गुरुवार- 16 जुलाई
16 जुलाई सन 1890 ईसवी को जेम्ज़ पार्किंसंस नामक एक ब्रितानी डॉक्टर ने पार्किंसस बीमारी और उसके अस्तित्व में आने की प्रक्रिया के बारे में अपनी जॉच पूरी की।
1661, यूरोप में पहला बैंक नोट स्वीडिश बैंक Stockholms Banco ने जारी किया था।
1909 , आज़ादी की लड़ाई लड़ने वाली अरुणा आसफ़ अली का जन्म हुआ था।
1935 , ओकलाहोमा सिटी में पहला पार्किंग मीटर इंस्टॉल किया गया था।
1993 , ब्रिटेन की ख़ुफ़िया एजेंसी एमआई-5 के किसी सदस्य ने फ़ोटो खिंचवा कर पहली बार औपचारिक रूप से जनता के सामने अपनी पहचान खोली थी।
1968 , भारतीय हॉकी कप्तान धनराज पिल्लै का जन्म हुआ था।
1969 , चंद्रमा पर सबसे पहले उतरने वाला अन्तरिक्ष यान अपोलो-11 था जिसे केप केनेडी से छोड़ा गया था।
2006, संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में कोरिया पर प्रतिबंध लगाने का प्रस्ताव पारित।
2007, बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख़ हसीना वाजिद को धन वसूली के एक मामले में गिरफ़्तार किया गया।
यही कारण है कि इस बीमारी का नाम उन्हीं के नाम पर पार्किन्सन्स रख दिया गया। इस बीमारी के लक्षण यह है कि रोगी के हाथों, ज़बान सिर और दूसरे अंगों में कंपन होता है तथा चलते समय रोगी अपना संतुलन खो बैठता है। इसका मुख्य कारण कुछ मानसिक समस्याएं हैं। अब तक इसका कोई सही उपचार नहीं खोजा जा सका है।
16 जूलाई सन 1945 ईसवी को अमरीका ने परमाणु बम का पहला परीक्षण किया। इसका लक्ष्य जापान पर परमाणु बमबारी की तैयारी करना था। जापान उस समय दूसरे विश्व युद्ध की समाप्ति के बावजूद अमरीकी बम्बारियों का डट कर मुक़ाबला कर रहा था और उसने अमरीका को भारी नुक़सान पहुँचाया था। अमरीकी सरकार ने पहले परमाणु परीक्षण की सफलता के बाद अगस्त 1945 को जापान के हीरोशीमा और नागासाकी नगरों पर परमाणु बम्बारी की और इतिहास के पन्नों को अपने अमानवीय अपराधों से कलंकित कर दिया।

16 जुलाई सन 1951 ईसवी को एशिया के देश नेपाल को ब्रिटेन से स्वतंत्रता मिली। हालॉकि नेपाल का इतिहास बहुत पुराना है किंतु इसके अतीत के बारे में अधिक जानकारियॉ उपलब्ध नहीं हैं। उन्नीसवीं शताब्दी के आरंभ में नेपाल पर ब्रिटेन का हस्तक्षेप और प्रभाव बढ़ना आरंभ हुआ जिसके कारण दोनों देशों में युद्ध हुआ। इस युद्ध के समापन पर ब्रिटेन ने 1816 में नेपाल के बड़े भाग पर अधिकार कर लिया। भारत और पाकिस्तान के स्वतंत्र हो जाने और भारतीय उपमहाद्वीप में ब्रिटेन की शक्ति क्षीण हो जाने के बाद, ब्रिटेन, नेपाल को वर्ष 1951 में स्वतंत्र करने पर विवश हो गया और इस देश में शाही व्यवस्था अस्तित्व में आई कि अब उस देश में लोकतंत्र है।

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26 फ़रवरदीन वर्ष 1361 हिजरी शम्सी को मुसलमान मिस्री सैन्य अधिकारी ख़ालिद इस्लामबोली शहीद हुए। वह बीस वर्ष की आयु में मिस्री सेना में तोपख़ाना इकाई के अधिकारी नियुक्त हुए। ख़ालिद इस्लामबोली और उनके साथियों को तत्कालीन मिस्री राष्ट्रपति अनवर सादात की ओर से ज़ायोनी शासन के साथ कैंप डेविड समझौते पर हस्ताक्षर किए जाने पर दुख था और वह सरकार द्वारा मिस्री प्रतिरोधकर्ताओं के दमन पर भी क्षुब्ध थे इसीलिए उन्होंने अनवर सादात के विरुद्ध कार्यवाही का निर्णय किया। उन्होंने सोलह अक्तूबर वर्ष 1981 को राष्ट्रपति अनवर सादात को उस समय आक्रमण करके मार डाला जब वह सैनिकों से सलामी ले रहे थे। उसके बाद सेना ने ख़ालिद इस्लामबोली और उनके साथियों को गिरफ़्तार करके मुक़द्दमा चलाया और आज ही के दिन उन्हें फांसी दे दी गयी।
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24 ज़ीक़ादा वर्ष 309 हिजरी क़मरी को प्रख्यात ईरानी कवि और सूफ़ी हुसैन बिन मंसूर हल्लाज को अब्बासी ख़लीफ़ा अलमुक़्तदर के आदेश पर फ़ांसी पर लटका दिया गया था। मंसूर हल्लाज का जन्म दक्षिणी ईरान के बैज़ा नगर में हुआ। उन्होंने बचपन में ही धारमिक शिक्षाएं आरंभ कीं और 12 साल की आयु में पूरा क़ुरआन याद कर लिया। किशोरावस्था में वे सूफ़ीवाद की ओर आकर्षित हुए और ईरान के शूश्तर तथा इराक़ के बग़दाद व बसरा नगरों में उन्होंने कुछ लोगों को अपना गुरू बनाया लेकिन कुछ कारणों से उन सबने मंसूर को अपने से दूर कर दिया। इसके बावजूद उन्होंने उपासना और सूफ़ियाना व्यवहार जारी रखा। इसी के साथ उन्होंने विभिन्न देशों की यात्राएं भी कीं। वे तीन बार मक्का गए, ख़ुरासान, मध्य एशिया और कीश भी गए। उन्होंने भारत की भी यात्रा की। वर्ष 290 हिजरी क़मरी में वे तीसरी बार हज के लिए मक्का गए और वापसी पर उन्होंने कुछ ऐसी बातें कहीं जो धर्मगुरुओं बल्कि सूफ़ियों की आस्थाओं से भी विरोधाभास रखती थीं। उनके मानने वालों की संख्या में वृद्धि से चिंतित हो कर अब्बासी शासकों ने उन पर मुक़द्दमा चला कर उन्हें जेल में डाल दिया। अंतिम मुक़द्दमे में उन पर धर्म भ्रष्ट होने का आरोप लगा और मौत की सज़ा सुनाई गई। आज भी मंसूर उन हस्तियों में शामिल हैं जिनके समर्थकों और विरोधियों दोनों ही की काफ़ी संख्या है।
