Sep ०३, २०१६ ०६:०७ Asia/Kolkata
  • शुक्रवार- 4 सितम्बर

4 सितम्बर सन  1888 को महात्मा गांधी ने इंग्लैंड के लिए समुद्री यात्रा शुरु की।

4 सितम्बर सन 1665 को  मुग़लों और छत्रपति शिवाजी  के बीच राजा जय सिंह संधि पर हस्ताक्षर हुए। 

4 सितम्बर सन 1944  को द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान ब्रिटिश सैनिकों ने में बेल्जियम के एंटवर्प शहर में प्रवेश किया।

4 सितम्बर सन 1946 को भारत में  अंतरिम सरकार का गठन किया गया।

4 सितम्बर सन  1967  को 6.5 तीव्रता वाले भूकंप की चपेट में अाया महाराष्ट्र का काेयना बांध, 200 से ज्यादा लोगाें की मौत।

4 सितम्बर सन 1969 को उत्तरी वियतनाम के राष्ट्रपति एवं राष्ट्रपिता हो ची मिन्ह का देहां हुआ ।

4 सितम्बर सन 1985 को   73 सालों के बाद समुद्र में  डूबे जहाज टाइटेनिक की तस्वीरें सामने आई थीं। टाइटेनिक दुर्घटना में इस जहाज पर सवार 1,500 लोग मारे गए थे।

4 सितम्बर सन   1999 को ईस्ट तिमोर में  सम्पन्न हुए जनमत संग्रह में 78.5 प्रतिशत जनता ने इंडोनेशिया से स्वतंत्रता के पक्ष में अपना मत प्रकट किया।

4 सितम्बर सन 2001 को  अमेरिकी सीनेट ने राष्ट्रपति को अफगानिस्तान पर सैनिक कार्यवाही की मंजूरी दी।

4 सितम्बर सन 2001 को श्रीलंका ने मुशर्रफ़ से सैन्य मदद मांगने का फैसला किया।

गुजरात उच्च न्यायालय ने 2009 को असवंत सिंह की मुहम्मद अली जिन्ना पर लिखी गई किताब पर गुजरात में लगे प्रतिबंध को हटाया।

 

4 सितम्बर सन 1514 ईसवी को फ़्रांस के प्रख्यात शिल्पकार जॉन गोजून का जन्म हुआ। वे फ़्रांस में पुनर्जागराण आंदोलन के अग्रिणी लोगों में से थे। उन्होंने कई गिरिजाघरों का निर्माण किया। गोजून ने पेरिस के लोवेर संग्रहालय के निर्माण में भी योगदान दिया। 1567 ईसवी में उनका निधन हुआ।

4 सितम्बर सन 1797 ईसवी को फ़्रांस की सेना ने राजशाही शासन व्यवस्था के समर्थकों के विरुद्ध विद्रोह करके उनका दमन किया। फ़्रांस की क्रान्ति के आठ साल बाद सरकार और क्रान्ति के नेताओं के अनुचित क्रिया कलापों तथा योरोपीय देशों के साथ युद्ध में कई मोर्चों पर फ्रांस की सेना की पराजय के बाद होने वाले चुनावों में लोगों ने राजशाही शासन व्यवस्था के पक्ष में वोट डाले किंतु क्रान्तिकारी नेताओं के कहने पर सैनिक अधिकारियों ने विद्रोह कर दिया विद्रोहियों में नेपोलियन बोनापार्ट भी शामिल था। सेना ने 177 अधिकारियों को अपदस्थ और 65 को देश निकाले का दंड दिया। इसी प्रकार राजशाही शासन व्यस्था के समर्थकों को भी सेना ने देशनिकाला दिया और 42 समाचार पत्रों को बंद करवा दिया। इस प्रकार नेपोलियन बोनापार्ट के लिए सत्ता हथियाने का अवसर उपलब्ध हुआ।

 

4 सितंबर वर्ष 1825 को भारत के स्वतंत्रता सेनानी दादा भाई नौरोज़ी का जन्म हुआ था।  चार सितम्बर 1825 को गुजरात के नवसारी में नौरोजी का जन्म एक गरीब परिवार में हुआ था लेकिन समस्त समस्याओं पर विजय प्राप्त करके उन्होंने शिक्षा ग्रहण की और मात्र 25 वर्ष की आयु में एलफिनस्टोन इंस्टीट्यूट में लीडिंग प्रोफेसर के तौर पर नियुक्त होने वाले पहले भारतीय बने।  दादा भाई नौरोज़ी को भारतीय राजनीति का ग्रैंड ओल्डमैन कहा जाता है। वे पहले भारतीय थे जिन्हें एलफिंस्टन कॉलेज में प्रोफेसर के रूप में नियुक्ति मिली। उन्होंने शिक्षा के विकास, सामाजिक उत्थान और परोपकार के लिए बहुत सी - संस्थाओं को प्रोत्साहित करने में अपना योगदान दिया।  दादा भाई नौरोजी प्रसिद्ध साप्ताहिक  पत्रिका रास्त गुफ़तार के संपादक भी रहे। उन्होंने 1906 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के कलकत्ता अधिवेशन की अध्यक्षता की और इस अधिवेशन में उन्होंने ब्रिटेन से भारत की पूर्ण स्वतंत्रता की मांग की।  दादा भाई नौरोजी गोपाल कृष्ण गोखले और महात्मा गांधी के सलाहकार भी थे।  नौरोजी का 30 जून 1917 को 92 वर्ष की उम्र में मुम्बई में निधन हो गया।

 

4 सितम्बर सन 1828 ईसवी को फ़्रांस के लेखक और इतिहासकार हीपोलीटन का जन्म हुआ। इतिहासकार के रुप में विख्यात होने से पूर्व उन्होंने साहित्य के क्षेत्र में परिश्रम किया था। 1893 ईसवी में उनका निधन हो गया।

 

4 सितम्बर सन 1882 ईसवी को अमरीकी आविष्कारक एडीसन ने बिजली का पहला मोटर बनाया। यह तीन सौ हार्स पावर का था। एडिसन ने इस मोटर के सहारे न्यूयार्क नगर में एक कारख़ाना स्थापित किया जो नगर के आधे भाग की विद्युत आपूर्ति करता था। एडिसन ने 1869 में बल्ब का भी आविष्कार किया।

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14 शहरीवर सन 1360 हिजरी शम्सी को ईरान के उच्चतम न्यायाधीश अली क़ुद्दूसी को आतंकवादी गुट एम के ओ ने एक विस्फोट करके शहीद कर दिया। आयतुल्ला क़ुद्दूसी ने आयतुल्ला बुरुजर्दी अल्लमा तबातबाई और इमाम ख़ुमैनी जैसे वरिष्ट धर्मगुरुओ से शिक्षा ली। उन्होंने स्कूल भी खोला जोछ ज्ञान के क्षेत्र में उनकी गतिविधियों का परिचायक है। वर्ष 1341 में उन्होंने अत्याचारी शाह के विरुद्ध आरंभ किया इसी कारण उन्हे जेल भी जाना पड़ा। अपनी आयु के अंतिम वर्षों में वे इस्लामी शासन व्यवस्था के आधारों को मज़बूत करने में लगे रहे। इसी संदर्भ में उन्होंने इमाम ख़ुमैनी के कहनक पर न्यायाधीश का भारी दायित्व संभाला। और इंतत: एम के ओ की आतंकवादी कार्रवाई में शहीद हुए।