सोमवार- 21 सितम्बर
21 सितम्बर 1866, ब्रिटेन के प्रसिद्ध लेखक व इतिहासकार हर्बर्ट जॉर्ज वेल्ज़ का जन्म हुआ।
21 सितम्बर 19 वर्ष ईसापूर्व को प्राचीन रोम और वर्तमान इटली देश के विख्यात शायर वर्जिल का निधन हुआ। वे 70 वर्ष ईसापूर्व एक ग्रामीण परिवार में जन्मे थे किंतु वर्जिल के पिता ने कठिनाइया सहन करके उनकी शिक्षा का प्रबंध किया। उन्होंने कुछ दिनों तक तो शायरी की दुसरी शैलियों का अनुसरण किया किंतु बाद में अपनी काव्य रचना एनाइड पर काम आरंभ किया। मौत ने उन्हें अनुमति नधी कि वे इस रचना को पूरा कर पाते किंतु फिर भी इसे महान साहित्यिक धरोहर माना जाता है। वर्जिल शायरी के साथ अच्छे चित्रकार, संगीतकार और गायक भी थे।
21 सितम्बर सन 1866 ईसवी को ब्रिटेन के प्रख्यात लेखक व इतिहासकार हर्बर्ट जॉर्ज वेल्ज़ का जन्म हुआ। उन्होंने लंदन विश्व विद्यालय में शिक्षा प्राप्त की और फिर अध्ययन से जुड़ गये। एच जी वेल्ज़ ने कुछ समय तक पत्रकारिता भी की परंतु जिस चीज ने उन्हें विश्व स्तर पर ख्याति दिलाई वो उनकी वैज्ञानिक व काल्पनिक कहानियां हैं। उन्होंने अपने राजनैतिक व सामजिक विचारों को भी कहानी के रुप में प्रस्तुत किया। वेल्ज़ का निधन सन 1946 में हुआ।

21 सितम्बर सन 1909 ईसवी को घाना के प्रख्यात राजनीतिज्ञ क़ेवाम नकरुमा का जन्म हुआ। उन्होंने अपना बचपन व जवानी बड़ी कठिन परिस्थितियों में बिताया किंतु आर्थिक कठिनाइयों के बावजूद उन्होंने अपनी शिक्षा जारी रखी और समाजशास्त्र में पी एच डी की डिग्री प्राप्त की। उन्होंने ब्रिटेन के विरुद्ध घाना के स्वतंत्रता संग्राम में सक्रिय रुप से भाग लिया। 1951 में घाना में होने वाले पहले चुनावों के बाद वे प्रधान मंत्री बने। क़ेवाम के नेतृत्व में घाना की जनता के संघर्षों के कारण वर्ष 1957 में इस देश को स्वतंत्रता मिली। क़ेवाम नकरुमा देहांत 1972 में हुआ।
21 सितम्बर सन 1964 ईसवी को माल्टा को स्वतंत्रता मिली। यह देश 1798 ईसवी में फ़्रांसीसी साम्राज्य के नियंत्रण में चला गया था और कुछ समय बाद ब्रिटेन ने इस द्वीप पर अधिकार कर लिया। 1921 में ब्रिटेन ने इस देश को स्वायत्तता दी किंतु इस देश की जनता पूर्ण स्वतंत्रता चाहती थी। 1958 में इस देश में स्वतंत्रता संग्राम में तीव्रता आ गयी और 1964 में आज ही के दिन यह देश स्वतंत्र हो गया।
21 सितम्बर सन 1832 ईसवी को ब्रिटेन के इतिहासकार और कवि वाल्टर स्काट का निधन हुआ। वे 1771 में जन्में थे क़ानून के विषय की शिक्षा लेने के बाद वे 14 वर्ष तक वकालत करते रहे। किंतु उन्हें साहित्य से अधिक लगाव था और वे आयु के अंतिम दिनों तक लिखते रहे। उन्होंने कई पुस्तकें लिखीं।

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31 शहरीवर सन 1359 हिजरी शम्सी को इराक़ की थल और वायु सेना ने ईरान पर व्यापक आक्रमण आरंभ किया । इससे पहले भी इराक़ ने कई बार ईरान की सीमा का उल्लंघन किया था।
इराक़ के इस व्यापक आक्रमण के कारण आरंभ में ईरान के कई सीमावर्ती नगर और गांव इराक़ के अधिकार में चले गये और सैकड़ों ईरानी महिलाएं बच्चे और पुरुष सद्दाम की वर्चस्ववादी नीति की भेंट चढ़े। अमरीका और ब्रिटेन सहित बहुत से पश्चिमी देश इराक़ को भरपूर समर्थन दे रहे थे ताकि ईरान की इस्लामी व्यवस्था का अंत हो जाए। किंतु वे अपने इस लक्ष्य की प्राप्ति में असफल रहे क्योंकि ईरानी जवानों ने इराक़ की अतिक्रमणकारी सेना का डटकर मुक़ाबला किया। अंतत: इराक़ी सेना निरंतर पराजित होने के बाद सन 1367 हिजरी शम्सी को अंतर्राष्ट्रीय सीमा तक पीछे हटने पर विवश हो गयी और संयुक्त राष्ट्र संघ के प्रस्ताव 598 के आधार पर दोनों देशों के बीच संघर्ष विराम हुआ।
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3 सफ़र सन 57 हिजरी क़मरी को कुछ इतिहासकारों के मतानुसार पैग़म्बरे इस्लाम के पौत्र इमाम मोहम्मद बाकिर (अ) का मदीना नगर में जन्म हुआ। ज्ञान और अध्यात्म संबंधी जो विशेषताएं पैग़म्बरे इस्लाम के परिवार में पायी जाती हैं वे इमाम मोहम्मद बाकिर(अ) में भी अपनी चरम सीमा पर थीं। उनके 19 वर्षीय इमामत काल में ऐसी सामाजिक परिस्थितियां उत्प्न्न हुई जिनका लाभ उठाकर इमाम मोहम्मद बाकिर अ ने इस्लामी शिक्षाओं तथा नियमों का भरपूर प्रचार प्रसार किया। इमाम बाकिर अ और उनके पुत्र इमाम सादिक़ अ के परिश्रमों के परिणाम स्वरूप ऐसे ऐसे प्रतिष्ठित और ज्ञानी लोग समाज को मिले जिन्होंने आधुनिक ज्ञानकी नींव रखी। इमाम मोहम्मद बाक़िर अ ज्ञान की सेवा के साथ ही अत्याचार के मुक़ाबले से भी नहीं चूके। इसी कारण सन 114 हिजरी क़मरी में शहीद कर दिए गये।
इमाम बाक़िर (अ) का एक कथन है कि जो व्यक्ति भी अच्छे शिष्टाचार और विनम्रता की विशेष्ता से सुसज्जित है वो वास्तव में हर अच्छाई का स्वामी है वो लोक परलोक दोनों में सम्पन्न और प्रसन्न रहेगा। और जिसके पास शिष्टाचार न हो उसका मार्ग बुराइयों की ओर होगा।