Jul ०८, २०१६ ०६:२० Asia/Kolkata

8 जुलाई वर्ष 1880 को फ़्रांसीसी दार्शनिक व फ़्रिनॉलजे अर्थात खोपड़ी के ज्ञान की आधार शिला रखने वाले वैज्ञानिक पियर पॉल ब्रोका का निधन हुआ।

  • 8 जुलाई वर्ष १४९७ को प्रख्यात नाविक वास्को डि गामा ने यूरोप से भारत की प्रथम जलयात्रा आरंभ की।
  • 8 जुलाई वर्ष १८८९ को वॉल स्ट्रीट पत्रिका का प्रकाशन आरंभ हुआ।
  • 8 जुलाई वर्ष १९५४ को सतलुज नदी पर निर्मित भाखड़ा नांगल पनबिजली परियोजना पर बनी सबसे बड़ी नहर का भात के तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने उद्घाटन किया था।
  • 8 जुलाई वर्ष १९७५ को म्यामाँर में आए भूकंप में हजारों उपासना स्थल ध्वस्त हो गए और जान-माल की क्षति हुई।
  • 8 जुलाई वर्ष १९१४ को भारत के प्रख्यात राजनितिज्ञ, भारतीय मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के नेता और पश्चिम बंगाल के पूर्व मुख्यमंत्री ज्योति बसु का जन्म हुआ।

 

8 जुलाई वर्ष 1880 को फ़्रांसीसी दार्शनिक व फ़्रिनॉलजे अर्थात खोपड़ी के ज्ञान की आधार शिला रखने वाले वैज्ञानिक पियर पॉल ब्रोका का निधन हुआ। वे वर्ष 1824 में फ़्रांस में जन्मे। आरंभिक शिक्षा के पश्चात उन्होंने विश्वविद्यालय में प्रवेश लिया तथा चिकित्सा के क्षेत्र में शल्य चिकित्सक बने। ब्रोका ने साथ ही साथ शोध कार्य भी जारी रखा यहां तक कि उन्होंने मस्तिष्क में फोड़े के उपचार के लिए उसमें चिकित्सकों के लिए विशेष आरी और ड्रिल से छेद किया। फ़्रांस के इस चिकित्सक ने मृतकों की खोपड़ियों पर शोध जारी रखते हुए बहुत ही महत्वपूर्ण खोज की।  ब्रोका इस परिणाम तक पहुंचे कि मनुष्य के मस्तिष्क में बात करने का केन्द्र मस्तिष्क के बाएं अर्धवृत्त भाग में स्थित है और मस्तिष्क के इस भाग को पहुंचने वाली हर क्षति के परिणाम में व्यक्ति बोलने में अक्षम हो जाता है। इस प्रकार पहली बार यह पता चला कि मनुष्य की एक शारीरिक क्षमता को नियंत्रित करने का केन्द्र मस्तिष्क में स्थित है।

 

8 जुलाई वर्ष 1956 ईसवी को इतालवी विचारक व लेखक ज्योवानी पापिनी का निधन हुआ। 1881 में इटली के फ़्लोरेंस नगर में उनका जन्म हुआ। ज्योवानी पापिनी का बचपन और लड़कपन कठिनाइयों में बीता। ज्ञान प्राप्ति की जिज्ञासा में वे सार्वजनिक पुस्तकालय तक पहुंचे और इस प्रकार उन्होंने अपने ज्ञान में वृद्धि की और धीरे धीरे साहित्य में उनकी क्षमता उभर कर सामने आयी। पापिनी ने युवावस्था में अपने जीवन पर आधारित एक किताब लिखी जिसमें धर्म में उनकी आस्था न होने तथा उनकी मानसिक उलझनों का चित्रण था। यह किताब पापिनी की युवास्था की उत्कृष्ट रचना समझी जाती है जिसमें कहानी लिखने की उनकी क्षमता सामने आयी। प्रथम विश्व युद्ध के पश्चात उनके हृदय में बहुत बड़ा परिवर्तन आया। जिसके परिणाम में गिरजाघर के विरुद्ध वे अपने विचार को छोड़ कर धर्म की ओर उन्मुख हुए। पापिनी की अनेक साहित्यिक रचनाएं मौजूद हैं।

 

8 जुलाई सन 1994 को उत्तरी कोरिया के पूर्व राष्ट्राध्यक्ष और इस देश की कम्युनिष्ट पार्टी के महासचिव किम ईल सोंग का निधन हुआ।वे सन 1912 में जन्में थे। उन्होंने बड़ी तेज़ी से प्रगति की और कम्युनिस्ट पार्टी का नेतृत्व अपने हाथ में ले लिया और सन 1948 में वे प्रधान मंत्री बने। कोरिया युद्ध के दौरान वे सेना प्रमुख थे और सन 1972 में उत्तरी कोरिया के राष्ट्रपति बने। वे कोरिया प्रायद्वीप के विभाजन और इस क्षेत्र में विदेशी शक्तियों विशेषकर अमरीका के हस्तक्षेप के कठिन समय में उत्तरी कोरिया के नेता थे। इसी प्रकार उन्होंने उस समय के दो बड़े कम्युनिस्ट देशों के बीच अपनी स्वाधीनता को भी सुरक्षित रखने का प्रयास किया। इसी तरह उत्तरी कोरिया की आर्थिक उन्नति के लिए उनके प्रयास किसी हद तक सफल रहे। उनके निधन के बाद उनके पुत्र किम जोंग इल उत्तरी कोरिया के राष्ट्राध्यक्ष बने।

8 जुलाई सन 1996 ईसवी को अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय ने एक महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए युद्ध के दौरान परमाणु हथियारों की धमकी को गैर कानूनी ठहराया।

 

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16 ज़ीक़ादा सन 326 हिजरी क़मरी को ईरान में आले बूये शासन श्रृंखला के विख्यात मंत्री इस्माईल बिन एबाद का जन्म हुआ। उन्होंने शिक्षा प्राप्ति और गहन अध्ययन के बाद शिक्षा देना आरंभ किया। उन्हें अरबी और फ़ार्सी साहित्य से बहुत लगाव था। उनके कई पद्य संकलन अब भी सुरक्षित हैं।

 

16 ज़ीक़ादा सन, 1309 हिजरी क़मरी को ईरान के विख्यात धर्मगुरु आयतुल्ला ज़ेनुल आबेदीन माज़न्दरानी का निधन हुआ। उन्होंने आरंभिक शिक्षा प्राप्ति के बाद उच्चस्तरीय शिक्षा के लिए इराक़ के पवित्र नगर  नजफ़ की यात्रा की। माज़न्दरानी मुर्तज़ा अन्सारी जैसे इस्लामी जगत के विश्व विख्यात धर्मगुरु के शिष्य बने। आयतुल्ला ज़ैनुल आबेदीन समाज के दीन दुखियों का बहुत ध्यान रखते और उनकी समस्याओं को दूर करने के लिए निरंतर प्रयास करते थे। वे बहुत ही विनम्र स्वभाव के थे जिसके कारण उनका बड़ा सम्मान था।