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ईश्वरीय वाणी-५३
Apr ११, २०१६ ०६:४१सूरे यासिन पवित्र क़ुरआन का ३६वां सूरा है।
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ईश्वरीय वाणी-५२
Apr ११, २०१६ ०६:३९फ़ातिर का अर्थ चीरने वाला है और यहां पर फ़ातिर का अर्थ पैदा करने वाला है और इसकी गणना महान ईश्वर की विशेषताओं में होती है।
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ईश्वरीय वाणी-५१
Apr ११, २०१६ ०६:१७पवित्र क़ुरआन के सूरै अहज़ाब की ३३वीं आयत में महान ईश्वर कहता है” बेशक ईश्वर ने आप अहलबैत को हर प्रकार की गन्दगी व पाप से उस तरह से दूर रखने का इरादा किया है जिस तरह से दूर रखने का हक़ है।“
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ईश्वरीय वाणी-५०
Apr ११, २०१६ ०६:१३सूरे अहज़ाब मदीने में उतरा और इसमें 73 आयतें हैं। इस सूरे की कुछ आयतें अहज़ाब नामक जंग के बारे में हैं जिसमें मुसलमानों को नास्तिकों पर चमत्कारिक जीत और पाखंडियों की ओर से रुकावटें खड़ी किए जाने का उल्लेख है
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ईश्वरीय वाणी-४९
Apr ११, २०१६ ०६:०९सूरे सजदा पवित्र क़ुरआन के उन चार सूरों में है जिनकी विशेष आयत पढ़ते ही तुरंत सजदा करना अनिवार्य है।
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ईश्वरीय वाणी-४८
Apr ११, २०१६ ०६:०६सूरे लुक़मान पवित्र क़ुरआन का इकतीसवां सूरा है।
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ईश्वरीय वाणी-४७
Apr ११, २०१६ ०६:०५सूरे रूम पवित्र क़ुरआन का तीसवां सूरा है। यह सूरा मक्के में उतरा है।
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ईश्वरीय वाणी-४६
Apr ११, २०१६ ०६:०२सूरे अन्कबूत के एक भाग में झूठे व गढ़े हुए ख़ुदाओं की कमज़ोरी, पवित्र क़ुरआन की महानता, पैग़म्बरे इस्लाम की सत्यता और नमाज़ सहित दूसरे सदकर्मों का उल्लेख किया गया है।
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ईश्वरीय वाणी-४५
Apr ११, २०१६ ०५:५५सूरे अन्कबूत पवित्र क़ुरआन का 29वां सूरा है।
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ईश्वरीय वाणी-४४
Apr ११, २०१६ ०५:५३हमने बताया था कि सूरए क़सस, पैग़म्बरे इस्लाम के मक्का पलायन करने से पहले उतरा था।