Sep २१, २०१६ ०७:२० Asia/Kolkata
  • बुधवार- 23 सितम्बर

23 सितम्बर सन 1932 ईसवी को सउदी अरब देश की स्थापना हुई तथा अब्दुल अज़ीज़ बिन सउद इस देश के नरेश बने

 यह देश तीसरी हिजरी शताब्दी अर्थात नवीं ईसवी शताब्दी में अब्बासी शासकों के नियंत्रण से निकल गया। कई शताब्दियों तक वहॉ अशांति रही।

16वीं शताब्दी में उसमानी शासन ने हिजाज़ पर अधिकार कर लिया 18वीं ईसवी शताब्दी के मध्य से सउद वंश ने उस क्षेत्र पर शासन स्थापित करने का प्रयास आरंभ किया बीसवीं ईसवी शताब्दी के आरंभ तक यह प्रयास बहुत तेज़ हो गया प्रथम विश्व युद्ध के दौरान सउद वंश के लोगों के ब्रिटेन से संबंध अच्छे थे विश्व युद्ध की समाप्त होने तथा उस्मानी साम्राज्य के टूट जाने के बाद वर्तमान सउदी अरब भी एक स्वाधीन देश हो गया। इस प्रकार सउद परिवार के लोगों ने इस देश पर अपना शासन स्थापित किया।

इस देश की आबादी लगभग 21 लाख है तथ क्षेत्रफल 2 लाख 40 हज़ार वर्ग किलोमीटर है यह देश दक्षिण पश्चिम एशिया में फ़ार्स खड़ी और लाल सागर के बीच स्थित है।

इसी देश के पवित्र नगर मक्का में पैग़म्बरे इस्लाम का जन्म हुआ था।

 

23 सित्म्बर सन 1860 ईसवी को जर्मनी के प्रसिद्ध दार्शनिक आर्थर शोपनहावर का निधन हुआ। वे वर्ष 1788 ईसवी में पैदा हुए थे। वे गोएटे और हेगल जैसे दर्शनशास्त्रियों के काल के दार्शनिक थे दार्शनिकों में वे अफ़लातून या प्लेटो और कैंन्ट से विशेष रुप से प्रभावित थे। विश्व संकल्प और प्रदर्शन उनकी प्रसिद्ध पुस्तकों में हैं।

 

23 सितम्बर सन 1991 ईसवी में अरमीनिया ने पूर्व सोवियत संघ से अपनी स्वाधीनता की धोषणा की । यह देश 6 सौ वर्ष ईसा पूर्व से ईरान के अधिकार में था इसका इतिहास उतार चढ़ाव से भरा हुआ है कभी यह देश स्वतंत्र रहा तो कभी दूसरे देशों के कब्ज़े में ईरान और उसमानी शासनी शासन के बीच युद्ध के दौरान अर्मीनिया का अधिकांश भाग ईरान के नियंत्रण से निकल कर उसमानी शासन के क़ब्ज़े में चला गया बाद में 19वीं ईसवी शताब्दी में ईरान और उसमानी शासन के साथ रुस के युद्ध के दौरान इसका अधिकांश भाग रुस के नियंत्रण में चला गया। वर्ष 1918 में रुस में कम्यूनिस्ट क्रान्ति के बाद अरमीनिया ने अपनी स्वाधीनता की घोषणा की किंतु दो वर्ष बाद फिर से सोवियत संघ से जुड़ गया। 1980 के दशक में रुस के राजनैतिक परिवर्तनों तक यह देश रुस द्वारा नियंत्रित गणराज्यों में से एक था किंतु 1990 के दशक के आरंभ में एक जनमत संग्रह में इस देश की 90 प्रतिशत जनता ने अर्मीनिया की स्वाधीनता का समर्थन किया इस प्रकार से यह देश रुस से अलग हो गया। यह एशिया के पश्चिम में और क़फ़क़ाज़ क्षेत्र में स्थित है 30 हज़ार वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल वाले इस देश की सीमाएं ईरान आजर बाईजान और तुर्की से मिलती हैं।

 

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2 मेहर सन 1357 हिजरी शम्सी को इराक़ की बास पार्टी की सरकार के सुरक्षा बलों ने ईरान के शाह के इशारे पर इराक़ के नजफ़ नगर में इमाम ख़ुमैनी के घर का परिवेष्टन कर लिया। इराक़ी सरकार ने ईरान के अत्याचारी शाह के साथ अपने अच्छे संबंधों के दृष्टिगत इस्लामी क्रान्ति के संस्थापक इमाम ख़ुमैनी से कहा कि वे पत्रकारों को कोई साक्षात्कार न दें कोई बयान जारी न करें तथा शाह के विरुद्ध कोई शब्द न कहें किंतु इमाम ख़ुमैनी ने इराक़ी सरकार के उत्तर में कहा जहॉ भी रहुँगा अपने धार्मिक कर्तव्य का पालन करुँगा। इसके कुछ ही समय बाद सरकार ने उन्हें इराक़ छोड़ देने पर विवश कर दिया। इस प्रकार से इमाम ख़ुमैनी के पेरिस पलायन करने तथा इस्लामी क्रान्ति की सफलता की परिस्थितियां और अनुकूल हुई।

 

2 मेहर सन 1367 हिजरी शम्सी को ईरान के प्रसिद्ध चित्रकार और मिनीएचर का निधन हुआ। सन 1292 हिजरी शम्सी को तेहरान में उनका जन्म हुआ था।

उन्होंने अपने बहुत से शिक्षार्थितों को प्रशिक्षित किया जो आज बड़े मिनीएचर रिस्टो में गिने जाते हैं।

 

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5 सफ़र सन 551 हिजरी क़मरी को इराक़ के उत्तरी नगर मूसिल में विख्यात गणितज्ञ, चिकित्सक और धर्मगुरु कमालुद्दीन अबू इमरान का जन्म हुआ। वे इब्ने यूनुस के नाम से प्रसिद्ध हुए। धार्मिक शिक्षा की प्राप्ति के बाद उन्होंने गणित का ज्ञान प्राप्त करना आरंभ किया। गणित की व्यापक जानकारी प्राप्त कर लेने के बाद वे इसी विषय के पढ़ाने लगे। इब्ने यूनुस अपने समय के विख्यात विद्वानों में गिने जाते थे। वे एक मुसलमान धर्मगुरु थे किंतु उन्हें ईसाई और यहूदी धर्मों के बारे में पूर्ण ज्ञान था यहॉ तक कि बहुत से ईसाई और यहूदी अपने बहुत से धार्मिक मामले को उनसे समझते थे। इब्ने यूनुस को साहित्य का भी ज्ञान था साथ ही वे एक अच्छे कवि तथा खगोल शास्त्री भी थे।

 

5 सफ़र सन 1372 हिजरी क़मरी को ईरान के दक्षिणी नगर बहबहान में प्रसिद्ध मुस्लिम धर्मगुरु अली मासूमी का निधन हुआ। वे सन 1288 हिजरी क़मरी में पैदा हुए थे। उन्होंने इराक़ के पवित्र नगर नजफ़ में वर्षों तक इस्लामी विषयों की शिक्षा प्राप्त की। वे एक दृढ़ संकल्प वाले व्यक्ति थे।