रविवार - 20 सितम्बर
20 सितम्बर 1187, सलाहुद्दीन अय्यूबी ने अल-क़ुद्स (यरूशलम) पर निंयत्रण शुरू किया।
20 सितंबर वर्ष 2011 को भारतीय ज्ञानपीठ ने वर्ष 2009 के लिए 45वां ज्ञानपीठ पुरस्कार हिंदी के लेखक अमरकांत और श्रीलाल शुक्ल को संयुक्त रूप से प्रदान करने की घोषणा की। अमरकान्त का जन्म उत्तर प्रदेश के बलिया ज़िले के नगारा गांव में हुआ था। उन्होंने इलाहाबाद विश्व विद्यालय से बीए किया और उसके बाद उन्होंने साहित्यिक सृजन का मार्ग चुना। बलिया में पढ़ते समय उनका सम्पर्क स्वतन्त्रता आंदोलन के सेनानियों से हुआ। सन् 1942 में वे स्वतन्त्रता-आंदोलन से जुड़ गए। उनके साहित्य जीवन का आरंभ एक पत्रकार के रूप में हुआ और उन्होंने कई पत्र-पत्रिकाओं का संपादन भी किया। कहानीकार के रूप में उनकी ख्याति सन् 1955 में 'डिप्टी कलेक्टरी' कहानी से हुई। उनका पहला उपन्यास सूनी घाटी का सूरज सन 1957 में तथा पहला प्रकाशित व्यंग अंगद का पांव 1958 में प्रकाशित हुआ। श्री शुक्ल को भारत सरकार ने वर्ष 2008 में पद्मभूषण पुरस्कार से सम्मानित किया है।
20 सितंबर वर्ष 2011 को अफ़ग़ानिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति और तालिबान से वार्ता के लिए गठित सरकारी शांति परिषद के शीर्ष वार्ताकार बुरहानुद्दीन रब्बानी, काबुल में अमेरिकी दूतावास के समीप स्थित अपने निवास पर एक आत्माघाती आक्रमण में मारे गये। कहा जाता है कि आक्रमणकारी अपनी पगड़ी में विस्फोटक पदार्थ छिपाए था। वे वर्ष 1992 से 1996 तक, और 2001 में दूसरे कार्यकाल के राष्ट्रपति थे। रब्बानी जमीयत - ए इस्लामी अफ़ग़ानिस्तान के नेता थे। उन्होंने यूनाइटेड इस्लामिक फ्रंट UIFSA के राजनीतिक प्रमुख के रूप में भी काम किया। यह विभिन्न राजनीतिक दलो का एक गठबंधन था, जो अफगानिस्तान में तालेबान शासन के विरुद्ध लड़ा। उनकी सरकार को कई देशों और संयुक्त राष्ट्र द्वारा मान्यता प्राप्त थी।
20 सितंबर वर्ष 1933 को अग्रणी थियोसोफिस्ट, महिला अधिकारों की समर्थक, लेखक, वक्ता एवं भारत-प्रेमी महिला डाक्टर एनी बेसेन्ट का निधन हुआ। वे 1 अक्टूबर वर्ष 1847 ईसवी को लंदन में जन्मी थीं। सन 1917 में वे भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की अध्यक्षा बनीं। उनके पिता अंग्रेज थे और पेशे से डाक्टर। डा. बेसेन्ट पर उनके माता पिता के धार्मिक विचारों का गहरा प्रभाव था। अपने पिता की मृत्यु के समय डा. बेसेन्ट मात्र पाँच वर्ष की थी। आयु के अंतिम दिनो में एनी बेसेन्ट को गम्भीर आर्थिक संकट का सामना करना पड़ा और उन्हें स्वतंत्र विचार सम्बन्धी लेख लिखकर जीवन व्यतीत करना पड़ा।
मीर तक़ी मीर का पूरा नाम मुहम्मद तक़ी था और उनको ख़ुदाए सुख़न की उपाधि दी गयी थी। मीर की गज़लों के कुल ६ दीवान हैं । इनमें से कई शेर ऐसे भी हैं जो मीर के हैं या नहीं इस पर विवाद है । इसके अतिरिक्त कई शेर या कसीदे ऐसे हैं जो किसी और के संकलन में हैं किन्तु बहुत से लोगों का मानना है कि वे मीर के हैं। उनके शेरों की संख्या 15000 है । इसके अलावा कुल्लियात-ए-मीर में दर्जनोंमसनवियॉं, क़सीदे, और मर्सिये संकलित हैं ।
20 सितम्बर सन 1831 ईसवी को भाप से चलने वाली पहली बस बनाई गयी। 30 लोगों की क्षमता तथा अत्यंत धीमी गति से चलने वाली इस बस के अविष्कारक गोर्डन ब्रान्ज़ थे जिनका संबंध ब्रिटेन से था। आज पेट्रोल और डीज़ल से चलने वाली बसें जन परिवहन का एक महत्वपूर्ण साधन बन गयी हैं।

20 सितम्ब सन 1867 ईसवी को ऑस्ट्रिया में हंग्री के विलय के पश्चात फ्रांसवा जोज़फ औपचारिक रुप से ऑस्ट्रिया हंग्री के सम्राट बने। कई बार ऑस्ट्रिया व उस्मानी शासन के नियंत्रण में आने वाले देश हंग्री को, अंतत: वर्ष 1918 में प्रथम विश्व युद्ध में ऑस्ट्रिया की पराजय के पश्चात स्वतंत्रता मिली और इस देश में लोकतंत्र स्थापित हुआ।

20 सितम्बर सन 1979 ईसवी को केंद्रीय अफ़्रीक़ा के अत्याचारी शासक जॉन बदल बोकासा का निधन हुआ। उसने 1965 में विद्रोह द्वारा राष्ट्रपति डेविड दाको की सरकार का तख़्या पलट कर स्वयं को केंद्रीय अफ़्रीक़ा का आजीवन राष्ट्रपति घोषित किया। 1976 से बोकासा ने स्वयं को सम्राट कहलवाना आरंभ किया। 13 वर्षों के शासनकाल में उन्होंने असंख्य अपराध और जनसंहार किये। यहॉ तक की उन पर नरभक्षी होने का भी आरोप लगा। अंतत: 1979 में जनता के भारी विरोध के कारण उन्हें सत्ता से हटना पड़ा और डेविड दोबारा राष्ट्रपति बने।

20 सितम्बर सन 1810 को उर्दू भाषा के प्रख्यात कवि मीर तक़ी मीर का निधन हुआ। उनका जन्म 1722 में आगरा में हुआ था। मीर तक़ी मीर ने मुग़ल शासन के अंतिम काल में शायरी आरंभ की। मीर को उर्दू शायरी विशेषकर गज़ल का स्तंभ माना जाता है। एक टिप्पणीकर्ता का कहना है कि उर्दू ग़ज़ल का हर शेर मीर तक़ी मीर का है चाहे वो किसी ने भी कहा हो।
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30 शहरीवर सन 1366 हिजरी शम्सी को फ़ार्स की खाड़ी में राहत समाग्री ले जाने वाले ईरान के पानी के जहाज़ पर एक अमरीकी हैलिकाप्टर ने हमला कर दिया। ईरान की नौसेना से संबन्धित यह जहाज़ अन्तर्राष्ट्रीय जल में बंदर अब्बास से बूशहर की ओर जा रहा था। इसी बीच दो अमरीकी हैलिकाप्टरों ने बिना किसी चेतावनी के , बारूदी सुरंग बिछाने के बहाने हमला कर दिया। इस हमले में 4 लोग शहीद हुए जबकि 4 अन्य घायल हो गए। ईरान के जहाज़ पर हमले के बाद राष्ट्रसंघ में अमरीकी राजदूत ने कहा कि ईरान के जिस पानी के जहाज़ पर हमला किया गया वह बारूदी सुरंग बिछाने में व्यस्त था। हालांकि ईरान पर थोपे गए युद्ध के दौरान सद्दाम की निरंतर पराजय के परिणाम स्वरूप अमरीका ने 1366 में खुलकर ईरान के यात्री विमानों, तले कुओं, जेट्टियों और पानी के जहाज़ों पर हमले आरंभ कर दिये थे।
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2 सफर सन 121 हिजरी क़मरी को पैग़म्बरे इस्लाम (स) के पौत्र इमाम सज्जाद अ के पुत्र ज़ैद शहीद हुए। उन्होंने अत्याचारी उमवी शासन का मुक़ाबला किया और अपने दादा इमाम हुसैन अ के कर्बला अभियान की उपलब्धियों की रक्षा के लिए कड़ा संघर्ष किया। अंतत: वे कूफ़ा नगर में शहीद हुए। हज़रत ज़ैद अ के अभियान को भी कर्बला के आंदोलन का ही प्रतिफल माना जाता है क्योंकि 61 हिजरी क़मरी की कर्बला की घटना ने लोगों को सत्य के लिए लड़ना सिखा दिया था। इसी कारण कर्बला की घटना के बाद तव्वाबीन का आन्दोलन मुख़तारे सक़फ़ी का आन्दोलन और इसी प्रकार बहुत से अन्दोलन आरंभ हुए। इन सभी आन्दोलनों का एक ही लक्ष्य था अत्याचारी उमवी शासन का अंत करना।