May ०३, २०१६ ०९:१४ Asia/Kolkata

7 मई सन 1913 ईसवी को ब्रिटेन के हाउस आफ़ कामन्स ने महिलाओं को मतदान का अधिकार देने से इंकार कर दिया।

7 मई सन 1928 ईसवी को ब्रिटेन ने महिला मतदाताओं की क़ानूनी उम्र 30 साल से घटाकर 21 साल कर दी। अब अनेक देशों में महिला और पुरुष दोनों के लिए मतदान की क़ानूनी उम्र 18 साल है।

7 मई सन 1954 ईसवी को अमरीका, ब्रिटेन और फ्रांस ने रूस को नैटो की सदस्यता देने से इंकार किया।

7 मई सन 1962 ईसवी को अमरीका ने एटमास्फ़ेयरिक न्युक्लियर टेस्ट किया। यह परीक्षण क्रिसमस द्वीप पर किया गया।

7 मई सन 1975 ईसवी को एस्ट्रानोमी सैटेलाइट एक्सप्लोरर 53 को एक्सरे के बारे में अध्ययन के लिए लांच किया गया।

7 मई सन 1840 ईसवी को रुस के विख्यात संगीतकार पीटर चाइकोफ़िस्की का जन्म हुआ। उन्हेंने संगीत के क्षेत्र में अपनी क्षमता का प्रदर्शन बचपन से आरंभ कर दिया था।

उन्होंने पीटर्ज़बर्ग विश्वविद्यालय में कानून की शिक्षा प्राप्त की और फिर संगीत की ओर अपना ध्यान केन्दित किया। रोमियो एन्ड जूलियट उनकी विख्यात रचना है। अक्तूबर सन 1893 में उनका निधन हुआ।

 

7 मई सन 1888 ईसवी को अफ़्रीक़ा महाद्वीप के ज़िम्बाब्वे देश पर ब्रिटेन का अतिक्रमण आरंभ हुआ। ज़िम्बॉब्वे के अतिग्रहण के योजनाकर ब्रिटेन के एक राजनीतिज्ञ और व्यापारी  सिसेल रुडज़ थे। जिन्होंने ज़िम्बॉब्वे में अपनी एक कम्पनी स्थापित की थी। रुडज़ ने ब्रिटिश सेना की सहायता से ज़िम्बॉब्वे के हज़ारों श्यामवर्ण के लोगों को मरवा दिया। और भारी संख्या में उन्हें बंदी बना लिया और अंतत: इस देश पर अपना पूर्ण अधिकार स्थापित करके इसका नाम अपने नाम पर रोडेशिया रख दिया। इस ब्रिटिश उपनिवेश की स्थानीय जनता ने वर्षों तक साम्राज्यवादियों और गोरे शासकों से संघर्ष करके अंतत: सन 1980 में इस देश के स्वतंत्र कराया और फिर इसका नाम बदल कर ज़िम्बॉब्वे रख दिया गया।

 

7 मई वर्ष 1831 ईसवी को रवीन्द्रनाथ टैगोर का जन्म हुआ उनको गुरुदेव के नाम से भी जाना जाता है। उनके पिता का नाम देवेन्द्रनाथ टैगोर और मां का नाम शारदा देवी था। वह कोलकाता के जोड़ासाँको ठाकुरबाड़ी में जन्में थे। उनकी स्कूल की पढ़ाई प्रतिष्ठित सेंट जेवियर स्कूल में हुई। उन्होंने बैरिस्टर बनने की चाहत में 1878  में इंग्लैंड के ब्रिजटाउन में पब्लिक स्कूल में नाम दर्ज कराया। उन्होंने लन्दन विश्वविद्यालय में कानून का अध्ययन किया लेकिन 1880  में बिना डिग्री हासिल किए ही स्वदेश वापस आ गए। वे विश्वविख्यात कवि, साहित्यकार, दार्शनिक और भारतीय साहित्य के एकमात्र नोबल पुरस्कार विजेता हैं। वे एकमात्र कवि हैं जिनकी दो रचनाएँ दो देशों का राष्ट्रगान बनीं, भारत का राष्ट्र गान जन गण मन और बांग्ला देश का राष्ट्रीय गान आमार सोनार बांग्ला । इस महान भारतीय साहित्यकार की रचनाओं में  लगभग साठ काव्य संकलन, चालीस नाविल और छोटी कहानियां, पचास ड्रामे और  दर्शनशास्त्र की कई छोटी बड़ी पुस्तकें शामिल हैं। 7 अगस्त वर्ष 1941 ईसवी को इस महान साहित्यकार का निधन हो गया।

 

7 मई वर्ष 1813 ईसवी को अंग्रेज़ी भाषा के एक महत्त्वपूर्ण शायर व कवि राबर्ट ब्राउनन्ग का जन्म हुआ। उन्हें आरंभ से ही लिखने पढ़ने में रुचि थी। लार्ड बायरन और शेले जैसे शायरों के अध्ययन और यूरोप की यात्रा ने उनकी कला को चार चांद लगा दिया और वह बहुत ही कम आयु में शायरी करने लगे। 21 वर्ष की आयु में उनकी छपने वाली कविताओं ने पूरे साहित्य जगत में तहलका मचा दिया। वर्ष 1868-69 में उनका काव्य संकलन the ring and the book  प्रकाशित हुआ जिसने उनकी ख्याति को चरम सीमा पर पहुंचा दिया। राबर्ट ब्राउनन्ग ने छोटी कविताएं और ड्रामे भी लिखे हैं। उनका 12 दिसम्बर वर्ष 1889 को इटली में निधन हो गया।

7 मई वर्ष 2010 को ब्रिटेन में हुए आम चुनाव में 650 सीटों में से कंज़रवेटिव पार्टी को 306 , लेबर पार्टी को 258 और  लिब्रल डेमोक्रेटिक पार्टी को 57 सीटें मिली।

7 मई वर्ष 2010 को अमरीका ने पहली बार महिला अधिकारियों की पनडुब्बियों पर तैनाती को मंज़ूरी दी।

7 मई वर्ष 2010 को मिस्र, सऊदी अरब और संयुक्त अरब इमारात विश्व के ऐसे पहले तीन देश बन गए जहाँ वेब पता अंग्रेजी के बजाय अरबी लिपि में इस्तेमाल किया जा सकता है।

 

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18 खुर्दाद सन 1274 हिजरी शम्सी को ईरान के विख्यात लेखक और कुशल अनुवादक सईद नफीसी का तेहरान में जन्म हुआ। उनके पिता का नाम अली अकबर नफीसी था जो बड़े बुद्धिजीवी समझे जाते थे। उन्होंने माध्यमिक शिक्षा के बाद क़ानून और राजनीति के विषय की शिक्षा पूरी की। उन्होंने तेराहन विश्व विद्यालय में इतिहास और साहित्य की शिक्षा दी। वह यूरोप के कई देशों के सांस्कृतिक केंद्रों के सदस्य भी थे। उन्होंने कई महत्वपूर्ण पुस्तकें लिखीं जिनमें तारीखे इजतेमाइए ईरान, अहवाले रुदकी आदि की ओर संकेत किया जा सकता है। सन 1345 हिजरी शम्सी में उनका निधन हुआ।

 

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15 शव्वाल सन 252 हिजरी क़मरी को हज़रत अब्दुल अज़ीम हसनी शहीद हुए। वे पैग़म्बरे इसलाम के नवासे इमाम हसन के वंश से थे। वे एक महान मार्गदर्शक थे। उल्लेखनीय है कि तत्कालीन अब्बासी शासक मोअतज़्ज़ के अत्याचार से तंग आ कर हज़रत अब्दुल अज़ीम तेहरान के दक्षिण में स्थित रै नगर पलायन कर गये और लौगों का मार्गदर्शन करना आरंभ किया। रै शहर में उनका मज़ार आज भी मुसलमान श्रद्दालुओं से भरा रहता है।