रविवार- 5 जुलाई
5 जुलाई सन 1811 ईसवी को वेनेज़ोएला देश को स्वतंत्रता मिली और प्रतिवर्ष आज के दिन इस देश में स्वतंत्रता का उत्सव मनाया जाता है।
1977, पाकिस्तान की सैनिक क्रान्ति में प्रधानमंत्री भुट्टो सत्ताच्युत एवं गिरफ्तार, वहाँ जनरल जियाउल हक़ ने सत्ता संभाली।
1998, पीट सम्प्रास ने पांचवीं बार विम्बलडन का एकल ख़िताब जीता।
1999, संयुक्त राज्य अमेरिका द्वारा तालिबान पर प्रतिबंध की घोषणा।
2000, दुशानबे (कज़ाकिस्तान) में शंघाई -5 देशों का सम्मेलन प्रारम्भ।
2001, चुनाव में पराजय के बाद बुल्गारिया के प्रधानमंत्री श्वान कोस्तोव ने अपने पद से इस्तीफ़ा दिया।
2002, काठमांडु में नेपाली कांग्रेस पार्टी के मुख्यालय में बम विस्फोट में 10 व्यक्ति घायल।
2004, ग्रीस ने यूरो कप 2004 फ़ुटबाल प्रतियोगिता जीतकर इतिहास बनाया।
2007, मैक्सिको के दक्षिणी प्रान्त ट्यूबला में हुए भू-स्खलन से 60 लोगों की मृत्यु।
2008, नेपाल की अंतरिम कैबिनेट ने संविधान संशोधन के लिए विधेयक लाने का प्रस्ताव पारित किया।
16वीं ईसवी शताब्दी के आरंभ से लेकर तीन शताब्दियों तक यह देश स्पेन के अधिकार में रहा। इस दौरान इस देश के स्थानीय लोगों को भारी आघात पहुँचाए गये। इस प्रकार से दसियों हज़ार स्थानीय रेड इंडियन्स मार डाले गये और स्पेन से आए लोगों ने उनका स्थान ले लिया। 19वीं ईसवी शताब्दी के आरंभ से इस देश में स्वतंत्रता के लिए आंदोलन छिड़े जिसका नेतृत्व फ़्रांसिस्को मेरांडा ने किया। मेरांडा ने सन 1806 ईसवी में देश को स्वतंत्र करने का पहला प्रयास किया किंतु उन्हें सफलता नहीं। मिली। बाद के वर्षो में उन्होंने दक्षिणी अमरीका के विख्यात स्वतंत्रताप्रेमी संघर्षकर्ता साइमन बोलिवर के साथ मिलकर संघर्ष जारी रखा और सन 1811 में स्पेन की सेना को हराकर वेनेज़ोएला को स्वतंत्र कराया। इस देश का क्षेत्रफल 9 लाख 12 हज़ार 50 वर्ग किलोमीटर है यह लैटिन अमेरिका के उत्तर पश्चिमी भाग में प्रशांत महासागर के तट पर स्थित है।
5 जुलाई सन 1962 ईसवी को अलजीरिया की जनता ने फ़्रांसीसी अतिग्रहणकारियों से वर्षो तक संघर्ष करने और दस लाख शहीदों का बलिदान देने के बाद स्वतंत्रता प्रापत की। फ़्रांसीसियों ने सन 1830 में अलजीरिया पर अधिकार के लिए आक्रमण किया अलजीरियायी जनता ने इस आक्रमण का डटकर मुक़ाबला किया प्रतिरोध का नेतृत्व करने वाले अलजीरियायी संघर्षकर्ता अमीर अब्दुल क़ादिर अलजज़ायारी वर्ष
तक फ्रांसीसी अतिग्रहणकारियों से लड़े और उन्हें कई मोर्चा पर पराजिय का सामना भी कराया। किंतु अंतत: 17 वर्ष के प्रतिरोध के बाद फ़्रांसीसी सेना ने उनहें गिरफतार कर लिया। जिसके बाद धीरे धीरे पूरे देश पर फ़्रांस का अधिकार हो गया द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान फ्रांस ने 1944 तक अलजीरियस नगर को अपनी अस्थायी राजधानी भी बनाया।
द्वितीय विश्व युद्ध के बाद इस देश में स्वतंत्रता के लिए प्रयास तेज़ हुए और 1962 में फ़्रांसीसी शासक जनरल डीगाल ने फ़्रांसीसी जनता और विश्व जनमत के दबसव में अलजीरिया को स्वतंत्र किया। और फिर अहमद बिन बिला इस देश के पहले राष्टपति चुने गये।

5 जुलाई वर्ष 1977 को पाकिस्तानी सेना के प्रमुख जनरल ज़ियाउल हक़ ने पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री ज़ुल्फ़ेक़ार अली भुट्टो का तख़्ता उलट दिया और उन पर हत्या और देश द्रोह का आरोप लगाते हुए सन 1979 को उनको फांसी पर चढ़ा दिया। जनरल मुहम्मद ज़िया उल हक़ का जन्म 12 अगस्त 1924 में हुआ था वह पाकिस्तान के चौथे फ़ौजी तानाशाह और छठे राष्ट्रपति थे। उनका शासन जुलाई 1977 से अगस्त 1988 में हवाई जहाज़ दुर्घटना में हुई उनकी मृत्यु तक चला। उन्हें 1976 में तत्कालीन प्रधानमन्त्री ज़ुल्फ़ेक़ार अली भुट्टो ने सेनाधाक्ष बनाया था लेकिन उन्होंने सैन्यविद्रोह द्वारा तख़्ता पलटकर सत्ता पर क़ब्ज़ा जमा लिया और भुट्टो को फांसी दिलवा दी। उन्होंने पाकिस्तान की असेम्बलियों को भंग और पत्र पत्रिकाओं तथा राजनैतिक दलों को प्रतिबंधित कर दिया। वर्ष 1985 में आंतरिक दबाव के कारण उन्होंने चुनाव कराया और सैन्य सरकार को समाप्त कर दिया। फिर भी इस देश में प्रजातंत्र की बहाली के गठजोड़ ने उनसे सत्ता छोड़ने की मांग की। उन्होंने वर्ष 1988 में पुनः संसद भंग कर दिया और प्रधानमंत्री को हटा दिया और नये चुनाव कराने का वचन दिया। सन् 1979 में अफ़ग़ानिस्तान में सोवियत संघ के हस्तक्षेप के विरुद्ध उन्होने अमरीका की सहायता से एक गुप्त युद्ध चलाया जिसके परिणाम में सोवियत संघ को अफ़ग़ानिस्तान छोड़ना पड़ा किन्तु साथ-ही-साथ पाकिस्तान और इसके पड़ोसी क्षेत्रों में उग्रवाद की भूमिका प्रशस्त हुई। उन्होंने पाकिस्तान में कई अतिवादी गुट पैदा किये। अंतत: 17 अगस्त 1988 के ज़ियाउल हक़ की कई सेनाधिकारियों के साथ एक सैनिक विमान दुर्घटना में मोते हो गयी।

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13 ज़ीक़ादा सन 508 हिजरी क़मरी को इस्लामी जगत के विख्यात धर्मगुरु और उपदेशक इब्ने जौज़ी का इराक़ के बग़दाद नगर में जन्म हुआ। उन्होंने शिक्षा प्राप्ति के लिए कुछ वरिष्ठ धर्मगुरुओं के साथ विभिन्न स्थानों की यात्राएं कीं। इब्ने जौज़ी एक विद्वान और विनम्र तथा दयालु व्यक्ति थे। लोगों में उनका बड़ा आदर और सम्मान था। उन्होंने कई पुस्तकें लिखीं हैं जिनमें अलमुन्तज़िम, अल ईज़ाहुल क़पानीन, मवाएजुल मुलूक आदि का नाम लिया जा सकता है। सन 597 हिजरी क़मरी में इब्ने जौज़ी का निधन हुआ।