शुक्रवार- 24 जुलाई
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simon bolivar
24 जुलाई वर्ष 1783 को दक्षिण अमेरिका के प्रसिद्ध क्रांतिकारी और राजनेता simon bolivar वेनेज़ोएला की राजधानी काराकास में पैदा हुए।
1793फ्रांस ने कॉपीराइट कानून बनाया।
1823 चिली में दास प्रथा समाप्त हुई।
1870 अमेरिका में पहली रेल सेवा की शुरुआत।
1890 सोवा बाजार क्लब ने इंलैंड की फुटबाल टीम को ईस्ट सरे में हराया। ऐसा करने वाली यह पहली भारतीय टीम बनी।
1911 हैरम बेहन द्वारा माया सभ्यता के लुप्त शहर माचुपिच्चु को खोज निकाला गया।
1923 लौसन की संधि। स्विट्जरलैंड में ग्रीस, बुल्गारिया और प्रथम विश्व युद्ध में शामिल अन्य देशों के बीच हुई इस संधि के द्वारा आधुनिक तुर्की की सीमाओं को व्यवस्थित किया गया।
1932 रामकृष्ण मिशन सेवा प्रतिष्ठान की स्थापना हुई.
1938 इंस्टेट काफी की खोज हुई.
1941 उत्तर यूरोपीय देश लिथुआनिया में सम्पूर्ण यहूदी आबादी की नाजियों ने हत्या की।
1969 अपोलो 11 अंतरिक्ष यान पृथ्वी पर लौटा.
1989लोकसभा के अधिकांश विपक्षी सदस्यों ने त्यागपत्र दिया जिन्हें स्वीकार कर लिया गया।
1994 असम के बसबारी में बोडो उग्रवादियों ने 37 मुस्लिमों की हत्या की।
1999 ब्रिटेन के लिवरपुल में प्रथम 'सार्वभौमिक महिला धर्मसभा' का आयोजन।
1999 अमेरिकी अंतरिक्ष यान कोलंबिया का सफल प्रक्षेपण।
2000 एस विजयलक्ष्मी शतरंज की पहली महिला ग्रैंडमास्टर बनी।
2002यूरोपियन यूनियन ने संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या कोष में 3.20 करोड़ यूरो अतिरिक्त देने का निर्णय लिया।
2004इटली ने भारतीय पर्यटकों के लिए सात वीजा काल सेंटर शुरू करने का निर्णय लिया.
2005 कोरियाई क्षेत्र को परमाणु हथियारों से मुक्त करने हेतु उत्तर और कोरिया के बीच आम सहमति बनी.
2006 प्यूर्टो रिको की सुन्दरी जुलेखा रिवेरा मेंडोजा गिस यूनिवर्स, 2006 चुनी गईं।
2008 फ़्रांस के ट्रिकेस्टिन परमाणु संयंत्र में हुए रिसाव से लगभग 100 व्यक्ति प्रभावित हुए।
24 जुलाई वर्ष 1783 को दक्षिण अमेरिका के प्रसिद्ध क्रांतिकारी और राजनेता simon bolivar वेनेज़ोएला की राजधानी काराकास में पैदा हुए। simon bolivar ने वेनेज़ोएला की क्रांति में सक्रिय भूमिका निभाई और अपने समर्थक सैनिकों की सहायता से कोलंबिया की राजधानी बोगोटा को अपने नियंत्रण में कर लिया। कोलंबिया के गठन के लिए जिस कांग्रेस की स्थापना हुई थी उसकी ओर से उन्हें कोलंबिया का राष्ट्रपति नियुक्त कर दिया गया और कोलंबिया, वेनेज़ोएला और पनामा को स्वतंत्र कराके उन्होंने इस लक्ष्य को व्यवहारिक बनाया। वर्ष 1882 में simon bolivar का स्वतंत्रता संघर्ष एकवाडोर तक विस्तृत हो गया और उसके स्वतंत्र होने के बाद वह भी कोलंबिया का भाग बन गया। इसके एक वर्ष पहले simon bolivar ने पेरू को स्पेन के साम्राज्य से स्वतंत्रता दिलाई थी। इसी प्रकार 1826 में बोलीविया के क्रांतिकारियों ने भी simon bolivar के नेतृत्व में 17 वर्ष के संघर्ष के बाद अपने देश को स्वतंत्र करा लिया और simon bolivar के प्रति आभार व्यक्त करने के लिए उन्होंने अपने देश का नाम बोलीविया रख लिया। वर्ष 1830 में उनका निधन हो गया।
24 जुलाई वर्ष 1802 को फ्रांसीसी लेखक एलेक्जेन्डर डयूमा का जन्म हुआ। डयूमा ने अपने पिता की यादों और फ्रांस की क्रांतिकारी जनता की विशेष यादों का लाभ उठाकर फ्रांस की क्रांति और इतिहास के बारे में अनेक नावेल लिखे। डयूमा के सबसे प्रसिद्ध नावेल का नाम “तीन बंदूकधारी” और “निष्कासनस्थ” है। वह ड्रामा लिखने में भी बहुत दक्ष थे। एलेक्जेन्डर डयूमा का 1870 में निधन हो गया।

24 जुलाई वर्ष 1921 को राष्ट्र संघ या लीग आफ नेशन्ज़ ने आधिकारिक रूप से फिलिस्तीन, इराक, और पूर्वी जार्डन का नेतृत्व व संचालन ब्रिटेन जबकि सीरिया और लेबनान का संचालन फ्रांस के हवाले कर दिया। अलबत्ता फ्रांस और ब्रिटेन के बीच प्रथम विश्व युद्ध के दौरान ही उसमानी साम्राज्य को आपस में बांट लेने पर सहमति बन चुकी थी। राष्ट्र संघ के निर्णय से वास्तव में इस बंटवारे को कानूनी रूप मिल गया। यद्यपि इस्लामी भूमियों का संचालन फ्रांस और ब्रिटेन के हाथ में चले जाने से क्षेत्र के मुसलमान क्रोधित थे परंतु इन दोनों देशों ने सीरिया, लेबनान, इराक और जार्डन पर अपने आधिपत्य को मज़बूत बनाया और विशेषकर ब्रिटेन ने एक अवैध सरकार जायोनी शासन के गठन की भूमिका प्रशस्त की।

24 जुलाई 1944 को द्वतीय विश्व युद्ध के दौरान ब्रिटेन की वायु सेना ने जर्मनी के उत्तर में स्थित हैम्बर्ग पर भीषण बम्बारी की। ब्रिटेन और जर्मनी द्वारा एक दूसरे पर हवाई बम्बारी का आरंभ द्वितीय विश्व युद्ध में हुआ और धीरे धीरे वह विस्तृत होता गया। इस प्रकार से कि इस बम्बारी में दोनों देशों के बहुत आम नागरिक मारे गये। इस बम्बारी में हैम्बर्ग नगर की बंदरगाह को काफी आर्थिक क्षति पहुंचने के अतिरिक्त हज़ारों लोग मारे गये। यह बम्बारी उस समय हुई जब घटक सेनाओं ने जर्मनी के उत्तर से इस देश पर व्यापक बम्बारी आरंभ कर दी थी।

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3 मुर्दाद सन 1361 हिजरी शम्सी को ईरान के विख्यात लेखक और अनुवादक डॉक्टर हमीद एनायत का निधन हुआ। वे ईरान में ग्रेजुएशन की डिग्री लेने के बाद उच्च स्तरीय शिक्षा के लिए इंगलैड चले गये। और वहॉ राजनीति शास्त्र और आर्थिक विज्ञान में पी एच डी की डिग्री प्राप्त की। ईरान लौटकर वे तेहरान विश्व विद्यालय में शिक्षा देने लगे। उन्होंने राजनीति शास्त्र से संबंधित कई पुस्तकें लिखीं हैं।
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3 ज़िल्हिज्जा सन् 362 हिजरी क़मरी को ईरान के विद्वान गणितज्ञ व खगोल शास्त्री अबू रेहान बेरुनी का ईरान के प्राचीन नगर ख़्वारज़्म के निकट बेरुन नामक नगर में जन्म हुआ। इतिहास, भूगोल, खगोल शास्त्र, गणित आदि विषयों में उन्हें पूरी दक्षता प्राप्त थी। अबू रेहान ने भारत की यात्रा की और वहॉ उन्होंने संस्कृति भाषा सीखी और अपनी पुस्तक तहक़ीक़ मालिलहिन्द के लिए जानकारिया इकट्ठी कीं।
इस पुस्तक में उन्होंने भारतवासियों के रीति रिवाजों ज्ञान और मतों का उल्लेख किया है। उन्होंने इसी प्रकार अन्य कई महत्वपूर्ण पुस्तकें लिखीं हैं जिनमें अत्तफ़हीम, क़ानूने मसऊदी आदि का नाम लिया जा सकता है, सन 440 हिजरी क़मरी में 78 वर्ष की आयु में अबू रेहान बेरूनी का निधन हुआ।