शेख़ शहाबुद्दीन सहरवर्दी-4
हमने उल्लेख किया था कि परम्परागत इस्लामी दर्शनशास्त्र में हिकमते इशराक़ या इशराक़ दर्शन के संस्थापक शेख़ शहाबुद्दीन सोहरवर्दी 549 हिजरी क़मरी में ईरान के सोहरवर्द में पैदा हुए।
38 वर्ष की आयु में 587 हिजरी में सलाहुद्दीन अय्यूबी के आदेश से उन्हें मृत्यु दंड दिया गया। उन्होंने अपनी 38 वर्ष की अल्प आयु में कई महत्वपूर्ण रचनाएं छोड़ी हैं। उनकी महत्वपूर्ण रचनाओं में से हिकमतुल इशराक़, तलवीहात, मुक़ावेमात, मशारे व मतारेहात, परतौनामे, हेयाकल नूर, इत्यादि के नाम लिए जा सकते हैं। उनकी महत्वपूर्ण रचनाओं में से कुछ फारसी भाषा में हैं और कुछ अरबी भाषा में।
शेख़ सोहरवर्दी तेज़ रफ़्तार शाहीन की भांति दर्शन व रहस्यवाद के आसमान पर तेज़ी से चमके और इस क्षेत्र में उन्होंने अपनी गहरी छाप छोड़ी। अपनी अल्प आयु में इस मुस्लिम विद्वान ने अरबी और फ़ार्सी में पचास किताबें लिखी हैं। अरबी गद्य के शोधकर्ताओं ने उनकी रचनाओं को बहुत ही आकर्षक क़रार दिया है और उनकी फ़ारसी रचनाएं फ़ार्सी अदब के शाहकारों में से हैं।
सहरवर्दी के रचनाओं में विविधता और ताज़गी पायी जाती है और शुद्ध दार्शनिक अर्थ से वे गहरे रहस्यवादी अर्थ प्राप्त करते हैं।
उनकी रचनाएं कुछ अलग शैली में लिखी गई हैं, अर्थात मश्शाई या पेरिपैटेटिसिज़म, रहस्यवादी और इशराक़ी शैली में। हालांकि हालिया दशकों में सोहरवर्दी के कार्यों को सैय्यद हुसैन नस्र और हैनरी कोरबिन ने वरिचित करवाया है, अभी भी उनकी कुछ रचनाएं प्रकाशित नहीं हुई हैं। उनकी जो रचनाएं प्रकाशित नहीं हुई हैं, वह विज्ञान, गणित और तर्कशास्त्र के बारे में हैं, यह उनकी दो महत्वपूर्ण रचनाओं मतारेहात, मुक़ावेमात और तलवीहात का भाग हैं। इसके अलावा उनकी समस्त अरबी रचनाएं उपलब्ध नहीं हैं। हेनरी कोरबिन ने जिबरईल सुर्ख़ किताब में सहरवर्दी की अधिकांश फ़ारसी रचनाओं का अनुवाद किया है। कोरबिन ने तर्कशास्त्र के भाग को छोड़कर हिकमतुल इशराक़ और क़ुतुबुद्दीन शीराज़ी की व्याख्या का अनुवाद करके सोहरवर्दी के विचारों को जानने वाले के लिए एक बहुत ही अच्छा स्रोत उपलब्ध करवा दिया है।
थैकस्टोन ने भी सहरवर्दी की रहस्यावादी रचनाओं का अनुवाद किया है।
सोहरवर्दी की रचनाओं को विभिन्न भागों में बांटा गया है। पहली बार ईरानी मामलों के फ़्रांसीसी विशेषज्ञ लुई मैसीनियून ने सहरवर्दी की किताबों को तीन भागों में बांटा था। उन्होंने उनकी रचनाओं को संकलन के समयानुसार क्रमबद्ध किया है। सबसे पहले युवावस्था में लिखी गई उनकी रचनाएं हैं। दूसरे चरण में उनकी वह किताबें हैं जो मश्शाई शैली में लिखी गई हैं और तीसरे चरण में उनकी वह किबाते आती हैं जो इब्ने सीना और प्लोटाइनस के विचारों का मिश्रण है।
उनके बाद फ़्रांसीसी दार्शनिक हेनरी कोरबिन ने सोहरवर्दी की किताबों को चार भागों में बांटा है। इसके बाद सैय्यद हुसैन नस्र ने थोड़े से परिवर्तन के साथ पांच भागों में बांटा है। सोहरवर्दी की रचनाओं और उनकी व्याख्याओं की गहन समीक्षा तथा उनके बारे में हुए शोध कार्यों के आधार पर उनकी रचनाओं को छः भागों में बांटा जा सकता है।
पहले चरण में वह किताबे हैं, जो सहरवर्दी के इशराक़ी विचारों को बयान करती हैं। इस चरण में केवल हिकमतुल इशराक़ किताब आती है, जो सहरवर्दी की समस्त रचनाओं से अलग है और इशराक़ दर्शन की बुनियाद मानी जाती है। उन्होंने इस किताब में अपनी विचारधारा की पूर्ण तस्वीर पेश कर दी है।
दूसरे चरण में सोहरवर्दी की चार बड़ी किताबों को रखा जा सकता है, जो अरबी भाषा में हैं। इन रचनाओं में सबसे पहले सोहरवर्दी की विशेष व्याख्या के साथ मश्शाई दर्शन को पेश किया गया है और उसके बाद इशराक़ दर्शन का अध्ययन किया गया है। चारों किताबों के तीन भाग हैं, तर्कशास्त्र, विज्ञान और धर्मशास्त्र। इन किताबों के नाम हैं, तलवीहात, अलमुशारे व अलमतारेहात, अलमुक़ावेमात और अल्लमहात। इन चार किताबों में तलवीहात सबसे महत्वपूर्ण है। मतारेहात, तलवीहात की व्याख्या है, लमहात उसका सारांश है और मुक़ावेमात, तलवीहात से संबंधित है।
तीसरे चरण में फ़ारसी और अरबी की छोटी पुस्तकें हैं, जिनमें हिकमतुल इशराक़, तलवीहात, मुशारे वलमतारेहात, अलमुक़ावेमात और लमहात का बहुत ही सरल भाषा में सारांश बयान किया गया है। शेख़ इशराक़ की रचनाओं के इस क्रम में दो बहुत ही महत्वपूर्ण किताबों हेयाकल अल-नूर और अलवाहु एमादिया को रखा जा सकता है, यह अरबी भाषा में हैं और स्वयं सोहरवर्दी ने इनका फ़ारसी में अनुवाद किया है। एक अन्य किताब एतक़ादुल होकमा अरबी भाषा में है, जबकि परतौनामे और बोस्तानुल क़ुलूब फ़ारसी में हैं। हालांकि बोस्तानुल क़ुलूब के सोहरवर्दी की रचना होने में कुछ लोगों को संदेह है, लेकिन विशिष्ट शोधकर्ताओं ने इसे सहरवर्दी की ही किताब क़रार दिया है।
रहस्यमयी कथाओं या उन कहानियों को जिनमें अस्तित्व के चरणों में आत्मा की यात्रा और कल्याण प्राप्ति का उल्लेख किया गया है, चौथे चरण में रखा जा सकता है। इनमें से अधिकांश किताबें फ़ारसी में हैं और उनमें से कुछ इस प्रकार हैं, अक़्ले सुर्ख़, सफ़ीर सीमुर्ग़, आवाज़ पर जिबरईल, लोग़त मूरान, रिसालए फ़ी हालत अल-तफ़ूलिया, रोज़ी बा जमाते सूफ़ीयान, अलग़र्बा अलग़रबिया और रिसालतुन फ़िलमेराज जो अभी तक प्रकाशित नहीं हुई है।
शेख़ शहाबुद्दीन सहरवर्दी की रचनाओं के पांचवे भाग में उनकी उन किताबों, व्याख्याओं और अनुवादों को शामिल किया जा सकता है जो दर्शनशास्त्र की किताबों, क़ुराने मजीद और पैग़म्बरे इस्लाम (स) की हदीसों के संबंध में हैं। इन किताबों में क़ुराने मजीद के कुछ सूरों और पैग़म्बरे इस्लाम (स) की कुछ हदीसों की व्याख्याएं हैं, जो अभी प्रकाशित नहीं हुई हैं। इसी प्रकार इब्ने सीना की इशारात की फ़ारसी व्याख्या को भी, जो अभी तक प्रकाशित नहीं हुई है, इसी भाग में शामिल किया जा सकता है। इब्ने सीना की किताब रिसालतुत्तैर का फ़ारसी अनुवाद और इससे बढ़कर रिसालए हक़ीक़तुल इश्क़ जो इब्ने सीना के रिसालतुन फ़िलइश्क़ के आधार पर है, इसी चरण में शामिल हैं।
शैख़ सोहरवर्दी की दुआओं और प्रार्थनाओं को, जो अरबी में हैं और जिन्हें अलवारेदात और अलतक़दीसात कहा जाता है, छठे चरण में शामिल किया जा सकता है, लेकिन दुर्भाग्यवश यह अभी तक प्रकाशित नहीं हुई हैं। समय के अनुसार सोहरवर्दी की रचनाओं को क्रमबद्ध करना कठिन है। इसका कारण यह है कि उन्होंने अपनी विभिन्न रचनाओं में एक दूसरे का हवाला दिया है, जिसके कारण तारीख़ का निर्धारण एक कठिन कार्य है।