Jul ०९, २०१६ ०८:१२ Asia/Kolkata

9 जुलाई सन 1816 ईसवी को अर्जेनटाइना को स्वतंत्रता मिली।

16 वीं ईसवी शताब्दी के आरंभ में यह देश स्पेन का उपनिवेश बना। 19वीं ईसवी शताब्दी के आरंभ में स्पेन की सेना ब्रिटेन के साथ निरंतर युद्ध के कारण कमजोर पड़ गयी और ब्रिटेन ने अर्जेनटाइना की राजधानी ब्यूनस आयरिस पर अधिकार कर लिया। स्थानीय जनता ने इसका कड़ा प्रतिरोध किया और ब्रिटिश सैनिकों को अपने देश से मार भगाया। अंतत: आज के दिन अर्जेनटाइना को स्वतंत्रता मिल गयी।

अर्जेनटाइना का क्षेत्रफल 27 लाख 80 हज़ार 92 वर्गकिलोमीटर है। यह देश एटलांटिक महासागर के तट पर दक्षिणी अमरिका में स्थित है। चिली बोलीविया, पराग्वे, और उरुग्वे इसके पड़ोसी देश हैं।

  • 9 जुलाई सन् 1815 में अमेरिका में पहले प्राकृतिक गैस के कुएं की खोज की गई।
  • 9 जुलाई सन् 1875 में भारत देश का पहला स्टॉक एक्सचेंज बम्बई (मुम्बई) स्टॉक एक्सचेंज की स्थापना हुई।
  • 9 जुलाई सन् 1877 में पहली विंबल्डन टेनिस प्रतियोगिता का आयोजन हुआ।
  • 9 जुलाई सन् 1889 में अमेरिकी अख़बार द वॉल स्ट्रीट जर्नल का प्रकाशन शुरू हुआ।
  • 9 जुलाई सन् 1944 में नेताजी सुभाष चंद्र बोस जी ने भारत को ब्रिटिश शासन से स्वतंत्र कराने के लिए आज़ाद हिन्द फ़ौज का नेतृत्व स्वीकार किया था।
  • 9 जुलाई सन् 2008 में इस्लामी गणतंत्र ईरान ने लम्बी एवं मध्यम दूरी तक प्रहार क्षमता वाले नौ प्रक्षेपास्त्रों का परीक्षण किया।

9 जुलाई सन 1948 ईसवी को एक महीने के संघर्ष विराम के बाद अरबों और जायोनी शासन के बीच दोबारा युद्ध आरंभ हो गया। यह युद्ध मई सन 1948 में अतिग्रहणकारी जायोनी शासन की स्थापना के बाद से आरंभ हुआ था। जून के महीने में संयुक्त राष्ट्र संघ की सुरक्षा परिषद की मांग पर दोनो पक्षों के बीच संघर्ष विराम हुआ। एक महीने के संघर्ष विराम के दौरान ज़ायोनी शासन को अपने पश्चिमी समर्थकों से भारी मात्रा में हथियार और सैन्य उपकरण मिल गये और आज के दिन ज़ायोनियों ने पुन: युद्ध छेड़कर भारी सफलता भी प्राप्त कर ली। सशस्त्र ज़ायोनी गुटों ने सुरक्षा परिषद के संघर्ष विराम के लिए दोबारा की गयी मांग को उस समय स्वीकार किया जब वे अपने लक्ष्यों तक पहुंच चुके थे। जनवरी सन 1949 ईसवी में दोनों पक्षों के बीच युद्ध विराम के समझौते पर हस्ताक्षर हुए। इस बीच फिलिस्तीन देश की 78 प्रतिशत भूमि पर जायोनी शासन का अधिकार हो चुका था जिसके कारण 7 लाख 50 हज़ार फिलिस्तीनी पलायन करने पर विवश हो गए थे।

 

9 जुलाई सन 1972 ईसवी को फिलिस्तीनी लेखक ग़स्सान कनआनी और उनके भतीजे को ज़ायोनी शासन की बदनाम जासूसी एजेंटी मोसाड के तत्वों ने शहीद कर दिया। श्री कनआनी, जो ज़ायोनी शासन के विरुद्ध व्यापक संघर्ष में भी शामिल थे, उस समय शहीद हो गये जब लेबनान की राजधानी बैरुत में मोसाड द्वारा उनकी गाड़ी में रखा गया बम विस्फोटित हो गया इसके 16 दिन बाद उनके सहायक बस्साम अबू शरीफ भी एक धमाके में घायल होने के बाद शहीद हो गये। दूसरे देशों में फिलिस्तीनी नेताओं और संघर्षकर्ताओं को विभिन्न तरीक़ों से मार डालना ज़ायोनी शासन की आम नीति है जिसे वो फिलिस्तीनियों के प्रतिरोध को कुचलने के लिए अपनाए हुए है। पश्चिमी देशों विशेषकर अमरीका ने, जो आतंकवाद से संघर्ष का दवा करता है, ज़ायोनी शासन की आतंकवादी कार्यवाहियों की कभी आलोचना नहीं की।

 

 

9 जुलाई सन 2002 ईसवी को अफ़्रीक़ी देशों के राष्ट्राध्यक्षों की सहमति से अफ़्रीक़ी संघ ने अफ़्रीक़ा एकता संगठन का स्थान लिया। यह संगठन सन 1963 में बनाया गया था। इसका उददेश्य अफ़्रीक़ी देशों के बीच मतभेदो को दूर करना और उनकी समस्याओं का समाधान करना था।

 

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17 ज़ीक़ादा सन 1355 हिजरी क़मरी को ईरान के विख्यात धर्मगुरु और क़ुम नगर में इस्लामी शिक्षा केंद्र के संस्थापक आयतुल्लाहिल उज़मा अब्दुल करीम हायरी यज़्दी का क़ुम नगर में निधन हुआ। वे ईरान के यज़्द नगर में जन्मे थे जहॉ उन्होंने आरंभिक शिक्षा प्राप्त करने के बाद इराक़ का रुख़ किया और नजफ़ नगर में वरिष्ठ धर्मगुरुओं से उच्चस्तरीय शिक्षा ली। ईरान लौटने के बाद उन्होंने वर्ष 1340 हिजरी क़मरी में क़ुम नगर में इस्लामी शिक्षा केंद्र की आधारशिला रखी। इस शिक्षा केंद्र ने तीव्र गति से उन्नति की और अब यह विश्व भर में जाना जाता है। आयतुल्लाह हायरी ने इसी प्रकार इमाम ख़ुमैनी जैसे शिष्यों का प्रशिक्षाण किया।