Feb २२, २०१६ ०८:०६ Asia/Kolkata

22 फ़रवरी सन 1958 ईसवी को भारत के विख्यात राजनीतिज्ञ, बुद्धिजीवी और साहित्यकार अबुल कलाम अहमद आज़ाद का 70 वर्ष की आयु में निधन हुआ।

22 फ़रवरी सन 1958 ईसवी को भारत के विख्यात राजनीतिज्ञ, बुद्धिजीवी और साहित्यकार अबुल कलाम अहमद आज़ाद का 70 वर्ष की आयु में निधन हुआ। अबुल कलाम एक कुशल वक्ता थे और अपने समकालिक कुछ बुद्धि जीवियों के पश्चिम की ओर झुकाव के कटटर विरोधी समझे जाते थे। अबुल कलाम ने भारत में मुसलमानों को ब्रिटिश साम्राज्यवाद के विरुद्ध संघर्ष पर तत्पर करने के लिए प्रयास आरंभ किये जिसके साथ ही उनका राजनैतिक जीवन भी आरंभ हुआ। वे उस समय 17 वर्ष के थे। इन्हीं क्रान्तिकारी विचारों और गतिविधियों के कारण अंग्रज़ी सरकार ने कई बार उन्हें जेल की हवा खिलाई। भारत की स्वतंत्रता के बाद वे सांसद और शिक्षा मंत्री बने ।

उनकी कई महत्वपूर्ण पुस्तकें आज भी सुरक्षित हैं जिनसे लोग लभान्वित हो रहे है।

 

22 फ़रवरी सन 1913 ईसवी को मैक्सिको के क्रान्कारी राष्टपति फ़्रैन्सिसको मैडेरो की सेना ने हत्या कर दी। इस घटना में उनके साथ उप राष्ट्रपति पीनो स्वेरेज़ की भी हत्या हो गयी।

 

22 फ़रवरी सन 1967 ईसवी को इंडोनेशिया के राष्ट्रपति सुकारनो ने सारे अधिकार प्रधान मंत्री जनरल सोहारतो के हवाले कर दिए और केवल नाम के राष्ट्रपति बन कर रह गये।

 

 

22 फरवरी वर्ष 1857 को स्काउट्स की अंतरराष्ट्रीय संस्था के संस्थापक राबर्ट बेडल पावेल लंदन के एक धार्मिक घराने में जन्मे। उन्होंने समाज में युवाओं को आगे लाने और कमज़ोरों की सहायता करने के उद्देश्य से स्काउट्स की अंतरराष्ट्रीय संस्था की स्थापना की। वर्ष 1941 में उनका निधन हो गया।

 

22 फरवरी वर्ष 1982 में भारतीय उपमहाद्वीप के विख्यात उर्दू कवि जोश मलीहाबादी का निधन हो गया। वे 5 सितम्बर वर्ष 1898 में लखनउ के क़स्बे मलीहाबाद में जन्मे थे। उनका पूरा नाम शब्बीर हुसैन ख़ान था। जोश मलीहाबादी भारत और पाकिस्तान के विभाजन से पूर्व शायरे इन्क़ेलाब के नाम से प्रसिद्ध हो गये थे और भारत सरकार ने उन्हें पदमभूषण से भी सम्मानित किया। 22 फरवरी वर्ष 1982 को पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में उनका निधन हुआ और उन्हें वहीं दफन किया गया।

 

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3 इसफ़ंद सन 1299 हिजरी शम्सी को ब्रिटेन ने ईरान में अपना हस्तक्षेप जारी रखते हुए रज़ाख़ान नामक एक सैनिक द्वारा विद्रोह करवाया। ब्रिटेन ने तत्कालीन शासक अहमद शाह क़ाजार के आदमियों को ख़रीद लिया था जिसके कारण यह विद्रोह बड़ी सरलता से सफल हो गया क़ाजारी शासक ने बिना कोई प्रतिक्रिया व्यकत किये हुए रज़ाख़ान को सेनाप्रमुख और उसके सहयोगी सैयद ज़ियाउददीन तबातबाई को प्रधान मंत्री स्वीकार कर लिया। चार वर्ष बाद रज़ाख़ान ईरान का नरेश और ईरान में ब्रिटेन के हितों का संरक्षक बन गया किंतु द्वितीय विश्व युद्ध में जर्मनी की ओर रज़ाख़ान का झुकाव देखकर ब्रिटेन ने उस सत्ता से हटाकर देश निकाला दे दिया।

3 इसफ़ंद सन 1362 हिजरी शम्सी को इराक़ द्वारा ईरान पर थोपे गये युद्ध में ईरानी जियालों ने ख़ैबर नामक सैनिक अभियान आरंभ किया। ईरान के दक्षिण पश्चिमी क्षेत्र में आरंभ होने वाले इस अभियान में ईरानी सैनिकों ने पानी और दलदल को पार करके इराक़ के बसरा नगर के निकट मजनून नामक तेल सम्पन्न द्वीपों पर अधिकार कर लिया। इस सैनिक अभियान की जटिलता ने विश्व वासियों को हतप्रभ कर दिया था। इस कार्रवाई ने सिद्ध कर दिया कि ईरानी जियाले सददाम की अतिक्रमणकारी सेना को नाको चने चबाने पर विवश कर सकते हैं जिसे पश्चिमी देशों का भरपूर समर्थन प्राप्त था।

 

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27 जमादिस्सानी सन 1320 हिजरी क़मरी को हाज मिर्ज़ा हुसैन नूरी तबरसी नामक मुस्लिम धर्मगुरु का निधन हुआ। वे  अच्छे कामों और अद्वितीय शिष्टाचार के लिए विख्यात थे। इस्लामी विषयों से संबंधित उनकी पुस्तकों को विशेष महत्व प्राप्त है। उनकी पुस्तकों में मुस्तदरकुल वसायल नामक विख्यात पुस्तक का नाम लिया जा सकता है। इस पुस्तक में पैग़म्बरे इस्लाम  और उनके परिजनों के कथनों और महान मुस्लिम धर्मगुरुओं की जीवनी का उल्लेख है।

 

27 जमादिस्सानी सन 1358 हिजरी क़मरी को ईरान के प्रसिद्ध धर्मगुरु मिरज़ा अबुल हसन मिशकीनी का बग़दाद नगर में निधन हुआ। उन्होंने धार्मिक शिक्षा प्राप्ति में बहुत परिश्रम किया। यहॉ तक कि स्वयं भी एक वरिष्ठ धर्मगुरु बन गये। उनहोंने कई पुस्तकें लिखीं।