रविवार- 6 सितम्बर
1914 को फ्रांस एवं जर्मनी के बीच मार्ने का युद्ध शुरू।
1819 को थॉमस ब्लैंचार्ड ने खराद मशीन पेटेंट कराई।
1965 को भारत-पाकिस्तान युद्ध से संबंधित ताशक़ंद समझौता हुआ।
1983 को सोवियत संघ ने कोरिया एयरलाइंस के विमान 007 को मार गिराने की बात स्वीकार की।
1997 को वेल्ज़ की राजकुमारी डायना की अतिंम यात्रा में लगभग 10 लाख लोगों ने भाग लिया।
1991 को रूस के दूसरे सबसे बड़े शहर का नाम पुनः सेंट पीटर्सबर्ग रखा गया, 1924 में इसका नाम बदलकर लेनिंनग्राड रख दिया गया था।
2000 को संयुक्त राष्ट्र महासचिव कोफ़ी अन्नान द्वारा संयुक्त राष्ट्र सहस्त्राब्दि शिखर सम्मेलन का शुभारम्भ हुआ।
2006 को मैक्सिको के सत्तारूढ़ कंजरवेटिव पार्टी के फ़ेलिप काल्देरोन नए राष्ट्रपति मनोनीत किये गए।
2007को ब्रिटेन की द ह्यूमन फ़र्टिलाइजेशन एंड एम्ब्रियोलॉजी अथॉरिटी ने मानव पशु संकर भ्रूण पर शोध करने के लिए सिद्धान्त रूप से अनुमति दी।
2008 को डी.सुब्बाराव ने भारतीय रिज़र्व बैंक के गर्वनर का कार्यभार संभाला।
2009 को चीनी सेना ने लद्दाख़ में ढेड़ किलोमीटर तक घुसपैठ की।
2009 को कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री हरचरण सिंह बरार का निधन हो गया।
2011 को नाइजीरिया के मध्यवर्ती प्रांत प्लेटो में सप्ताह भर से जारी सांप्रदायिक दंगों में 40 से अधिक लोगों की हत्या कर दी गई।
2011 को नासा के वैज्ञानिकों के मुताबिक़, भारत-पाकिस्तान सीमा और लाईन ऑफ़ कंट्रोल की निगरानी के लिए लगाई गईं फ्लड लाइटों ने इस सीमा रेखा को अंतरिक्ष से दिखाई देने वाली विश्व की सर्वाधिक जगमग सीमा रेखा बना दिया है।
6 सितम्बर सन 48 ईसा पूर्व को रोम साम्राज्य त्रिकोणीय गठजोड़ के दो महत्वपूर्ण सदस्यों जूल सिज़र और पोम्पस के बीच फ़ारसाल नामक ऐतिहासिक युद्ध हुआ। इस युद्ध में सिज़र को विजय हुई और पोम्पस मारा गया। इस सफलता के बाद सिज़र रोम के सम्राट बने। वे युवावस्था में सेना में भर्ती हो गये और धीरे धीरे रोम की सेना के प्रभावशाली कमांडर बन गये। पोम्पस को पराजित करने के बावजूद रोम में एक अत्याचारी शासन की स्थापना के अपने प्रयास के दौरान सिज़र एक राजनैतिक षडयंत्र का शिकार हुए उन्हें रोम की सेनेट के प्रांगड़ में मार दिया गया।
6 सितम्बर सन 1965 ईसवी को भारत और पाकिस्तान की संयुक्त सीमा पर एक महीने से अधिक समय तक अशांति के बाद भारतीय सेना ने पाकिस्तान पर व्यापक आक्रमण आरंभ किया। दोनों पड़ोसी देशों के बीच कश्मीर मामले को लेकर यह दूसरी लड़ाई थी यह युद्ध लगभग 3 सप्ताहों तक चलता रहा। अंतत: यह युद्ध सोवियत संघ की मध्यस्थता से थमा। दोनों ने 10 जनवरी सन 1966 से ताजिकिस्तान की राजधानी ताशकंद में सोवियत संघ के तत्कालीन प्रधान मंत्री की मध्यस्थता से वार्ता आरंभ की। वार्ता के समापन पर एक संयुक्त घोषण पत्र जारी हुआ जिसमें कश्मीर समस्या के समाधान और भारत पाक संबंधों के बेहतर बनाने के मार्गों का उल्लेख किया गया था। हालॉकि विश्व के अनेक देशों ने इस घोषणा पत्र का स्वागत किया किंतु यह कश्मीर समस्या का समाधान न कर सका। इस समस्या को लेकर दोनों देशों के बीच अब भी तनाव जारी है।

6 सितम्बर सन 1968 ईसवी को दक्षिणी अफ़्रीक़ा में स्वाज़ीलैंड नामक देश ब्रिटेन से स्वतंत्र हुआ। आज के दिन को इस देश का राष्ट्रीय दिवस घोषित किया गया।
दक्षिणी अफ़्रीक़ा में योरोपीय साम्राज्य का प्रभाव बढ़ने के साथ ही सवीज़ेर्लैंड योरोप के नियंत्रण मे आ गया बहुत समय तक यह देश ब्रिटेन और द्रान्सवाल द्वारा जो वर्तमान दक्षिणी अफ़्रीक़ा का भाग है। संचालित होता रहा। दक्षिणी अफ़्रीक़ा की स्वतंत्रता के बाद स्वज़ीलैंड पर ब्रिटेन का एकाधिकार हो गया और अंतत: 1968 ईसवी में यह देश ब्रिटेन से स्वतंत्र हुआ इस देश में अतीत की भॉति अब भी राजशाही शासन व्यवस्था है। यह अफ़्रीक़ा महाद्वीप के दक्षिण में स्थित है मोज़ाम्बीक और दक्षिणी अफ़्रीक़ा इसके पड़ोसी देश हैं।

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16 शहरीवर 1363 हिजरी शम्सी को ईरान के प्रसिद्ध धर्मगुरु आयतुल्लाह मिर्ज़ा मोहम्मद बाक़िर आश्तियानी का निधन हुआ। वे वर्ष 1284 हिजरी शम्सी में तेहरान में जन्मे थे। आरंभिक शिक्षा के बाद वे उच्चस्तरीय शिक्षा के लिए इराक़ के नजफ़ नगर चले गये। नजफ़ में उच्चस्तरीय शिक्षा प्राप्ति के बाद वे तेहरान लौट आए और शिक्षा दीक्षा में लग गये। उन्होंने अरबी और फ़ार्सी भाषाओं में पुस्तकें लिखीं।
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17 मोहरम सन 898 हिजरी क़मरी को ईरान के प्रसिद्ध शायर और सूफ़ी नूरुद्दीन अब्दुर्रहमान जामी का हेरात नगर में निधन हुआ। हेरात उस समय ईरान का भाग था जो अब अफ़गानिस्तान का प्रांत है।
जामी ने हेरात और समरक़ंद में आरंभिक शिक्षा प्राप्त की। उन्हें साहित्य से विशेष लगाव था।
युवाकला में उन्हें कुछ मुसलमान सूफ़ियों का साथ मिल गया जिसके बाद वे भी उन्हीं के मार्ग पर चल पड़े।
जामी को पैग़म्बरे इस्लाम से गहरी श्रद्धा थी। उन्होंने कभी किसी लालच में आकर किसी राजा महाराजा की प्रशंसा में कोई शेर नहीं लिखा। जामी ने बड़े ही सुंदर शेरों से भरी पुस्तकें अपनी निशानी के रूप में छोड़ी हैं। जिनमें हफ़त औरंग बहुत प्रसिद्ध है।