सोमवार- 6 जुलाई
6 जुलाई सन 1265ईसवी को इटली के वरिष्ठ शायर डान्ते ऐलीगरी का फ़्लोरेंस नगर में जन्म हुआ।
6 जुलाई सन 1265ईसवी को इटली के वरिष्ठ शायर डान्ते ऐलीगरी का फ़्लोरेंस नगर में जन्म हुआ। उन्हें साहित्य के अलावा राजनीति में भी दक्षता प्राप्त थी। उन्होंने साहित्य के क्षेत्र में कई पुस्तकें लिखी जिनमें सबसे महत्वपूर्ण पुम्तक का हिन्दी अनुवाद ईश्वरीय मज़ाक़ है। उनकी इस पुस्तक का बहुत सी भाषाओं में उनुवाद हो चुका है।
- 5 जुलाई सन् 1483 में रिचर्ड III इंग्लैंड के राजा बने थे।
- 5 जुलाई सन् 1885 में लुई पाश्चर ने रेबीज़ के टीके का सफलतापूर्वक परीक्षण किया।
- 5 जुलाई सन् 1859 में स्कॉटलैंड के धर्मगुरू और विख्यात खोजकर्ता डेविड लेविंगस्टन ने पहली बार इस धरती पर पैर रखा। जिसके बाद ब्रिटेन ने इस देश पर अधिकार कर लिया।
- 5 जुलाई सन् 1944 में महात्मा गांधी को पहली बार नेताजी सुभाषचंद्र बोस ने राष्ट्रपिता कहा।
- 5 जुलाई सन् 1961 को मोज़ाम्बिक के निकट पुर्तगाली जहाज़ में हुए विस्फोट से 300 लोग मरे।
- 5 जुलाई सन् 1964 में अफ्रीक़ा महाद्वीप का देश मलावी ब्रिटेन से आज़ाद हुआ और आज के दिन को इस देश का राष्ट्रीय दिवस घोषित किया गया।
- 5 जुलाई सन् 2005 को मैक्सिको में मानव का चालीस हज़ार वर्ष पुराना पदचिह्न मिला।
- 5 जुलाई सन् 2006 में 44 वर्ष बाद भारत-चीन में 1962 के युद्ध के बाद से बंद पड़े नाथुला दर्रे को खोला गया। यहां से भारत और चीन के बीच व्यापार होता था।
- 5 जुलाई सन् 2008 में दक्षिणी मिस्र में 5000 साल पुराने शाही क़ब्रिस्तान की खोज की गई।
- 5 जुलाई सन् 2014 ज़ायोनी शासन (इस्राईली) वायु सेना ने में गाज़्ज़ा पट्टी पर हमला करके इस्लामी प्रतिरोध आंदोलन हमास के सात सदस्यों की हत्या कर दी थी।
6 जुलाई सन 1885 ईसवी को हाईड्रोफ़ोबिक अर्थात जलातंक की बीमारी का टीका खोज लिया गया। फ्रांस के वैज्ञानिक लुई पास्चर ने इस टीके का आज के दिन सफल टेस्ट किया। इस टीके का पता लग जाने के बाद जलातंक की संक्रमक बीमारी जो पशुओं विशेषकर कुत्ते के काटने से मनुष्य में फैलती है मनुष्य की वैज्ञानिक प्रगति से पराजित हो गयी। इस बीमारी में मनुष्य पानी से डर लगे लगते।
6 जुलाई सन 1962 ईसवी को अमरीकी लेखक विलियम फ़ॉल्कनर का निधन हुआ। वे सन 1897 ईसवी में जन्मे। प्रथम विश्व युद्ध में भाग लेने के बाद वे स्वदेश लौटे और सन 1925 में अपने देश के लेखक शेखुड ऐंडरसन से परिचित होने के बाद कहानिया लिखना आरंभ कर दिया। उन्होंने अपनी कहानियों में अमरिकी समाज की समस्याओं विशेषकर श्याम वर्ण वालों के साथ भेदभाव का उल्लेख किया। उनकी पुस्तकों में क्रोध और हंगामा, कीड़े मकोड़े आदि का नाम लिया जा सकता है।
6 जुलाई सन 1964 ईसवी को अफ्रीक़ा महाद्वीप का देश मलावी ब्रिटेन से आज़ाद हुआ। और आज के दिन को इस देश का राष्ट्रीय दिवस घोषित किया गया। सन 1859 ईसवी में स्कॉटलैंड के धर्मगुरू और विख्यात खोजकर्ता डेविड लेविंगस्टन ने पहली बार इस धरती पर पैर रखा। जिसके बाद ब्रिटेन ने इस देश पर अधिकार कर लिया। ब्रिटेन को यहा जर्मनी और पुर्तग़ाल के आक्रमणों का सामाना करना पड़ा। अंतत: सन 1891 में ब्रिटेन ने पूरी तरह इस देश पर अपना स्वमित्व स्थापित कर लिया और यह देश ब्रिटेन का उपनिवेश बन गया। इस प्रकार इस देश के प्राकृतिक स्रोतों की लूटपाट चरम सीमा पर पहुँच गयी। सन 1953 में ब्रिटेन की सरकार ने दक्षिणी और केद्रीय अफ़्रीक़ा में अपने उपनिवेशों को एकजुट करके उनके प्राकृतिक स्रोतों की लूटपाट को सरल बनाने के लिए मालावी एवं रोडेशिया फेडरेशन बनायी। स्थानीय श्यामवर्ण के लोगों ने इस निर्णय का कड़ा विरोध किया। 1962 में व्यापक प्रदर्शनों के बाद इस फेडरेशन को तोड़ने के लिए आंदोलन छेड़ा गया। अंतत: 1963 में यह फेडरेशन समाप्त हो गया जिसके बाद 6 जुलाई सन 1964 ईसवी को यहदेश पूरी तरह स्वतंत्र हो गया।

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16 तीर सन 1365 हिजरी शम्सी को पैग़म्बरे इस्लाम के परिजनों के बारे में शर कहने वाले ईरान के प्रसिद्ध शायर सैयद रज़ा हुसैनी का निधन हुआ। उन्हें समय का सअदी कहा जाता था। सन 1289 हिजरी शम्सी में ईरान के आज़रबाइजान क्षेत्र में उनका जन्म हुआ था। उन्हें अरबी, फ़ार्सी और तुर्की साहित्य में दक्षता प्राप्त थी।
16 तीर सन 1301 हिजरी शम्सी को ईरान के प्रसिद्ध धर्मगुरु ज़ैनुलआबेदीन मंरदी का निधन हुआ। उन्होंने आरंभिक शिक्षा ईरान के आज़रबाइजान के मरंद क्षेत्र में प्राप्त की और उसके बाद इराक़ के नजफ़ नगर का रुख़ किया जहां उन्होंने बड़े बड़े धर्मगुरुओं से शिक्षा प्राप्त की। बाद में आज़रबाइजान के बहुत से क्षेत्रों में लोग धार्मिक शिक्षाओं में उनका अनुसरण करने लगे और अन्तत: सन 1301 हिजरी शम्सी में 72 साल की आयु में उनका निधन हो गया।
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14 ज़ीक़ादा सन 387 ईसवी को इराक़ के बग़दाद नगर में विख्यात धर्मगुरु और वक्ता इब्ने समऊन का निधन हुआ। उन्होंने ज्ञान प्राप्ति के लिए बहुत सी यात्राएं की जिसके परिणाम स्वरुप वे कई महत्वपूर्ण पुस्तकें लिखने में सफल हुए।
उनकी पुस्तकों में अलअमाली नामक पुस्तक का नाम लिया जा सकता है। जो मुस्लिम धर्मगुरओं के बीच प्रसिद्ध पुस्तकों में से है।
14 ज़ीक़ादा सन 1294 ईसवी को मुसलमान विद्वान और कुशल शिक्षक आयतुल्ला जुन्नूरी का ईरान के उत्तर पश्चिमी क्षेत्र तबरेज़ में जन्म हुआ। उन्होंने तबरेज़ में रहकर धार्मिक विषयों और अरबी साहित्य की शिक्षा ली। और फिर उच्चस्तरीय शिक्ष के लिए इराक़ के नजफ़ नगर रवाना हो गये। नजफ़ में ज्ञान प्राप्ति के बाद वे ईरान लौटे और लोगों की शिक्षा एवं प्रशिक्षण में लीन हो गये। उनके कुशल शिष्यों की संख्या बहुत थी। उन्होंने कई लाभदायक पुस्तकें भी लिखी हैं।