मंगलवार- 22 सितम्बर
22 सितम्बर सन 1828 ईसवी को वर्तमान दक्षिणी अफ़्रीक़ा में ज़ूलू शासन श्रृंखला के संस्थापक शाका को उनके दो सौतेले भाइयों ने मार डाला और उनमें से एक शासक बन गया।
शाका के काल में ज़ूलू क़बीला किसी भी अन्य काल से अधिक शक्तिशाली था। अंतत: 1880 ईसवी में ज़ूलू शासन काल का अंत हुआ और ज़ूलू शासन को ब्रिटेन के साथ युद्ध में पराजय हुई। इस समय भी दक्षिणी अफ़्रीक़ा में ज़ूलू एक जातीय अल्पसंख्यक के रुप में मौजूद हैं।
22 सितम्बर सन 1860 ईसवी को ब्रिटेन व फ़्रांस और चीन की सेनाओं के मध्य विजिंग युद्ध आरंभ हुआ। इस युद्ध में हथियारों के अभाव का शिकार चीनी सेना को पराजय हुई और ब्रिटेन व फ़्रांस ने विजिंग को लूट लिया।
22 सितम्बर सन 1960 ईसवी को अफ़्रीक़ा महाद्वीप के उत्तर पश्चिम में स्थित माली देश को स्वाधीनता मिली। माली में लगभग दो हज़ार वर्ष पूर्व एक बड़ी सभ्यता का पता चलता है। किंतु इस क्षेत्र पर आठवीं शताब्दी से सोलहवीं शताब्दी तक सूडान का अधिकार रहा 19वीं शताब्दी से इस देश पर फ़्रांस का वर्चस्व स्थापित हुआ। यहॉ तक कि सन 1958 में इस देश को स्वायत्तता और 1960 में स्वाधीनता प्राप्त हुई।

22 सितम्बर सन 1862 ईसवी को अमरीकी राष्ट्रपति, अब्राहाम लिंकन ने घोषणा की कि पहली जनवरी सन 1863 से अवज्ञाकारी राज्य के सभी दास स्वतंत्र हो जाएंगे।
22 सितम्बर सन 1955 ईसवी को पूर्वी ब्रिटेन में पहली बार टीवी पर विज्ञापन प्रसारित किया गया। टीवी का सर्वप्रथम विज्ञापन टूथपेस्ट के लिए था।
22 सितंबर वर्ष 2011 को भारतीय योजना आयोग ने सर्वोच्च न्यायालय में दाखिल हलफनामे में शहरों में 965 रुपए और गावों में 781 रुपए प्रति महीना खर्च करने वाले व्यक्ति को गरीब मानने से इनकार करते हुए उन्हें गरीबी रेखा से नीचे के परिवारों को मिलने वाली सरकारी सुविधाओं के अयोग्य बताया।
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4 सफ़र सन 1363 हिजरी क़मरी को ईरान के विख्यात धर्मगुरू व विचारक आयतुल्लाह मीर्ज़ा मोहम्मद अली शाहाबादी का 77 वर्ष की आयु में निधन हुआ। आयतुल्लाह मीर्ज़ा मोहम्मद अली शाहाबादी उच्च धार्मिक शिक्षा प्राप्त करने के बाद धर्म के प्रचार प्रसार और समाज सुधार में लीन हो गए। वह दर्शन शास्त्र और धर्मशास्त्र के प्रख्यात गुरुओं में गिने जाते थे। उन्होंने क़ुम नगर के शिक्षा केन्द्र में रहकर बड़ी मूल्यवान सेवा की और अनेक शिष्यों का प्रशिक्षण किया। उनके शिष्यों ने ज्ञान के क्षेत्र में बड़ी ख्याति प्राप्ति की और अपने गुरू की प्रतिष्ठा बढ़ाई। उनके शिष्यों में से एक इमाम ख़ुमैनी भी थे। इमाम ख़ुमैनी अपने गुरू के गुणों को बयान करते हुए कहते थे कि मैंने कभी इतनी कोमल और महान आत्मा वाला व्यक्ति नहीं देखा। आयतुल्लाह शाहाबादी की अनेक पुस्तकें हैं जिनमें अलक़ुरआन वल इतरत, अलइंसान वल ख़तरात और मिफ़ताहुस्सआदह का नाम लिया जा सकता है।