बुधवार - 2 सितम्बर
1573, मुग़ल सम्राट अकबरे आज़म ने गुजरात फ़तह किया।
उनका पूरा नाम जलालुद्दीन मुहम्मद अकबर था। उन्हें अकबरे आज़ाम के नाम से भी जाना जाता है। सम्राट अकबर मुग़ल साम्राज्य के संस्थापक ज़हीरुद्दीन मुहम्मद बाबर के पोते और नासिरुद्दीन हुमायूं एवं हमीदा बानो के पुत्र थे।
1666 को लंदन में भीषण आग की शुरूआत हुई और पांच दिन में पूरा शहर तबाह हो गया।
1801, उस्मानी शासन की सेनाओं के निरंतर आक्रमण के बाद फ़्रांस की सेना पराजित हुई और उसे मिस्र से निकलना पड़ा।
1926, इटली और यमन में हुए समझौते के तहत लाल सागर तट पर इटली का वर्चस्व क़ायम हुआ।
1945, हो ची मिन्ही ने स्व्तंत्र वियतनाम गणराज्य की स्थापना की।
1969, पहली एटीएम मशीन ‘औटोमेटेड टेलर मशीन’न्यूयॉर्क में जनता की सेवा में पेश की गई। इसे बनाया था अमरीकी इंजीनियर डोनाल्ड वेटजेल ने।
1970, कन्याकुमारी में विवेकानन्द स्मारक का उद्घाटन हुआ।
1990, काला सागर में सोवियत यात्री जहाज़ के डूबने से 79 यात्री मारे गए व 319 अन्य लापता हो गए।
1998, डरबन में 12वें गुट निरपेक्ष आंदोलन शिखर सम्मेलन का अफ़्रीकी राष्ट्रपति नेल्सर मंडेला द्वारा उद्घाटन हुआ।
2001, सन् 1967 में विश्व का पहला हृदयरोपण करने वाले दक्षिण अफ़्रीका के अग्रणी हृदय विशेषज्ञ क्रिश्चियन बर्नार्ड का साइप्रस में निधन हो गया।
2007, अल्बानिया विश्व का पहला रासायनिक हथियार युक्त राष्ट्र बना।
2009, आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री वाई. एस. रेड्डी को ले जा रहा हेलीकाप्टर उड़ान भरने के बाद लापता हुआ।
2 सितम्बर सन 1801 ईसवी को ब्रिटेन और उसमानी शासन की सेनाओं के निरंतर आक्रमण के बाद फ़्रांस की सेना पराजित हुई और उसे मिस्र से निकलना पड़ा।
उल्लेखनीय है कि जब नेपोलियन ने मिस्र पर क़बज़ा कर लिया तो ब्रिटेन जो फ़्रांस का मुख्य प्रतिस्पर्धी था अपने सैनिक और आर्थिक हितो को खतरे में देखने लगा। इसी लिए फ़्रांसीसी सेना को मिस्र से बाहर निकालने के उद्देश्य से ब्रिटेन ने उसमानी शासन से सॉंठ गॉंठ कर ली। नेपोलियन के मिस्र से फ़्रांस वापस चले जाने के बाद फ़्रांसीसी सेना मिस्र में अपनी शक्ति खोती रही और ब्रिटिश तथा उसमानी सेनाओं के निरंतर आक्रमण के कारण उसे मिस्र छोड़ना पड़ा।

2 सितम्बर सन 1945 ईसवी को वियतनाम गणराज्य स्वतंत्र हुआ इस लिए आज के दिन को इस देश का राष्ट्रीय दिवस घोषित किया गया है। 19वीं शताब्दी के मध्य में वियतनाम फ़्रांस के क़ब्ज़े में चला गया था किंतु वर्ष 1940 में द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान जर्मनी से फ़्रांस के पराजित होने के बाद जापान ने फ़्रांस की कमज़ोरी का लाभ उठाते हुए वियतनाम पर अधिकार कर लिया। द्वितीय विश्व युद्ध की समाप्ति और जापान की पराजय तक यह देश जापान के अधिकार में रहा। इसी काल में हूची मिन्ह के नेतृत्व में इंडोचाइना प्रतिरोध आंदोलन ने वियतनाम को अपने नियंत्रण में कर लिया और वियतनाम गणराज्य की स्थापना की गयी। हूची मिन्ह वियतनाम के राष्ट्रपति घोषित किये गये। वर्ष 1946 में फ़्रांस ने दोबारा वियतनाम पर आक्रमण कर दिया जिसके बाद से वियतनाम ने अपनी स्वाधीनता और स्वतंत्रता की सुरक्षा के लिए पहले फ़्रांसीसी और फिर अमरीकी अतिक्रमणकारियों के मुक़ाबले में लम्बा संघर्ष किया। वियतनामी जनता के कड़े संघर्ष के आगे वर्ष 1954 में फ़्रांस को और 1975 में अमरीका को पराजय का सामना करना पड़ा। वियतनाम दक्षिण पूर्वी एशिया में स्थित है।

2 सितम्बर सन 1945 ईसवी को जापान द्वारा हार स्वीकार कर लिए जाने के बाद दूसरा विश्व युद्ध समाप्त हुआ। युद्ध के अंतिम दिनों में संयुक्त शक्तियों से बार बार पराजित होने के बाद जापान हथियार डालने पर विवश हुआ और फिर पोटसडैम नामक समझौते के आधार पर संयुक्त शक्तियों ने जापान पर क़ब्ज़ा कर लिया और जापान का संचालन अमरीकी सैनिक जनरल मैक आर्थर को सौंपा गया। 1951 में 49 देशों ने जापान के साथ शांति समझौते पर हस्ताक्षर किये और जापान दोबारा स्वतंत्र हुआ।

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12 शहरीवर सन 1294 हिजरी शम्सी को दक्षिणी ईरान में ब्रिटिश साम्राज्य के विरुद्ध संघर्ष का नेतृत्व करने वाले रईस अली दिलवारी शहीद हो गये। प्रथम विश्व युद्ध के दौरान ब्रिटेन ने दक्षिणी ईरान पर अधिकार करने का प्रयास किया। ऐसे समय में अली दिलवारी ने देश की रक्षा के लिए जेहाद आरंभ और ब्रिटिश सेना के मुक़ाबले के लिए जनता का नेतृत्व किया। उन्होंने दक्षिणी ईरान की महत्वपूर्ण बूशहर बंदरगाह पर अधिकार करने के ब्रिटिश सेना के प्रयासों को कई बार विफल बनाया। यह संघर्ष 7 वर्ष तक जारी रहा।
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13 मोहर्रम सन, 376 हिजरी क़मरी को ईरान के गणितज्ञ और खगोल शास्त्री अबुल हसन उमर सूफ़ी राज़ी का निधन हुआ। वे ईरान में आले बूये शासन श्रृंखला के शासक अज़ोदुद दौला के दरबारी विद्वानों में थे। उन्होंने खगोल शास्त्र और गणित दोनों ही विषयों में सराहनीय कार्य किये। इन विषयों से संबंधित उनकी महत्वपूर्ण पुस्तकें आज भी लोगों के लिए लाभदायक सिद्ध हो रही हैं।
13 मोहर्रम सन 1021 हिजरी क़मरी को ईरान के विख्यात धर्मगुरु मुल्ला अब्दुल्ला शूश्तरी का निधन हुआ। उन्होंने इराक़ के पवित्र नगर नजफ़ में उच्च स्तरीय धार्मिक शिक्षा प्राप्त की जिसके बाद वे ईरान लौट आए और लोगों के शिक्षाप्रशिक्षण में व्यस्त हो गये। उनका जीवन अत्यंत सादा था। वे लोगों की आर्थिक एवं विभिन्न प्रकार की अनय सहायताओं के लिए बहुत चर्चित थे।