शुक्रवार- 3 जुलाई
3 जूलाई सन 1751 ईसवी को स्वेडन के रसायनशास्त्री और खदान विशेषज्ञ फ्रेडरिक क्रोन्स्टलर निकेल नामक धातु का पता लगाने में सफल हुए।
1661, पुर्तगाल ने मुंबई और तंजौर इंग्लैंड के राजा चार्ल्स द्वीतीय को दिया।
1908, बाल गंगाधर तिलक को अंगरेज़ सरकार ने देशद्रोह का आरोप लगाकर गिरफ्तार किया।
1962, फ्रांसीसी राष्ट्रपति ने अल्जीरिया की आज़ादी की घोषणा की।
1979, कोलकाता में दूसरे हावड़ा पुल के नाम से मशहूर विद्यासागर सेतु का निर्माण शुरु हुआ।
1992, रियो डि जेनेरो (ब्राज़ील) में पृथ्वी सम्मेलन शुरु हुआ।
1999, कुवैत में 50 सदस्यीय संसद का चुनाव सम्पन्न हुआ।
2004, रूस की मारिया शारापोवा महिला विम्बलडन विजेता बनीं।
2005, महेश भूपति और मेरी पियर्स ने विंबलडन का मिश्रित जोड़ी ख़िताब जीता।
2008, न्यूयार्क में दलितों का सम्मेलन शुरू हुआ।
लम्बे समय के निरंतर शोधकार्य और प्रयोग के बाद उन्होंने इस महत्वपूर्ण धातु का पता लगाया। यह धातु इस समय औद्योगिक दृष्टि से बहुत महत्वपूर्ण है। अपने अधिक टिकाउपन के कारण यह विभिन्न औद्योगिक क्षेत्रों में प्रयोग होती है।
3 जूलाई सन 1883 ईसवी को चेक गणराज्य के विख्यात लेखक फ्रैन्टस कैफ़का पैदा हुए। उन्हें बड़े लेखों और रचनाओं का अध्ययन करने में बड़ी रुचि थी। और फिर धीरे धीरे वे स्वयं भी लिखने लगे। चूँकि उनका बचपन कठिनाइयों में बीता इस लिए वे संसार को बड़ी ही निराशा के साथ देखते थे। वे सारी वस्तुओं को निराश करने वाली और व्यर्थ समझते थे। उनकी यह विशेषता उनकी रचनओं में स्पष्ट रुप से देखी जा सकती है। सन 1924 में टीबी के रोग में कैफ़का का निधन हुआ।
3 जुलाई सन 1904 ईसवी को अंतर्राष्ट्रीय ज़ायोनिज़्म के संस्थापक थ्योडोर हर्टज़ल का निधन हुआ। वे सन 1860 ईसवी में हंग्री की राजधानी बुडापेस्ट में जन्मे और कुछ समय के बाद ऑस्ट्रिया चले गये। यहॉ उनके मन में यहूदियों को एक अलग देश में एकत्रित करने के विचार ने ज़ोर पकड़ा। इसी कारण उन्होंने 1895 में "यहूदी सरकार नामक" पुस्तक लिखी जिसमें उन्होंने वर्चस्ववाद और जातीय दृष्टि से स्वयं को श्रेष्ठ समझने के ज़ायोनी विचार को पेश किया। हर्टज़ल और उनके जैसे विचारकों ने सन 1897 में स्विटज़रलैंड के बाल नगर में एक सम्मेलन का आयोजन किया जिसमें अंतर्राष्ट्रीय ज़ायोनिज़्म संगठन की स्थापना की गयी।
फ़िलिस्तीन को हड़पने के ज़ायोनियों के लक्ष्य की पूर्ती हेतु हर्टज़ल ने उसमानी शासन को तैयार करने का प्रयास किया किंतु उस समय उन्हें इस प्रयास में सफलता न मिल सकी ।
हर्टज़ल स्वयं तो सन 1904 ईसवी में मर गये किंतु जातिवादी अवैध ज़ायोनी शासन की स्थापना में, वे महवपूर्ण भूमिका निभा गये।
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13 तीर सन 1350 हिजरी शम्सी को ईरान में साहित्य के विख्यात प्रोफेसर डॉक्टर मोहम्मद मोईन का निधन हुआ। उन्होंने फार्सी साहित्य और संस्कृति की सेवा में कई वर्षों तक कठिन परिश्रम किए। सन 1293 में उत्तरी ईरान के रश नगर में उनका जन्म एक धार्मिक परिवार में हुआ था।
उन्होंने अरबी साहिरत्य और दर्शनशास्त्र की भी शिक्षा प्राप्त की। सन 1321 हिजरी शम्सी में डॉक्ट्रेट की डिग्री प्राप्त करने के बाद वे तेहरान विश्व विद्यालय में साहित्य की शिक्षा देने लगे। उन्होंने हिकमते इशराक़ व फरहंगे ईरान आईनए इसकंदर आदि प्रसिद्ध पुस्तकें लिखी हैं।
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11 ज़ीक़ादा सन 148 हिजरी क़मरी को पैग़म्बरे इस्लाम के पौत्र इमाम अली रज़ा अ का मदीना नगर में जन्म हुआ। इमाम अली रज़ा अ ने अपने पिता की शहादत के बाद वर्ष 183 हिजरी क़मरी में जनता के नेतृत्व व मार्गदर्शन का ईश्वरीय दायित्व संभाला। उनका जनता में बड़ा प्रभाव था जिससे तत्कालीन अब्बासी शासक मामून हमेशा भयभीत रहता था। उसने लोगों में इमाम की लोकप्रियता एवं मान्यता कम करने के लिए बहुत सी चालें चलीं। ऐसी ही एक चाल के अंतर्गत उसने इमाम रज़ा अ को अपना उत्तराधिकरी घोषित कर दिया और उन्हें मदीना नगर से ईरान के उत्तरपूर्वी नगर मर्व बुला लिया। इस प्रकार वह इमाम पर कड़ी नज़र रखना चाह रहा था। इमाम विवशत: मर्व गये किंतु उन्होंने वहॉ भी सरकारी कामों के बजाए स्वयं को जनता के मार्दर्शन में ही व्यस्त रखा। उनकी लोकप्रियता से डर कर मामून ने वर्ष 203 हिजरी क़मरी में उन्हें शहीद करवा दिया।1 ज़ीक़ादा सन 321 हिजरी क़मरी को ईरान में आले बूये परिवार के 128 वर्षीय शासन का आरंभ हुआ। इस शासन श्रृंखला की नींव डालने वाले अली, हसन और अहमद थे। इन लोगों ने अपने शासन काल में बहुत से क्षेत्रों को अपने अधीन किया। वे शिक्षा को बड़ा महत्व देते थे।