिकांश हिस्सा इसके विरुद्ध होगा और यह स्थिति किसी भी समाज में ज़्यादा दिन नहीं चल पाती बल्कि वह समाज टूटने लगता है।

थामस फ़्रेडमैन आख़िर में कहते हैं कि हम केवल आशा कर सकते हैं कि हालात सही दिशा में जाएंगे और देश इन संकटों से गुज़र जाएगा और सत्ता में पहुंचने वाला व्यक्ति इस निष्कर्ष पर पहुंचेगा कि देश के विभाजन का यह सिलसिला जारी रखना ठीक नहीं है। मगर जो राजनैतिक व्यवस्था इस समय है और जिस प्रकार का माहौल है उसमें तो नहीं लगता कि उस रफ़तार से सुधार हो पाएगा जिसकी हमें ज़रूरत है।

स्रोतः न्यूयार्क टाइम्ज़

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