शनिवार - 19 सितम्बर
1881, 2 जुलाई को फ़ायरिंग की एक घटना में घायल होने वाले अमरीकी राष्ट्रपति जेम्स ए. गारफ़ील्ड का निधन हो गया।
1891, विलियम शेक्सपीयर के प्रसिद्ध नाटक “मर्चेंट आॅफ वेनिस” का मैनचेस्टर में पहली बार मंचन किया गया।
1893, न्यूजीलैंड में निर्वाचन अधिनियम 1893 के तहत सभी महिलाअों को मतदान का अधिकार दिया गया।
1957, अमेरिका ने नेवादा के रेगिस्तान में पहला भूमिगत परमाणु परीक्षण किया।
1962, भारत की उत्तरी सीमा पर चीन ने हमला किया।
1978, सोलोमन द्वीप का अमरीका में विलय हुआ।
1985, मैक्सिको सिटी में शक्तिशाली भूकम्प में हज़ारों लोगों की मौत हो गई और क़रीब 400 इमारतें ध्वस्त हो गईं।
2006, पोप बेनेडिक्ट ने इस्लाम के बारे में अपनी विवादित टिप्पणी के लिए माफ़ी मांगी।
19 सितम्बर सन 1991 ईसवी को कुवैत ने एक सामरिक समझौते पर हस्ताक्षर किये। यह समझौता कुवैत पर इराक़ के अतिग्रहण की समाप्ति के छ महीने पश्चात हुआ। कुवैत के अधिकारियों के अनुसार यह समझौता कुवैत पर इराक़ के पुन: सैनिक आक्रमण को रोकने के उददेश्य से किया गया था। इस समझौते के आधार पर अमरीका को कुवैत की बंदरगाहों के प्रयोग और कुवैत में अपने सैनिकों की तैनाती और सामरिक अड्डों की स्थापना का अधिकार मिला कुवैत ने 1992 में फ़्रांस और ब्रिटेन के साथ भी ऐसे ही समझौते किये। बाद के वर्षों में बहरैन, क़तर, ओमान और संयुक्त अरब इमारात जैसे देशों ने भी अमरीका ब्रिटेन और फ़्रांस से सैनिक समझौते किये परंतु उनकी अपेक्षा के विपरीत इस प्रकार के समझौते स्वयं क्षेत्र में विदेशी सैनिकों की अधिक उपस्थिति और तनाव में वृद्धि का कारण बने।

19 सितम्बर सन 1893 ईसवी को संसार में पहली बार महिलाओं को मत देने का अधिकार प्राप्त हुआ। ये निर्णय न्यूजीलैंड में लिया गया जहॉं चुनाव सुधार कानुन द्वारा महिलाओं को यह अधिकार दिया गया। न्यूजीलैंड की महिलाओ ने 28 नवम्बर सन 1893 में होने वाले चुनावों में पहली बार अपने इस अधिकार का प्रयोग किया। उक्त चुनाव में 90 हज़ार महिलाओं ने वोट डाले। भारतीय उपमहाद्वीप में 1926 में महिलाओं को मताधिकार प्राप्त हुआ।
19 सितंबर वर्ष 1907 को पहली बार इतिहास में कृत्रिम तेल का निर्माण हुआ। इस नये पदार्थ का आविष्कार स्काटलैंड के रसायनशास्त्री जेम्ज़ यांग ने किया था। यांग, पत्थर के कोयले की खदान के मालिक थे और उनके पास एक प्रयोगशाला थी पत्थर के कोयले के आसवन से उन्होंने कृत्रिम तेल बनाने में सफलता प्राप्त की थी।

19 सितंबर 1994 को 20 हज़ार अमेरिकी सैनिकों ने छोटे से देश हेटी पर आक्रमण करके उस पर कब्ज़ा कर लिया। इस कार्य के लिए अमेरिका का बहाना यह था कि वह जीन बर्टरैंड एरिस्टाइट को हेटी के राष्ट्रपति पद पर लौटाना चाहता है। सितंबर वर्ष 1991 में जनरल राउल सेड्रास ने एक विद्रोह करके जीन बर्टरैंड एरिस्टाइट की सरकार का तख्ता पलट दिया। जीन बर्टरैंड एरिस्टाइट को आठ महीने पहले हेटी का राष्ट्रपति चुना गया था। वह अमेरिका भाग गये थे परंतु कुछ समय बाद हेटी के विद्रोह कर्ता अंतर्राष्ट्रीय दबाव में आकर जीन बर्टरैंड एरिस्टाइट को सत्ता में वापस लाने पर विवश हो गये। इसके साथ ही अमेरिका ने अपने अवैध हितों के परिप्रेक्ष्य में हेटी पर हमला करके जीन बर्टरैंड एरिस्टाइट को सत्ता में पहुंचाया परंतु 10 वर्ष बाद वाशिंग्टन हेटी में विद्रोहियों का समर्थन करने लगा क्योंकि वह जीन बर्टरैंड एरिस्टाइट की कुछ नीतियों का विरोधी था। अंततः राजनीति के इतिहास में एक अभूतपूर्व कार्यवाही करके अमेरिकियों ने जीन बर्टरैंड एरिस्टाइट का राष्ट्रपति भवन के अंदर से अपहरण करके उन्हें देश के बाहर स्थानांतरित कर दिया और उनके स्थान पर दूसरे व्यक्ति को हेटी का राष्ट्रपति बना दिया। हेटी पर अमेरिका का बारम्बार आक्रमण इस बात का सूचक है कि अमेरिका को अंतरराष्ट्रीय कानूनों की कोई परवाह नहीं रहती है और वह दूसरे देशों के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप में किसी प्रकार के संकोच से काम नहीं लेता है।

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पहली सफ़र वर्ष 37 हिजरी क़मरी को इराक़ के सिफ़्फ़ीन नामक स्थान पर हज़रत अली अलैहिस्सलाम और मुआविया की सेनाओं के बीच युद्ध का निर्णायक चरण आरंभ हुआ। हज़रत अली के ख़लीफ़ा बनने के बाद मुआविया ने उनसे बैअत करने अर्थात उनके आज्ञापालन का वचन देने से इन्कार कर दिया और तीसरे ख़लीफ़ा की हत्या का बदला लेने के बहाने उनसे युद्ध आरंभ कर दिया। मुआविया को दूसरे ख़लीफ़ा ने शाम अर्थात वर्तमान सीरिया का राज्यपाल बनाया था दूसरे ख़लीफ़ा के बाद तीसरे ख़लीफ़ा ने भी उन्हें राज्यपाल के पदबर बाक़ी रखा। निधन के बाद वह पूरे इस्लामी जगत पर शासन के सपने देखने लगा था और साथ ही ख़लीफ़ा के पद को वह अपने परिवार से विशेष करना चाहता था। इसी कारण उसने हज़रत अली अलैहिस्सलाम के ख़िलाफ़ युद्ध शुरू कर दिया। इस युद्ध में जब मुआविया को पराजय होने लगी तो उसने अपने धूर्त मंत्री अम्र बिन आस के सुझाव पर आदेश दिया कि उसके सिपाही अपने भालों पर क़ुरआन उठा लें और यह नारा लगाएं कि हमारे बीच फ़ैसला ईश्वर करेगा। यह लोगों को धोखा देने और राजय बचाने के लिए उसकी चाल थी। हज़रत अली की सेना के सिपाही मुआविया की इस चाल में आ गए और उन्होंने लड़ने से इन्कार कर दिया। इस परिस्थिति के बाद और ख़वारिज के नाम से ख्याति पाने वाले इन सिपाहियों के दबाव के चलते, युद्ध का फ़ैसला पंचों के निर्णय पर छोड़े दिया गया।