Jul २६, २०१६ १०:५३ Asia/Kolkata
  • गुरुवार- 30 जुलाई

30 जुलाई वर्ष 2010 को भारतीय बैडमिंटन खिलाड़ी साइना नेहवाल को 29 अगस्त को राजीव गांधी खेल रत्न देने की घोषणा की गयी।

17 मार्च 1990 को हरि‍याणा के हिसार में जन्‍मीं साइना बैडमिंटन की दुनिया में जानी पहचानी हस्ती हैं। उन्होंने 8 साल की आयु में बैडमिंटन खेलना आरंभ किया। सायना ने आरंभिक प्रशि‍क्षण हैदराबाद के लाल बहादुर स्टेडियम में कोच नानी प्रसाद से प्राप्त कि‍या। माता-पि‍ता दोनो के बैडमिंटन खि‍लाड़ी होने के कारण साइना का बैडमिंटन की ओर रुझान शुरु से ही था। पि‍ता हरवीर सिंह ने बेटी की रुचि‍ को देखते हुए उसे पुरा सहयोग और प्रोत्‍साहन दि‍या। साइना अब तक कई बड़ी उपलब्धियाँ अपने नाम कर चुकी हैं। वे विश्व जूनियर बैडमिंटन चैंपियन रह चुकी हैं। उन्‍होंने 2006 में एशि‍यन सैटलाइट चैंपि‍यनशि‍प भी जीती है। उन्होंने वर्ष 2009 में इंडोनेशिया ओपन जीतते हुए सुपर सीरिज बैडमिंटन टूर्नामेंट का खिताब अपने नाम किया, यह उपलब्धि उनसे पहले किसी अन्य भारतीय महिला को प्राप्त नहीं हुई। वर्ष 2011 में दिल्ली में आयोजित कॉमनवेल्थ गेम्स में उन्होंने स्वर्ण पदक जीता था। 2012 के लंदन ओलंपिक में उन्होंने कांस्य पदक जीता।

  • 30 जुलाई सन् 1729 में मैरीलैंड में बाल्टीमोर शहर की स्थापना हुई।
  • 30 जुलाई सन् 1825 को माल्दन द्वीप की खोज हुई।
  • 30 जुलाई सन् 1836 में अमेरिका के हवाई में अंग्रेज़ी भाषा का पहला अख़बार प्रकाशित हुआ।
  • 30 जुलाई सन् 1932 में अमेरिका के लास एंजिल्स में दसवें आधुनिक ओलंपिक खेल की शुरुआत हुई।
  • 30 जुलाई सन् 1930 में फुटबॉल का विश्वकप शुरू हुआ था और इंग्लैंड ने इसे 1966 में पहली बार जीता।
  • 30 जुलाई सन् 1982 में सोवियत संघ ने भूमिगत परमाणु परीक्षण किया।
  • 30 जुलाई सन् 2007 में चीनी वैज्ञानिकों ने झेंगझाऊ में लगभग 50 लाख साल पुरानी चट्टानों की खोज की।
  • 30 जुलाई सन् 2012 में भारत में पावर ग्रिड की बड़ी खराबी के कारण 30 करोड़ लोगों को बिना बिजली के रहना पड़ा था।

30 जुलाई सन 1602 ईसवी को इंडोनेशिया में नीदरलैंड का राजनैतिक एंव साम्राज्यवादी प्रभाव आरंभ हुआ। नीदरलैंड के अधिकार से पहले यह देश पुर्ताग़ाल के नियंत्रण में था। 17वीं शताब्दी में नीदरलैंड ने इंडोनेशिया द्वीप समूह पर अधिकार जमाना आरंभ किया और धीरे धीरे इसे अपने क़ब्ज़े में ले लिया। उस समय नीदरलैंड को विश्व की तीसरी बड़ी शक्ति माना जाता था। विभिन्न जातीयों और धर्मो के लोगों के इंडोनेशिया पर नीदरलैंड के अधिकार के बाद से ही वहॉ संघर्ष आरंभ हो गया जो कई सौ वर्षों तक जारी रहा अंतत: वर्ष 1950 में अहमद सोर्कानों के नेतृत्व में इंडोनेशिया एक स्वतंत्र देश के रुप में अपनी पहचान बनाने में सफल हुआ।

 

30 जुलाई सन 1980 ईसवी को  वानूआतु देश को स्वतंत्रता मिली।

यह देश ऑस्ट्रेलिया के पूर्व में स्थित है।  वानूआतु द्वीपसमूह पर 17वीं शताब्दी के आरंभ में स्पेन का अधिकार हो गया और 18वीं शताब्दी के अंत में ब्रिटेन तथा फ़्रांस भी इस क्षेत्र में प्रविष्ट हुए और न्यू हेबरीड नामक क्षेत्र विदेशी पलायनकार्ताओं से भर गया  1887 से फ़्रांसीसी और ब्रितानी पलायनकर्ताओं में संघर्ष आरंभ हो गया किंतु सन 1906 में पेरिस और लंदन के बीच  वानूआतु पर संयुक्त रुप से प्रशासन करने पर सहमति हुई। द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान जापान से मुक़ाबला करने के लिए संयुक्त सेना ने वानूआतु में प्रवेश किया जिसके बाद इस देश में साम्राज्यवादियों के विरुद्ध संघर्ष तेज़ हो गया जो 1970 में अपनी चरम सीमा पर पहुँच गया और अंतत: 1980 में इस देश की स्वतंत्रता के बाद समाप्त हुआ। 12 हज़ार वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल वाला यह देश दक्षिणी प्रशांत महासागर में स्थित है।

 

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9 मुर्दाद सन 1366 हिजरी शम्सी को हज़ारों ईरानी और अन्य देशों के हाजी, अनेकेश्वरवादियों से विरक्ता के अपने दायित्व का पालन कर रहे थे कि सऊदी अरब की वहहाबी राजशाही व्यवस्था के सुरक्षा बलों ने उन पर हमला कर दिया जिसकी वजह से बहुत से हाजी शहीद हुए । हाजी हर साल मक्का में अनेकेश्वरवादियों से विरक्तता के इस कार्यक्रम में विशेषकर अमरीका और ज़ायोनी शासन के प्रति घृणा प्रकट करते थे किंतु 1366 सऊदी सुरक्षा बलों ने उन पर धावा बोल दिया जिसके दौरान चार सौ ईरानी हाजी शहीद हो गये और एक हज़ार से अधिक घायल हो गये। इस प्रकार के हमले और हालिया मिना घटना से यह सिद्ध हो चुका है कि सऊदी अरब की सरकार में हज के संचालन की क्षमता नहीं है।

 

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आज 9 ज़िल्हिज्जा अर्थात अरफ़े का दिन है। अरफ़ात एक विशाल मरुस्थल का नाम है जो मक्का नगर के दक्षिण पूर्व में जबलुर्रहमा नामक पहाड़ के आंचल में स्थित है। 9 ज़िलहिज्जा को दोपहर से हाजी अरफ़ात के मरुस्थल में ठहरते हैं। इस स्थान पर ठहरने का बड़ा पुणय है। उल्लेखनीय है कि ईश्वर ने अरफ़ात के मरुस्थल को हाजियों के आतिथ्थ के लिए चुना है।

हाजी दोपहर से शाम तक इस मरुस्थल में रहते हैं और सूर्यास्त के समय यहॉ से मशअरुल हराम जाते हैं और फिर हज के दूसरे संस्कारों को अंजाम देते हैं।

 

9 ज़िल हिज्जा सन 60 हिजरी क़मरी को इमाम हुसैन के चेचेरे भाई मुस्लिम बिन अक़ील को इराक़ के कूफ़ा नगर में शहीद कर दिया गया। कूफ़े वालों ने इमाम हुसैन अ को बारम्बार पत्र लिखकर उन्हें अपने यहॉ आने के लिए निमंत्रित किया और उनसे वास्तविक इस्लामी सरकार के गठन की अपील की किंतु जब इमाम हुसैन ने अपने चेचेरे भाई को अपना दूत बनाकर कूफ़ा भेजा तो कूफ़ा वासियों ने उन्हें धोखा दिया और उन्हें अकेला छोड़ दिया जिसके कारण अत्याचारी शासक इब्ने ज़ियाद ने उन्हें शहीद करवा दिया।