शहाबुद्दीन सोहरवर्दी-6
हमने कहा कि शेख़ शहाबुद्दीन सोहरावर्दी दर्शनशास्त्री, रहस्यवादी और इश्राक़ दर्शनशास्त्र की बुनियाद रखने वाले हैं और उनका जन्म 549 हिजरी क़मरी में ज़न्जान के निकट सोहरावर्द गांव में हुआ था और वर्तमान सीरिया के हलब क्षेत्र के धर्मशास्त्रियों ने एक षडयंत्र रचा जिसके कारण 38 वर्ष की उम्र में 587 हिजरी क़मरी में सलाहुद्दीन अय्यूबी के आदेश से उनकी हत्या कर दी गयी।
सोहरावर्दी ने कम आयु में ही कई महत्वपूर्ण रचनाएं यादगार के रूप में छोड़ी हैं।
इस महान ईरानी दर्शनशास्त्र की रचनाओं का एक भाग उन कहानियों पर आधारित है जिनमें एक चीज़ की उपमा दूसरी चीज़ से देकर इशारों में बात की गयी है। शोधकर्ताओं का मानना है कि यह शैली हमें सोहरावर्दी के वास्तविक व्यक्तित्व से परिचित कराती और उसे बयान करती है। यह किताब सुन्दर भाषा और इशारे में लिखी गयी है और इसमें सोहरावर्दी के आत्मिक व आध्यात्मिक अनुभवों का उल्लेख है। पिछले कुछ कार्यक्रमों में हमने आपको आवाज़े परे जिब्राईल, लोग़ते मूरान, फी हक़ीक़तिल इश्क़, सफीरे सीमूर्ग सहित सोहरावर्दी की कुछ रचनाओं से अवगत कराया था। सोहरावर्दी की यह वे रचनाएं हैं जिनमें इशारे में और एक चीज़ की दूसरी चीज़ से उपमा देकर बात की गयी है।
शोधकर्ताओं का मानना है कि “अक़्ले सुर्ख़” शैख़ शहाबुद्दीन सोहरावर्दी की उन प्रसिद्ध किताबों से है जिनमें उन्होंने इशारे में बात की है। इसी प्रकार यह उन किताबों में से है जिसमें सोहरावर्दी के व्यक्तिगत विचारों व दृष्टिकोणों को बयान किया गया है। इस्लामी मामलों के फ्रांसीसी विशेषज्ञ हेनरी कोरबिन Henry Corbin ने “अक़्ले सुर्ख” सहित शैख़ शहाबुद्दीन सोहरावर्दी की बहुत सी किताबों का फ्रेंच भाषा में अनुवाद किया है।
फ्रांसीसी लेखक और ड्रामा लिखने वाले यूजेन यूनिस्को Eugène Ionesco ने जब सोहरावर्दी की अक्ले सुर्ख किताब का अनुवाद पढ़ा तो उन्होंने हेनरी कोरबिन को एक पत्र लिखा और कहा मैंने बड़े आश्चर्य के साथ अक्ले सुर्ख किताब को पढ़ा। आपने एक हतप्रभ कर देने वाली और आश्चर्य में डाल देने वाली बड़ी किताब की आध्यात्मिक विषय वस्तु से पश्चिम को परिचित कराया। निःसंदेह आपने उसकी विषय वस्तु को ईरानियों के दिलों में भी जीवित कर दिया। इस किताब के विषय वस्तु कठिन हैं और इसे हर वक्त नहीं पढ़ा जा सकता बल्कि इसे पढ़ने के लिए उस समय की प्रतीक्षा करना चाहिये जब दिल कहे परंतु जब मैं भटक जाता हूं तो आपने जो स्पष्टीकरण दिया है वह मेरा मार्गदर्शन सही मार्ग की ओर करता है। वास्तव में शायद कहा जा सकता है कि जीवन की समाप्ति तक मुझे दूसरी किताब की पढ़ने की आवश्यकता न पड़े। इस किताब को मैं पढ़ूंगा और दोबारा इसे पढ़ूंगा।“
अक़्ले सुर्ख किताब के नाम की व्याख्या में डाक्टर दीनानी का मानना है कि प्राचीन विद्वानों के अनुसार लाल रंग काले और सफेद रंग का मिश्रण है। सोहरावर्दी जब अक़्ले सुर्ख़ की बात करते हैं यानी वह बुद्धी जो इंसान के अंदर मौजूद है मूल रूप से सफेद और प्रकाशमयी होती है परंतु इंसान का शरीर अंधकारमय है। तो इंसान की बुद्धि सफेद और प्रकाशमयी है और जब वह इस अंधेरे में आ जाती है तो लाल हो जाती है। लाल बुद्धि यानी इंसान की बुद्धि।
डाक्टर इब्राहीम दीनानी का मानना है कि अपने विचारों को बयान करने में सोहरावर्दी, फिरदौसी के विचारों से बहुत प्रभावित हैं। डाक्टर दीनानी के विचार में सोहरावर्दी फिरदौसी के शाहनामे से बहुत प्रभावित हैं और शायद यह कहा जा सकता है कि उन्होंने कई बार शाहनामे को पढ़ा है परंतु चूंकि सोहरावर्दी की एक विशेषता इशारों में बात करना है और जब वह अपने इश्राक़ी दर्शनशास्त्र के विषयों को बयान करते हैं तो कहीं भी उस व्यक्ति या उस स्रोत का नाम नहीं लेते हैं जिससे उन्होंने लाभ उठाया है। अलबत्ता वह जानबूझ कर ऐसा करते हैं। इसी कारण है कि उन्होंने फिरदौसी का नाम भी नहीं लिया है। इस कार्य के राजनीतिक और सामाजिक कारण हो सकते हैं।
सोहरावर्दी अपनी किताब अक़्ले सुर्ख में ईरान की प्राचीन संस्कृति से बहुत प्रभावित हैं। वर्तमान समय की पौराणिक कहानियों व बातों के शोधकर्ता और तेहरान के बहिश्ती विश्व विद्यालय के प्रोफेसर डॉक्टर अबूल क़ासिम इस्माईलपूर का मानना है कि सोहरावर्दी ने अपनी फार्सी की छोटी 13 किताबों के मध्य पांच किताबों अलवाहे एमादी, अक़्ले सुर्ख़, सफीरे सी मुर्ग, आवाज़े परे जिब्राईल और रेसालतुत्तैर में सीधेतौर पर ईरान के पौराणिक विषयों से लाभ उठाया है।
डॉक्टर इस्माईलपूर और दूसरे बहुत से अध्ययनकर्ताओं का मानना है कि सोहरावर्दी ने सांकेतिक रूप में बात की गयी अपनी कहानियों में उन विषयों से लाभ उठाया है जिनका उल्लेख अविस्ता में किया गया है और इसी प्रकार उन्होंने अविस्ता की पौराणिक हस्तियों और फिरदौसी के शाहनामे से बहुत लाभ उठाया है। अलबत्ता इसका तात्पर्य यह नहीं है कि सोहरावर्दी ने पौराणिक कहानियां लिखी हैं बल्कि दर्शनशास्त्र के अपने उद्देश्यों को सिद्ध करने के लिए उन्होंने इस प्रकार की कहानियों से लाभ उठाया है और इसी कारण साहित्यिक दृष्टि से भी उनकी कहानियों व रचनाओं को देखा जा सकता है। जहां पर सोहरावर्दी ने अपने सांकेतिक उदाहरणों में अंधकार और प्रकाश की बात की है सही व सूक्ष्म रूप में वहां मूल ईरानी संस्कृति से लाभ उठाया है।
सोहरावर्दी ने जहां ज़रूरी समझा वहां पौराणिक बातें की और जहां आवश्यक समझा वहां पौराणिक कहानियों व बातों से लाभ भी उठाया। पौराणिक बातों व कहानियों के प्रयोग करने का यह अर्थ है कि पौराणिक हस्तियों से लाभ उठाया जाये और दर्शनशास्त्र व रहस्यवादी बहसों से जो निष्कर्ष निकाला जाता है उसका कारण यही हस्तियां हैं। उदाहरण स्वरूप सोहरावर्दी ने प्रलय के बारे में अलवाहे एमादी नाम की अपनी किताब में फरीदून और ज़ह्हाक की कहानियों से बहुत लाभ उठाया है। अविस्ता में भी इन कहानियों का उल्लेख है। उन्होंने अंधकार और प्रकाश को अपने सांकेतिक उदाहरणों में पौराणिक रूप में पेश किया है और फरीदून को प्रकाश जबकि ज़ह्हाक को अंधकार का प्रतीक बताया है किन्तु पौराणिक कहानियां व बातें बनाने का अर्थ यह है कि स्वयं लेखक अपनी तरफ से इस प्रकार की बातें व कहानियां लिखे। इस संबंध में सोहरावर्दी में बहुत रचनात्मकता पाइ जाती है।
डाक्टर इस्माईलपूर का मानना है कि अक़्ले सुर्ख किताब में जिन पौराणिक कहानियों व बातों का प्रयोग किया गया है वह सोहरावर्दी के दिमाग़ की पैदावार हैं। सुर्ख बुद्धि संपूर्ण बुद्धि व वास्तविकता का प्रतीक है और उसका एक बूढ़े व्यक्ति के रूप में ज़ाहिर होने का संबंध जिसके बाल लाल हैं, सोहरावर्दी की रचनात्मकता से है और उन्होंने अपनी किताब अक़्ले सुर्ख में सीमुर्ग, तूबा के वृक्ष और दूसरे विषयों से लाभ उठाकर बहुत ही अच्छी व रोचक बातें लिखी हैं। उन्होंने अपनी किताब अक़्ले सुर्ख में शाहनामे में ज़ाल की कहानी से भी अद्वितीय रूप से लाभ उठाया है। अविस्ताई भाषा में ज़ाल का अर्थ समय है और चूंकि ज़ाल का बाल सफेद है इसलिए सोहरावर्दी उसे एक साथ प्रकाश और समय का प्रतीक मानते हैं। इसी प्रकार वह उसे भगाया हुआ मानते हैं। पौराणिक कहानियों के अनुसार चूंकि ज़ाल को उसका पिता निकाल देता है और उसे जंगल में छोड़ दिया जाता है वहां पर सीमुर्ग उसे मुक्ति दिलाता है। सोहरावर्दी के अनुसार सीमुर्ग का घोसला तूबा के वृक्ष पर है और वह इस बात का सूचक है कि मानो सोहरावर्दी अपनी कहानी के माध्यम से प्रकाश के उतरने को बयान व पेश करना चाहते हैं। इस बात को ध्यान में रखते हुए कि समाज में लोग आदर्शवादी कहानियों की ओर रुझान रखते हैं, कुछ आलोचकों का मानना है कि अक्ले सुर्ख सहित सोहरावर्दी की कुछ सांकेतिक कहानियां अत्याधुनिक कहानी बनने की योग्यता रखती हैं। अक़्ले सुर्ख किताब पढ़कर हम आदर्शवादी कहानियों से परिचित होते हैं। वह बूढ़ा मर्द जिसके बाल लाल हैं और वह कहानी बयान करने वाला भी है बाज़ की भांति योग्य व कर्म के शिकारियों के हाथ में है। ये नई सृष्टियां हैं जो वर्तमान समय में कहानी बयान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं। इन कहानियों को पढ़कर समझा जा सकता है कि फारसी साहित्य कल्पना और संकेत की दृष्टि से किस सीमा तक समृद्ध है।