Sep ०६, २०१६ ०६:४८ Asia/Kolkata
  • बुधवार- 9 सितम्बर

9 सितम्बर 1945 ईसवी को ग्रीस हूपर कम्प्युटर का पहला बग चिन्हित किया।

• 9 सितम्बर 2012 को इंडियन स्पेस एजेंसी ने सबसे भारी विदेशी सैटेलाइट को कक्षा में स्थापित किया। 
•  9 सितम्बर सन 1791 ईसवी को संयुक्त राज्य अमेरिका के राष्ट्रपति जार्ज वाशिंग्टन के नाम पर इस देश की राजधानी का नाम वाशिंग्टन डीसी रखा गया। 


9 सितम्बर 1945 इसवी को जापानी सैनिकों के हथियार डालने के समझौते पर हस्ताक्षर हुए इन सैनिकों ने चीन पर अतिग्रहण कर लिया था। जापान के तत्कालीन नरेश हीरुहीतू के आदेश पर 10 लाख जापानी सैनिकों ने हथियार डाले और चीन तथा जापान का ऐतिहासिक युद्ध समाप्त हुआ। चीन की यह सफलता सशस्त्र कम्यूनिस्ट सैनिकों और चीन की सरकारी सेना के बीच एकता का परिणाम थी। किंतु जापान को पराजित करने के बाद चीन में दोनों पक्षों के बीच आंतरिक युद्ध आरंभ हो गया जिसमें कम्युनिस्ट सैनिकों की जीत हुई और चीन में कम्युनिश्ट शासन व्यवस्था स्थापित हुई।

 

9 सितम्बर सन 1948 ईसवी के द्वितीय विश्व युद्ध और कोरिया प्रायद्वीप के विभाजन के बाद उत्तरी कोरिया ने अपनी स्वाधीनता की घोषणा की। कोरिया का इतिहास विदेशी आक्रमणों से भरा पड़ा है। वर्ष 1905 में जापान ने चीन और रुस को पराजित करके कोरिया पर क़ब्ज़ा किया और द्वितीय विश्व युद्ध की समाप्ति तक इसे अपने नियंत्रण में रखा। द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान चीन और कोरिया के स्वतंत्रता संग्रामियों ने जापान से संघर्ष किया। किंतु इस इलाक़े की स्वतंत्रता के बजाए वर्ष 1945 में उत्तरी कोरिया पर रुस और दक्षिणी कोरिया पर अमरीका का अधिकार हो गया बाद में दक्षिणी कोरिया ने अपनी स्वतंत्रता की घोषणा की जिसके एक महीने बाद आज के दिन उत्तरी कोरिया ने भी अपनी स्वाधीनता की घोषणा की। अब इस क्षेत्र का महत्वपूर्ण मामला दोनो कोरियाओं का एक देश में परिवर्तित होना है जिसके लिए भी वार्ताएं जारी हैं।

 

9 सितम्बर सन 1976 ईसवी को चीन के विश्व विख्यात नेता माओ त्से तोंग का निधन हुआ। उनका जन्म 1893 ईसवी को हुआ था। वर्ष 1921 में उन्होंने अपने साथियों के साथ मिलकर कम्युनिष्ट पार्टी की आधार शिला रखी। माओ, कम्युनिष्ट आंदोलन द्वारा कृष्कों के समर्थन पर बल देते थे। इसी कारण ग्रामीण क्षेत्रो में उनक बहुत से समर्थक पैदा हो गये। वर्ष 1934 में 1 लाख कम्यूनिष्ट सैनिकों ने माओ के नेतृत्व में चीन के उत्तर से दक्षिण तक मार्च किया। इसमे एक वर्ष का समय लगा। माओ के नेतृत्व में कम्युनिष्टों ने वर्ष 1949 में सरकार बनायी जो चीन की एक शक्तिशाली सरकार में परिवर्तित हो गयी। कम्युनिज़्म के बार में माओ का विचार मार्क्स तथा लेनिन विचारधाराओं से कुछ अलग है इसे माओइज़्म कहा जाता है।

 

9 सितम्बर सन 1991 ईसवी को ताजेकिस्तान ने सोवियत संघ से अपनी स्वतंत्रता की घोषणा की। रुस के ज़ार शासकों ने 19वीं शताब्दी से इस देश पर अपना नियंत्रण जमाया किंतु 1980 के दशक मे सोवियत संघ में होने वाले राजनैतिक परिवर्तनों के बाद ताजेकिस्तान ने भी अपनी स्वतंत्रता की घोषणा की।  

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19 शहरीवर सन 1358 हिजरी शम्सी को ईरान के संघर्षकर्ता धर्मगुरु आयतुल्ला सैयद महमूद तालेक़ानी का हृदयगति रुक जाने से देहान्त हुआ। वे 1284 हिजरी शम्सी में तालेक़ान प्रांत के एक गांव में पैदा हुए। युवावस्था से उन्होंने ईरान और विश्व के राजनैतिक परिवर्तनों पर गहरी नज़र रखी। उन्हें तत्कालीन अन्यायी सरकार के विरुद्ध राजनैतिक गतिविधियों के कारण ज़ेल भी जाना पड़ा। इस्लामी क्रान्ति की सफलता के समय भी वे जेल में थे किन्तु क्रान्ति की सफलता के बाद उन्हें जेल से निकाल गया। जनता ने उनका भव्य स्वागत किया। इमाम ख़ुमैनी ने उन्हें संसद सभापति और तेहरान का इमामे जुमा नियुक्त किया।  ईरान में वरिष्ठ नेता का चयन करने वाली परिव में भी उन्होंने तेहरान की जनता का प्रतिनिधित्व किया।

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20 मोहर्रम सन 1268 हिजरी क़मरी को ईरान में मिर्ज़ा तक़ी ख़ान अमीर कबीर को महामंत्री के पद से हटाया गया। वे ईरान के वरिष्ठ राजनीतिज्ञों में गिने जाते थे। वे क़ाजार शासन श्रृखंला के शासक नासिरुद्दीन शाह के काल में महामंत्री बनाए गये थे।

अमीर कबीर एक स्वतंत्र विचार और ईमान वाले ज्ञान प्रेमी और सांस्कृतिक व्यक्ति थे। उन्होंने ईरानी जनता की भलाई के लिए बहुत से कार्य किये और अपने शासन काल में बहुत से सुधार के काम करवाए। उन्होंने ईरान के भीतर विदेशियों के हस्तक्षेप को रोकने के लिए दिन रात एक कर दिया जिसके कारण विदेशी शक्तियां और ईरान के अंदर इन शक्तियों के पिटठू अमीर कबीर के विरोधी हो गये और सबने मिलकर नासिरुद्दीन शाह पर दबाव डाला जिसके परिणाम स्वरुप अमीर कबीर को अपदस्थ कर दिया गया।