शहाबुद्दीन सोहरवर्दी-5
हमने उल्लेख किया था कि इश्राक़ दर्शन के संस्थापक शेख़ शहाबुद्दीन सोहरवर्दी 549 हिजरी क़मरी में सोहरवर्द में पैदा हुए थे।
587 हिजरी में हलब के धर्मगुरूओं के उकसाने पर सलाहुद्दीन अय्यूबी ने उनकी हत्या करवा दी। उनकी अल्प एवं सफल आयु का परिणाम वह रचनाएं हैं जो उनकी यादगार हैं। ईरान के इस दार्शनिक की कुछ रचनाएं रूपक और प्रतीकात्मक कहानियों पर आधारित हैं। शोधकर्ताओं के अनुसार, यह कहानियां सोहरवर्दी की वास्तविक तस्वीर पेश करती हैं। इस प्रकार की रचनाएं जो बहुत ही सुन्दर भाषा में लिखी गई हैं, सोहरवर्दी के आध्यात्मिक एवं आत्मिक अनुभवों पर आधारित हैं।
रहस्यवाद के चरणों एवं मौत के रहस्यों के बारे में सोहरवर्दी की सबसे महत्वपूर्ण किताब, सफ़ीरे सीमुर्ग़ है, जो पूर्ण रूप से ज्ञान आधारित किताब है, जिसका संकलन शेख़ इश्राक़ की मानसिक ज्यामितीय शैली के आधार पर है। शेख़ इश्राक़ ने इस किताब को बहुत ही व्यवस्थित रूप में लिखा है, जो ज्ञान आधारित समकालीन लेखों की बराबरी करती है, यहां तक कि इसमें उनमें से कुछ लेखों से कहीं अधिक गहराई है।
सोहरवर्दी ने किताब की प्रस्तावना में नई शैली की भांति, विषय का उल्लेख किया है और उद्देश्य को स्पष्ट करते हुए विषयों को सूचिबद्ध किया है। यह प्रस्तावना उस काल की प्रचलित किताबों की भांति ईश्वर की प्रशंसा और पैग़म्बरे इस्लाम (स) की नअत से शुरू होती है, लेकिन अन्य किताबों की तरह इसमें प्रशंसा एवं नअत लम्बी नहीं है, बल्कि बहुत ही संक्षेप में केवल दो वाक्यों में की गई है। सोहरवर्दी ने ईश्वर की प्रशंसा के बाद, किताब के मूल विषय का परिचय दिया है और विषयों का क्रमबद्ध तरीक़े से उल्लेख किया है और इसका नाम सफ़ीरे सीमुर्ग़ रखा है।
शेख़ इश्राक़ सफ़ीरे मुर्ग़ के नाम का उल्लेख करके कि जो उनकी किताब का मूल शब्द है, पाठक को प्रस्तावना में इस मूल शब्द से परिचित करवाते हैं, इसी कारण वे कहते हैं, कोई नुक़सान नहीं है अगर प्रस्तावना में उस महान परिंदे का ज़िक्र करूं जो अपने स्थान पर स्थिर है। उसके बाद, आयाम बदलकर सीमुर्ग़ की दास्तान तीसरे व्यक्ति की ज़बानी सुनाते हैं।
सोहरवर्दी इस किताब में दृष्टि के आयाम के परिवर्तन के साथ ही बहुत ही समझदारी से विषय के बदलाव के अनुरूप, भाषा और बयान की शैली भी बदल देते हैं। उनकी यह विशेषता क़रीब उनकी समस्त फ़ार्सी किताबों में देखी जा सकती है। इस प्रकार से कि ईश्वर की प्रशंसा, विषयों को सूचीबद्ध करने और प्रस्तावना में उन्होंने सरल भाषा का इस्तेमाल किया है और सीमुर्ग़ की स्थिति को बयान करने में जो रहस्यवादी विषयों के दायरे में आता है, उनकी भाषा रूपक और प्रतीकात्मक है।
सोहरवर्दी ने इस किताब में अपनी शिक्षाओं को बेहतर तरीक़े से समझाने के लिए सीमुर्ग़ की स्थिति को दूसरों की तुलना में बिल्कुल अलग तरह से बयान किया है। सोहरवर्दी ने अपनी इस किताब में जिस सीमूर्ग़ का ज़िक्र किया है वह उस सीमुर्ग़ से एकदम अलग है जिसका उल्लेख इब्ने सीना, ग़ज़ाली और ऐनुलक़ुज़ात जैसे दर्शनशास्त्रियों ने किया है। सोहरवर्दी ने अन्य लोगों से अलग तरीक़े से एवं विशिष्ट परिस्थितियों के साथ अपने सीमुर्ग़ को पहचनवाया है। सोहरवर्दी का सीमुर्ग़ बिना पहचान के नहीं है। उनका मानना है कि हर पल वह हुदहुद, जो उनके विचारों के मुताबिक़, रास्ता तय करेगा सीमुर्ग़ के स्तर तक पहुंच जाएगा। उनका मानना है कि हर वह हुदहद कि जो बहार के मौसम में अपना आशियाना छोड़ देता है और अपनी चोंच से अपने पर उखाड़ फेंकता है और कोहे क़ाफ़ का इरादा करता है, अगर कोहे क़ाफ़ का साया एक हज़ार वर्ष बराबर उस पर पड़ जाए कि यह हज़ार वर्ष वास्तविकता का ज्ञान रखने वालों के निकट एक सुबह की तरह है, इस दौरान वह सीमुर्ग़ ह जाएगा।
शेख़ इश्राक़ के विचारों में सबसे अहम बिंदु यह है कि वह सीमुर्ग़ के स्तर तक पहुंचने के लिए किसी पूर्व शर्त का उल्लेख नहीं करते हैं, बल्कि हर वह हुदहुद, कहकर उत्कृष्टता के मार्ग पर समस्त चलने वालों का मार्गदर्शन करते हैं और वहां की परिस्थितियों को बयान करते हैं। हालांकि सीमुर्ग़ तक पहुंचने की परिस्थितियां आसान नहीं हैं, लेकिन सोहरवर्दी के निकट असंभव भी नहीं हैं।
सोहरवर्दी की रचनाओं के कुछ आलोचकों का मानना है कि उन्होंने इस किताब में ज्ञान की प्राप्ति तक सत्य के रास्ते पर चलने का मार्ग प्रशस्त किया है। सीमुर्ग़ की दास्तान एक सफ़र से शुरू होती है, ऐसा सफ़र जो आध्यात्मिक है। इस दास्तान को सुनाने वाले रोशन रवानान हैं, यह वे लोग हैं जिनका मूल विचार सोहरवर्दी की भांति प्रकाश और रोशनी है। सोहरवर्दी के अनुसार, वे लोग जिनका मूल ज़िम्मेदारी लोगों की आत्मा को इश्राक़ी रास्ता दिखाना है।
इस सफ़र का मुसाफ़िर वह हुदहुद है जो अपना आशियाना छोड़कर अपनी ही चोंच से अपने पर नोच लेता है। यह हुदहुद आध्यात्मिकता के मार्ग पर चलने वाला वही व्यक्ति है जिसके सफ़र की शर्त हल्कापन और आज़ादी है। इसी कारण उसे अपना आशियाना छोड़ना होगा और अपने पर नोचने होंगे और हर प्रकार के जुड़ाव एवं संबंध से आज़ाद होना होगा।
सफ़र का वक़्त बहार का मौसम है। यह परिवर्तन और फलने फूलने का मौसम है। ऐसा मौसम कि ख़ुद सोहरवर्दी के अनुसार, प्रकाशमय विवेक वाले सर्दियों की तारीकी से छुटकारा पाकर सत्य के ज्ञान की प्रकाशमय बहार तक पहुंच गए हैं। सफ़र का गंतव्य कोहे क़ाफ़ है। ऐसा स्थान कि जो विश्व की भोगौलिक सीमाओं में मौजूद नहीं है। सफ़ल की अवधि एक हज़ार साल है, यह हज़ार साल सत्य का ज्ञान रखने वालों के निकट एक सुबह की भांति है। सफ़र का उद्देश्य यह है कि वह इस दौरान सीमुर्ग़ बन जाए। सफ़र के अंत में हुदहुद कि जो वास्तव में मुसाफ़िर की आत्मा है, सीमुर्ग़ की उपाधि प्राप्त करता है और विशिष्ट विशेषताओं से सुसज्जित होता है। शेख़ इश्राक़ ने इस तरह की 20 विशेषताओं का उल्लेख किया है।
ऐसी विशेषताएं जो सोहरवर्दी ने सीमुर्ग़ बनने वाले हुदहुद के लिए गिनायी हैं, वह निःसंदेह एक पूर्ण इंसान की विशेषताएं हैं, जो मार्गदर्शक और ईश्वरीय दूत के रूप में भूले भटकों को जागरुक करता है।
शेख़ इश्राक़ पूर्ण इंसान के दृष्टिकोण से संबंधित प्रस्तावना में प्रतीकात्मक भाषा में वहां तक पहुंचने की परिस्थितियों का उल्लेख करते हैं। सफ़ीरे सीमुर्ग़ किताब में वे बहुत ही सरल भाषा में उत्कृष्टता तक पहुंचने के अमली तरीक़ों का उल्लेख करते हैं, यह सोहरवर्दी की महत्वपूर्ण शैली की विशेषता है। शोधकर्ताओं के अनुसार, वे कोई ऐसे व्यक्ति नहीं हैं जो केवल परवाज़ की बातों तक सीमित हो, बल्कि उनकी शिक्षाओं के पीछे ऐसा विवेक है जो उनके अमल को ज़ाहिर करता है। वास्तव में सफ़ीरे मुर्ग़ ईश्वर तक पहुंचने के मार्ग पर चलने वालों के लिए एक सटीक प्रक्रिया है।