बुधवार - पहली जुलाई
पहली जुलाई सन 1646 ईसवी को गोटफ्रीड लिबनीज़ नामक जर्मन गणितज्ञ और दार्शनिक का जन्म हुआ।
1882, पश्चिम बंगाल के दूसरे मुख्यमंत्री डॉक्टर बिधान चंद्र राय का जन्म आज ही के दिन हुआ था।
1938, मशहूर बांसुरी वादक पंडित हरिप्रसाद चौरसिया का जन्म आज ही के दिन हुआ था।
1987, न्यूयॉर्क में खेल को समर्पित स्टेशन 'डब्लूएएफ़एन' स्थापित किया किया।
1881, आज ही के दिन टेलीफ़ोन पर पहली बार इंटरनेशनल कॉल की गई।
1948, मुहम्मद अली जिन्ना ने पाकिस्तान के सेंट्रल बैंक का उद्दघाटन किया।
1921, चीन में कम्यूनिस्ट पार्टी का गठन किया गया।
1994, फ़िलिस्तीन के पूर्व नेता यासिर अराफ़ात 27 साल के निर्वासन के बाद स्वदेश वापस लौटे।
1997, ब्रिटिश सरकार ने हांगकांग का शासन चीन को सौंप दिया।
उन्होंने पहले दर्शनशास्त्र और फिर गणित की शिक्षा प्राप्त की और इस विषय में डॉक्ट्रेट की डिग्री प्राप्त की।
लिबनीज़ ने न्युटन के समकालीन, गणित विशलेषण के नियम का पता लगाया। उन्होंने कई पुस्तकें लिखी जिनमें अच्छाई बुराई शिष्टाचार आदि का नाम लिया जा सकता है।
पहली जुलाई सन 1867 ईसवी को कैनेडा को ब्रिटेन से स्वतंत्रता मिली। 15 वीं शताब्दी ईसवी के अंत में कैनेडा की खोज हुई और उस समय से लगभग दो शताब्दियों तक फ़्रांस और ब्रिटेन ने इस देश पर अधिकार के लिए आपस में कड़ी प्रतिस्पर्धा की जिसके परिणाम स्वरूप इन दोनों साम्राज्यवादी देशों के बीच सन 1689 ईसवी में युद्ध आरंभ हुए जो 75 वर्ष तक जारी रहे और अंतत: फ़्रांस को पराजय हुई। १९वीं शताब्दी ईसवी के आरंभ से कैनेडा में धीरे-2 स्वतंत्रता प्रेमी आंदोलन आरंभ हुआ और सन 1867 ईसवी में इस देश को स्वतंत्रता मिल गयी।
कैनेडा का क्षेत्रफल लगभग एक करोड़ वर्ग किलोमीटर है और इस दृष्टि से यह विश्व का दूसरा बड़ा देश है। यह देश तीन महासागरों से घिरा हुआ है इसकी ज़मीनी सीमा केवल अमरीका से मिलती है।

पहली जुलाई सन 1960 ईसवी को ब्रिटेन और इटली के अधिकार वाले सोमालिया के दोनों भागों के एक हो जाने के बाद सोमालिया एक देश के रूप में स्वतंत्र हुआ। अतीत में यह देश बहुत कम ही समय के लिए स्वतंत्र रहा है। सन 1884 में ब्रिटेन ने सोमालिया के कुछ भागों को अपने अधिकार में कर लिया । पांच वर्ष बाद इटली ने भी इस देश के कुछ भागों पर अधिकार कर लिया।
इस बीच मोहम्मद बिन अब्दुल्लाह हेसान नामक स्थानीय नेता ने 1901 ईसवी से 1920 ईसवी तक ब्रिटेन के विरुद्ध निष्फल संघर्ष किया। संयुक्त राष्ट्र संघ ने सन 1950 ईसवी में इटली से सोमालिया की स्वतंत्रा की भूमिका तैयार करने की मांग की और सन 1960 ईसवी में ब्रिटेन और इटली दोनों ही के अधिकार वाले सोमालिया के क्षेत्र स्वतंत्र होकर एक हो गये। यह देश अफ़्रीका महाद्वीप के पूर्वी भाग में हिंद महासागर और अदन खाड़ी के तट पर स्थित है इसका क्षेत्रफल 637 हज़ार वर्ग किलोमीटर है कीनिया, इथोपिया और जिबूती इसके पड़ोसी देश है।

पहली जुलाई सन 1962 ईसवी को ब्रुनई नामक छोटे से देश ने अपनी स्वतंत्रता की घोषणा की। यह देश 1899 से 1917 ईसवी तक रवांडा के साथ जर्मनी का उपनिवेश रहा। प्रथम विश्व युद्ध के बाद यह देश बेल्जियम के अधिकार में चला गया और 1962 में यह देश अपनी राजशाही शासन व्यवस्था के साथ स्वतंत्र हुआ। आज ही के दिन रवांडा को भी स्वतंत्रता मिली।

पहली जुलाई सन 1997 ईसवी को ब्रिटेन ने महत्वपूर्ण द्वीप हांग कांग को 155 वर्ष के अतिग्रहण के बाद चीन को लौटा दिया।

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11 तीर सन 1361 हिजरी शम्सी को ईरान में यज़्द नगर के इमामे जुमा, संघर्षकर्ता धर्मगुरु, आयतुल्लाह मोहम्मद सदूक़ी आतंकवादी गुट एम के ओ के तत्वों के हाथों शहीद हुए। और ईरान की इस्लामी क्रान्ति के इतिहास में मस्जिद के मेहराब के तीसरे शहीद के रुप में अमर हो गये। उन्होंने पवित्र नगर क़ुम में अपनी शिक्षा पूरी की। ईरान में शाह की अत्याचारी सरकार के विरुद्ध संघर्ष में आयतुल्लाह सदूक़ी आगे आगे रहे। वे इमाम ख़ुमैनी के निकट मित्रों में समझे जाते थे। इस्लामी क्रान्ति की सफलता के बाद उन्होंने देश का संविधान तैयार करने में महत्वपूण भूमिका निभाई। आयतुल्लाह सदूक़ी यज़्द के इमाम जुमा और इमाम ख़ुमैनी के प्रतिनिधि थे। उन्होंने जनता विशेषकर वंचितों और पीड़ितों की बड़ी सेवा की जिसके कारण उन्हे बड़ी लोकप्रियता प्राप्त हुई।
आज के दिन जब वे नमाज़ में लीन थे आतंकवादी गुट एम के ओ के तत्वों ने उन्हें शहीद कर दिया।
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9 ज़ीक़ादा सन 394 हिजरी क़मरी को ईरान के बल्ख़ नगर में प्रसिद्ध लेखक व कवि नासिर ख़ुसरो क़ोबादियानी का जन्म हुआ। बल्ख़ जो अब उत्तरी अफ़ग़ानिस्तान में है उस समय ईरान का भाग था।
नासिर ख़ुसरो ने अरबी और फ़ार्सी भाषाओं के साथ ही गणित, खगोल शास्त्र, चिकित्सा विज्ञान आदि विषयों का भी गहन अध्ययन किया।
वे पहले तो कुछ दिनों तक महमूद और मसउद गज़्नवी के दरबारों में काम करते रहे किंतु बाद में राजनीति से दूरी बनाते हुए विभिन्न धर्मों और मतों के बारे में अध्ययन और शोध में जुट गये। उन्होंने इस उद्देश्य से सात वर्षों तक यात्रा की जिसमें उन्होंने मिस्र अरब, रोम आदि क्षेत्रों को देखा। उन्होंने कई महत्वपूर्ण पुस्तकें भी लिखी हैं।