Sep २४, २०१६ ०८:१५ Asia/Kolkata
  • गुरुवार - 24 सितम्बर

24 सितम्बर 1805 ईसवी को फ़्रांस के तानशाह नेपोलियन बोनापार्ट की सैनिक कार्रवाई समाप्त हुई।

यह कार्रवाई ऑस्ट्रिया के आक्रमण का सामना करने के लिए की गयी थी। फ़्रांस के 2 लाख सैनिकों ने ऑस्ट्रिया की सेना को भारी पराजय का सामना करवाया। ऑस्ट्रिया हालॉकि स्वयं को फ्रांस का मित्र बताता था किंतु वह रुस और ब्रिटेन से गुप्त वार्ताएं करके नेपोलियन को हराने का इरादा रखता था।

 

24 सितम्बर सन 1939 ईसवी को जर्मनी के बमबार विमानों ने पोलैन्ड की राजधानी वार्सा पर आक्रमण आरंभ किया। द्वितीय विश्व युद्ध के आरंभ में होने वाली यह बमबारी तीन दिनों तक जारी रही। इस बमबारी के बाद वार्सा की जनता ने 11 दिनों तक कड़ा संघर्ष किया किंतु अंतत: उसे जर्मनी की सेना के सामने हथियार डालना पड़ा। हिटलर ने नाज़ी सेना के कमांडरों को आदेश दिया था कि जिस प्रकार से भी संभव हो, इस शहर पर क़ब्ज़ा करें। वार्सा नगर पर बमबारी में कम से कम 15 हज़ार लोग मारे गये थे।

 

 

24 सितम्बर सन 1974 ईसवी को अफ्रीकी देश गिनी बीसाओ ने पुर्तग़ाल से अपनी स्वाधीनता की घोषणा की। वर्ष 1446 ईसवी में पुर्तग़ाल के युवराज प्रिंस हेनरी और उनके साथियों ने इस देश की खोज की जिसके बाद यह देश पुर्तग़ाल का उपनिवेश बन गया। 17वीं और 18वीं शताब्दी में पुर्तग़ाल का भाग हो चुका यह देश योरोप वालों के दास व्यापार के केंद्रों में था। 1960 के दशक के आरंभ से इस देश की जनता ने पुर्तग़ाल के विरुद्ध अपना संघर्ष तेज़ कर दिया। यहॉ तक कि सन 1970 ईसवी में इस देश का दो तिहाई भाग स्वतंत्रता प्रेमियों के अधिकार में आ गया। पुर्तगाल ने अंतत: वर्ष 1974 में इस देश को स्वाधीन कर दिया। यह देश उत्तर पश्चिमी अफ़्रीक़ा महाद्वीप में अटलॉटिक महासागर के तट पर स्थित है। इसके पड़ोस में सेनेगाल और गिनी जैसे देश हैं।

***

3 मेहर सन  1321 हिजरी शम्सी को ईरान के प्रसिद्ध कवि और साहित्यकार मोहम्मद यूसुफ़ ज़ादे का हमदान में निधन हुआ। वे ग़म्मामे हमदानी के नाम से प्रसिद्ध हुए। उन्हें तर्क शास्त्र दर्शनशास्त्र और साहित्य विशेष कर फार्सी शायरी में दक्षता प्राप्त थी। इसी के साथ वे ईरान की संविधान क्रान्ति के साहसी संघर्षकर्ता थे। किंतु जब इस क्रान्ति में अत्याचारियों ने भी वास्तविक नेताओं के कॉधे से कॉधा मिला लिया तो गम्मामे हमदानी ने राजनीति से सन्यास ले लिया और सामाजिक तथा साहित्यिक गतिविधियों में संलग्न हो गये।

 

***

6 सफर सन 634 हिजरी क़मरी को ईरान के प्रसिद्ध दार्शनिक, खगोल शास्त्री और चिकित्सक कुतबुद्दीन महमूद शीराज़ी का ईरान के शीराज़ नगर में जन्म हुआ। आरंभ में उन्होंने चिकित्सा विज्ञान की शिक्षा ली और अपने पिता की मृत्यु के पश्चात उनके स्थान पर शीराज़ के अस्पताल में उपचार में व्यस्त होने के दौरान दर्शन शास्त्र संबंधी पुस्तकों का गहन अध्ययन किया। इसी प्रकार खगोल शास्त्र से रुचि होने के कारण इस विषय की जानकारी के लिए भी वे प्रयत्नशील रहे। उन्होंने अपनी आयु में बहुत सी यात्राएं की और विभिन्न स्थानों पर विद्वानों तथा बुद्धिजीवियों से मिलकर उनके अनुभवों से लाभ उठाने का प्रयास किया। उनका निधन 710 हिजरी क़मरी में हुआ।