Sep २४, २०१६ ०९:१६ Asia/Kolkata
  • शुक्रवार- 25 सितम्बर

1972 को जनमत संग्रह द्वारा नॉर्वे की जनता ने यूरोपीय समुदाय की सदस्यता स्वीकार करने से इनकार कर दिया।

25 सितम्बर सन 1294 ईसवी को ब्रिटेन के दार्शनिक और रसायनशास्त्री रोजर बेकन का निधन हुआ। उनका जन्म 1214 ईसवी में हुआ था। उन्हें हेब्रू ग्रीक और अरबी भाषा का पूरा ज्ञान था। साथ ही उन्हें मौतिक विज्ञानों से विशेष लगाव था। रसायन शास्त्र के क्षेत्र में उन्होंने पुस्तकें कुछ लिखी हैं।

25 सितम्बर सन 1997 ईसवी को ज़ायोनी शासन की गुप्तचर सेवा मोसाद ने एक अन्य वरिष्ठ फ़िलिस्तीनी नेता पर जानलेवा आक्रमण किया फ़िलिस्तीन के इस्लामी प्रतिरोध आंदोलन हमास के राजनैतिक कार्यालय के अध्यक्ष खालिद मशअल पर मोसाद के दो सदस्यों ने ज़ाईन की राजधानी अम्मान में आक्रमण करके घायल कर दिया इस घटना  के बाद उक्त दोनों जासूस पकड़ लिए गये जिससे इस्राईल की गुप्तचर सेवा की क्षमता पर प्रशनचिन्ह लग गये कैनेडा ने भी इस पर अपनी अप्रसन्नता व्यक्त की क्योंकि यह दोनों कैनेडा के पासपोर्ट पर जार्डन गये थे। इस कार्रवाई की विफलता के बाद जार्डन और कैनेडा के साथ इस्राईल के संबंधों में कड़वाहट आ गयी थी।

25 सितम्बर सन 1969 में इस्लामी कान्फेंस संगठन का गठन हुआ जिसे ओआईसी कहा जाता है। यह संयुक्त राष्ट्र संघ के बाद दूसरा सब से बड़ा अंतरराष्ट्रीय संगठन है। इस संगठन में 57 सदस्य हैं जो विश्व के चार महाद्वीपों में फैले हुए हैं। अब इस संगठन का नाम इस्लामी सहयोग संगठन रख दिया गया है। मुसलमानों के पहले क़िबला मस्जिदुल अक्सा में आग लगाए जाने की घटना के बाद 25 सितम्बर को मोरक्को में इस्लामी देशों का एतिहासिक सम्मेलन हुआ जिसमें इस संगठन के गठन का एलान किया गया।

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4 मेहर सन 1361 हिजरी शम्सी को ईरान के कुशल लिपिकार रज़ा माफ़ी का निधन हुआ। वे मशहद नगर में पैदा हुए थे। उन्होंने लिपि के गुरु उस्ताद एतेसामी से शिक्षा ली। वे पहले ऐसे लिपिकार थे जिसकी लिपि को फ़्रेम में सजा कर घरो में लगाया गया। उनकी लिपि की कई बार प्रदर्शनी भी लग चुकी है।

 

4 मेहर सन 1370 हिजरी शम्सी को प्रसिद्ध धर्म गुरु सैयद मुसतफ़ा मूसवी खुन्सारी का निधन हुआ। उनका जन्म क़ुम नगर में हुआ था मूसवी ख़ुन्सारी ने शीया समुदाय के विख्यात धर्मगुरु आयतुल्ला बुरुजर्दी से शिक्षा ली बाद में स्वयं भी एक महान धर्म गुरु के रुप में उभरे।

 

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7 सफर सन 128 हिजरी क़मरी को पैग़म्बरे इस्लाम (स) के पौत्र इमाम मूसा काज़िम (अ) का जन्म हुआ। उन्होंने 20 वर्ष की आयु तक अपने पिता इमाम जाफ़र सादिक़ अ की सेवा में उपस्थित रहकर अपने व्यक्तित्व को संवारा और उनके ज्ञान के सागर से मोती चुने। अपने पिता की शहादत के पश्चात इमाम मूसा काज़िम (अ) ने 35 वर्ष तक इस्लामी समाज का मार्गदर्शन किया और इस मार्ग में अनगित कठिनाइयां झेलीं। इमाम मूसा काज़िम (अ) की आयु के आरंभिक वर्षों में सत्ता  परिवर्तन हो रहा था। सरकार उमवी शासकों के हाथ से निकलकर अब्बासी शासकों के हाथ में जा रही थी। इमाम अ की 55 वर्षीय आयु में एक के बाद एक 5 अब्बासी शासकों ने सत्ता संभाली और उनमें से कोई भी न्याय मांगने वालों की आवाज़ सुनने को तैयार न हुआ। सबने अपने स्वार्थ के लिए दूसरों का दमन किया। अब्बासी शासकों ने पैग़म्बरे इस्लाम के परिजनों की जनता में लोकप्रियता को देखते हुए सदा उन्हें अपने लिए ख़तरा समझा इसी लिए उन्हें विभिन्न मार्गों से प्रताड़ित किया किंतु पैग़म्बरे इस्लाम के परिजनों ने मार्गदर्शन का दायित्व निभाने में कभी संकोच से काम न लिया।