मौलाना जलालुद्दीन मोहम्मद मौलवी-6
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मौलवी की मसनवी उन चुनिंदा रचनाओं में से है जो पुरानी होने के बावजूद आज भी तरो ताज़ा हैं।
मौलवी की मसनवी उन चुनिंदा रचनाओं में से है जो पुरानी होने के बावजूद आज भी तरो ताज़ा हैं।
मौलवी की मसनवी उन चुनिंदा रचनाओं में से है जो पुरानी होने के बावजूद आज भी तरो ताज़ा हैं। सरल भाषा, अर्थ में गहराई, कथा और उपमा का प्रयोग और इसकी विश्व लोकप्रियता ने इसे ताज़गी प्रदान की है और उसे कई आयामों से जैसे कि कथा के स्वरूप ने अध्ययन के योग्य बना दिया है। इस कार्यक्रम में मसनवी की कथा, कथा को साहित्यक रूप में बयान करना, मसनवी की कुछ विशेषताओं और उसमें प्रयोग होने वाले कहानी के तंत्रों की समीक्षा की जाएगी।
अर्थ और विषय के दृष्टिगत कहानी के विभिन्न प्रकार हैं, जिनमें से उसके वैचारिक, वास्तविक, प्रेम, रहस्यवाद, नैतिकता और अन्य अनेक प्रकारों की ओर संकेत किया जा सकता है। शोधकर्ताओं ने मसनवी की कहानियों को विषय के आधार पर चार भागों में बांटा है, रहस्यवादी कहानियां, नैतिक कहानियां, क़ुरानी कहानियां और रूपक कहानियां।
मसनवी की अधिकांश कहानियों का अर्थ रहस्यवादी है। अपनी समस्त कहानियों में मौलवी एक उद्देश्य को प्राप्त करना चाहते हैं, यही कारण है कि वे कहानी के कहने के अंदाज़ पर बहुत अधिक ध्यान नहीं देते हैं। बल्कि वे कहानी में छिपी परतों और रहस्यवादी विचारों पर अधिक ध्यान देते हैं। इस अर्थ में कहानी के दो भाग होते हैं, एक शरीर और एक आत्मा, उसका शरीर दर्शनीय एवं आत्मा अदृश्य होती है और उसको समझने में समय लगता है और वह आसानी से समझ में नहीं आती।
मौलवी हमेशा ऐसी चीज़ों को प्राप्त करना चाहते हैं जिनका प्राप्त करना कठिन होता है या ऐसी चीज़ों की तमन्ना करते हैं जो पायी नहीं जातीं। इस खोज में जो चीज़ें उनके हाथ लगती हैं, वे उन्हें रहस्य, रूपक या शिक्षा के रूप में बयान कर देते हैं। मसनवी की कुछ कहानियों में नैतिक एवं शैक्षिक पहलू हैं। इस प्रकार की कहानियों का मूल उद्देश्य शिक्षा दीक्षा है। इन कहानियों में मौलवी ने बहुत ही स्पष्ट रूप में बात की है और निष्कर्ष निकाला है। इन प्रकार की कहानियों में मौलवी ने अपने पाठकों को नैतिक शिक्षाएं दी हैं। उदाहरण स्वरूप, वह वाइज़ या उपदेशक जो अत्याचारियों के लिए दुआ करता था, नामक कहानी में मौलवी एक महत्वपूर्ण नैतिक पाठ देते हैं। मौलवी कहानी को इस प्रकार बयान करते हैं, वाइज़ जब भी मिंबर पर जाता था, चोरों और राहज़नों के लिए दुआ करता था और ईश्वर से उनके स्वास्थ्य के लिए दुआ मांगता था और कहता था कि उनपर ईश्वर की कृपा हो।
उससे कहा गया कि हे धर्मगुरु, उनके लिए क्यों दुआ करते हो, जबकि भले लोगों के लिए कभी दुआ नहीं मांगते? उसने कहा, इसका कारण यह है कि मैं उन लोगों में अनेक अच्छाईयां देखता हूं। उन्होंने मेरे साथ इतनी बुराई की कि बुराई द्वारा अच्छाई की ओर मेरा मार्गदर्शन किया। जब कभी भी मैं काम वासना और माल के लालच में पड़ा उन्होंने मुझे उस रास्ते से रोक दिया। यानी मेरा माल चोरी कर लिया या ईर्ष्या करके मेरी प्रसिद्धि को नुक़सान पहुंचाया और मेरे हित में ही मुझे हानि पहुंचायी। यही कारण है कि मैंने लालच और वासना को त्याग दिया और ईश्वर पर भरोसा करने लगा।
मौलवी इस कहानी को बयान करने के बाद, बंदों के लिए ईश्वर की कृपा की दुआ करते हैं और अपने पाठकों को यह याद दिलाते हैं कि बंदा जब समस्याओं और कठिनाईयों में घिरता है तो उसका ध्यान ईश्वर की कृपा और अनुकंपाओं की ओर जाता है। इंसान जब तक समस्या का सामना नहीं करता है, उससे फ़रार नहीं करता और ईश्वर का शुक्र अदा नहीं करता।
मसनवी की कहानियों में क़ुरानी कहानियों का भी उल्लेख है। मौलवी ने क़ुरान की कहानियों के नैतिक, धार्मिक या रहस्यवादी सिद्धांतों से लाभ उठाया है। इन कहानियों में से हूद और आद, सबा और फ़िरऔन और मूसा की कहानियों का नाम लिया जा सकता है।
लेकिन इससे मौलवी पर अध्ययन करने वाले इस निष्कर्ष पर पहुंचे हैं कि थोड़ा सा उपेक्षा से काम लेते हुए मौलवी की मसनवी की समस्त कहानियों को एलिगोरिकल कहा जा सकता है। इसी आधार पर एलिगोरिकल कहानियों में दो आयाम पाये जाते हैं। प्रथम आयाम कहानी का ज़ाहिरी रूप है और दूसरा आयाम कहानीकार के दृष्टिगत होता है। वास्तव में इस प्रकार की कहानियों में पाठक अर्थ के दो चरणों से रूबरू होता है। पहला चरण कहानी का ज़ाहिरी अर्थ है और दूसरा चरण कहानीकार के दृष्टिगत जो अर्थ होता है वह है, जिसके समझने के लिए ध्यान देने की ज़रूरत होती है।
कुल मिलाकर, फ़ार्सी साहित्यकार नैतिक, दार्शनिक और रहस्यवादी सिद्धांतों को बयान करने के लिए कहानियों का सहारा लिया करते थे। मौलवी ने भी नैतिक और रहस्यवादी आयामों को बयान करने के लिए विभिन्न प्रकार की ईरानी कहानियों का प्रयोग किया है।
मसनवी की रूपक कहानियों को दो भागों में बांटा जा सकता है। फ़ेबल या जानवरों की रूपक और मानवीय रूपक। फ़ेबल वह कहानी होती है जिसके पात्र जानवर होते हैं। इस प्रकार की कहानियों में जानवर इंसानों का स्थान ले लेते हैं। उदाहरण स्वरूप, मसनवी में शेर और ख़रगोश की कहानी या शेर और ऊंट की कहानी। मानवीय रूपक कहानियों में लेखक ऐसे मुहावरों का प्रयोग करता है जिनसे लोग परिचित होते हैं। इस प्रकार नैतिक बिंदुओं का उल्लेख किया जाता है, या मसनवी के पहले अध्याय में तूती व बक्क़ाल कहानी।
मसनवी की विशेषताओं में से एक विशेषता जो इससे पहले भी फ़ार्सी साहित्य में पायी जाती थी, वह शीर्षक हैं जो कहानी की कड़ियों के आरम्भ में लिखे हुए हैं। वास्तव में यह कहानी का वह पहला भाग है, जिसमें कहानी में घटने वाली घटनाओं का उल्लेख किया जाता है। मौलवी मसनवी में कहानी कहने से पहले पूरी कहानी या उसके एक बड़े भाग को इस भाग में बयान कर देते हैं।
ज़र्रीन कोब का मानना है कि मौलवी इस भाग द्वारा पाठक को कहानी के अर्थ से अवगत करा देते हैं, ताकि कहानी के दौरान पाठक का ध्यान कहानी के ज़ाहिरी रूप से हटाकर अपने मूल उद्देश्य की ओर खींच सकें।