पाकिस्तान के एटमी धमाके और उससे जुड़ी यादगार तसवीर की कहानी
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मैं मई 1998 में प्रधानमंत्री का स्टाफ़ आफ़ीसर था और देश में शांति सुरक्षा और संगीन अपराधों के मामलों को देखना और प्रधानमंत्री को ब्रीफ़ करना मेरी ज़िम्मेदारी थी।
(last modified 2023-04-09T02:55:50+00:00 )
Jun ०२, २०२१ १६:०९ Asia/Kolkata
  • पाकिस्तान के एटमी धमाके और उससे जुड़ी यादगार तसवीर की कहानी

मैं मई 1998 में प्रधानमंत्री का स्टाफ़ आफ़ीसर था और देश में शांति सुरक्षा और संगीन अपराधों के मामलों को देखना और प्रधानमंत्री को ब्रीफ़ करना मेरी ज़िम्मेदारी थी।

इस बार 28 मई 1998 की शाम को प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ़ की पाकिस्तान के कामयाब एटमी टेस्ट के बारे में पीटीवी इस्लामाबाद में एतिहासिक स्पीच रिकार्ड कराने के तुरंत बाद ली गई तसवीर सोशल मीडिया पर वायरल हुई तो अहसन इक़बाल साहब ने मुझे भी भेज दी। इसलिए कि उस समय स्टाफ़ आफ़ीसर की हैसियत से मैं भी प्रधानमंत्री के साथ खड़ा था। यक़ीनन यह एक एतिहासिक तसवीर थी।

11 मई 1998 को प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ़ ईसीओ सम्मेलन के सिलसिले में क़ज़ाक़िस्तान की राजधानी अलमाती में थे। बाद में क़ज़ाक़िस्तान ने आस्ताना को अपनी राजधानी बना लिया। शाम को विदेश सचिव लगभग दौड़ते हुए आए और प्रधानमंत्री को बताया कि भारत ने परमाणु टेस्ट कर लिया है जो हमारे लिए गहरी चिंता का विषय है। यह सुनकर प्रधानमंत्री परेशान हो गए। महत्वपूर्ण मीटिंग शुरू हो गई। बड़े मंत्रियों में सरताज अज़ीज़ इस बात के ख़िलाफ़ थे कि पाकिस्तान भी जवाब में परमाणु धमाका करे। उनका अनुमान था कि धमाकों के बाद पाकिस्तान पर पाबंदियां लग जाएंगी।

प्रधानमंत्री ने क़ज़ाक़िस्तान दौरा संक्षिप्त करके पाकिस्तान लौटने का फ़ैसला किया। 14 मई को डिफ़ेन्स से संबंधित उस कमेटी की बैठक हुई जिसमें तीनों सेनाओं के प्रमुख और कई मंत्री शामिल होते हैं।

यहां यह भी बताते चलें कि एटम बम के लिए यूरेनियम संवर्धन के साथ ही सभी कंपोनेन्ट्स को एकत्रित करके बम का रूप देना बहुत महत्वपूर्ण होता है। इसके बाद डेटोनेट करके देखना होता है कि टेस्ट सफल रहा या नहीं। यह काम डाक्टर अब्दुल क़दीर ख़ान के ज़िम्मे था।  

एटमी धमाके से जुड़े दूसरे मामलों की देखभाल एटामिक एनर्जी कमीशन के चेयरमैन डाक्टर समर मुबारकमंद के ज़िम्मे थी। इन अधिकारियों की मीटिंग एक दिन पहले 13 मई को हुई जबकि अगले दिन 14 मई को डीसीसी की मीटिंग हुई। मंत्रिमंडल के कई बड़े मंत्री इससे सहमत नहीं थे कि पाकिस्तान को भी टेस्ट करना चाहिए। उस समय के सेना प्रमुख जहांगीर करामत ने यह कहा कि पहले धमाके के नतीजे में लगने वाली पाबंदियों के प्रभाव पर अच्छी तरह ग़ौर कर लिया जाए। नैवी चीफ़ ने कहा कि हमारे लिए धमाका करना ज़रूरी हो गया है।

इसी बीच अमरीका के राष्ट्रपति बिल क्लिंटन ने नवाज़ शरीफ़ को फ़ोन करके उन्हें संयम रखने की सलाह दी। नवाज़ शरीफ़ भारत के परमाणु धमाके से पैदा होने वाले हालात की बात करते रहे। अमरीकी राष्ट्रपति बार बार नवाज़ शरीफ़ को धमाके के ख़तरनाक परिणामों के बारे में चेतावनी देते रहे। आख़िर में उन्होंने पाकिस्तान को 5 अरब डालर की लालच दी और यह भी कहा कि आपके निजी एकाउंट में भी कई अरब डालर की रक़म डाल दी जाएगी। मगर पाकिस्तान नहीं माना और उसने भी धमाका कर ही डाला।  

ज़ुफ़ेक़ार अहमद चीमा

स्रोतः डेली एक्सप्रेस पाकिस्तान

 

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