रविवार- 27 सितम्बर
1833, भारत के प्रसिद्ध समाज सुधारक राजा राममोहन राय का निधन हुआ।
1833, भारत के प्रसिद्ध समाज सुधारक राजा राममोहन राय का निधन हुआ। इटली, जर्मनी और जापान के बीच इस समझौते के आधार पर तीन राजधानियां रोम, बर्लिन और टोकयो तीन केंद्रों के रुप में एक दूसरे के संपर्क में हो गयीं। इस प्रकार से यह तीनों सरकारें द्वितीय विश्व युद्ध के मुख्य धुव्र के नाम से प्रसिद्ध हुई। जापान का अमरीका पर आक्रमण और अमरीका का द्वितीय विश्व युद्ध में कूद पड़ना इसी समझौते के परिणाम हैं।
27 सितम्बर सन 1941 ईसवी को रुस पर अतिक्रमण करते हुए जर्मनी को एक बड़ी सफलता मिली। दक्षिणी मोर्चों पर सोवियत संघ की सेना पर उस समय जर्मनी की सेना का व्यापक आक्रमण हुआ, जब वो थक चुकी थी तथा उसका अभियान भी समाप्त हो रहा था इस घटना में बहुत बड़ी संख्या में रुसी सैनिक गिरफतार कर लिए गये तथा सोवियत संघ के लगभग 12 सौ टैंक और 5 हज़ार 4 सौ तोपें नष्ट हो गयीं या फिर जर्मन सेना ने हथिया लीं। किंतु कुछ दिनों बाद सोवियत संघ में शीतकाल के आ जाने तथा तीव्र वर्षा के आरंभ हो जाने के बाद जर्मनी की सेना की स्थिति खराब हो गयी। फिर सोवियत संघ की सेना ने उस पर व्यापक आक्रमण आरंभ कर दिया।
27 सितम्बर सन 1949 ईसवी को चीन का भीड़ भाड वाला शहर बीजिंग इस देश की राजधानी बन गया। यह ऐतिहासिक नगर पूर्वी चीन में स्थित है। जो चीन के राजनैतिक आर्थिक तथा सांस्कृतिक केंद्रों में गिना जाता है। चीन में माओ सरकार के सत्ता में पहुँचने और च्यानकाय चेक की सरकार के चीन से ताइवान स्थानान्तरित हो जाने के बाद बीजिंग को चीन की राजधानी बना दिया गया।

27 सितबर वर्ष 1972 को भारतीय गणितज्ञ एस. आर. रंगनाथन का निधन हुआ। रंगनाथन भारत के पुस्तकालय जगत के जनक थे जिन्होने कोलन वर्गीकरण तथा क्लासिफाइड केटलाग कोड बनाया। पुस्तकालय विज्ञान को महत्व प्रदान करने तथा भारत मे इसका प्रचार प्रसार करने मे उनका सक्रिय योगदान था।
27 सितम्बर सन 1996 ईसवी को अफ़ग़ानिस्तान की राजधानी काबुल पर तालेबान ने क़ब्ज़ा कर लिया। यह गुट सन 1994 में अस्तित्व में आया और अमरीका के समर्थन तथा पाकिस्तान के राजनैतिक एवं सैनिक सहयोग से धीरे धीरे इस गुट ने अफ़ग़ानिस्तान के दक्षिणी और पश्चिमी क्षेत्रों पर क़ब्ज़ा कर लिया और फिर पूर्वी अफ़ग़ानिस्तान में स्थित काबुल की ओर क़दम बढ़ाए। काबुल पर क़ब्ज़ा कर लेने के बाद तालेबान ने इस्लाम के नाम पर अपनी ग़लत व कठोर नीतियों को लागू किया अंतत: अक्तूबर सन 2001 में अमरीका और अफ़ग़ानिस्तान के संयुक्त इस्लामी मोर्चे ने तालेबान का तख्ता पलट दिया।

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9 सफर सन 37 हिजरी क़मरी को पैग़म्बरे इस्लाम के साथी और हज़रत अली अ के निकट मित्र हज़रत अम्मार यासिर, हज़रत अली अ और मुआविया की सेनाओं के बीच होने वाले सिफ़फ़ीन नामक युद्ध में हज़रत अली अ की ओर से लड़ते हुए शहीद हुए। वे 57 वर्ष हिजरत पूर्व जन्में थे उनके पिता यासिर और उनकी माता सुमैया इस्लाम के मार्ग में शहीद होने वाले पहले दो लोग थे। अम्मार यासिर हमेशा पैग़म्बरे इस्लाम(स) के साथ रहे। उन्होंने इस्लाम की रक्षा में कई लड़ाइयां भी लड़ीं।
सिफ़्फ़ीन की लड़ाई में उनकी शहादत एक दुखद घटना थी किंतु इससे पैग़म्बरे इस्लाम स की वर्षों पहले की भविष्यवाणी सही सिद्ध हो गयी। पैग़म्बरे इस्लाम स ने कहा था हे अम्मार मेरे बाद एक फ़ितना पैदा होगा, जब ऐसा हो तो अली और उनका साथ देने वाले गुट के साथ रहना क्योंकि सत्य अली के साथ और अली सत्य के साथ हैं। हे अम्मार तुम अली के साथ रहकर दो गुटों से युद्ध करोगे एक गुट अत्याचारियों का और दूसरा बैअत तोड़ने वालों अर्थात विश्वासघात करने वालों का होगा। फिर एक विद्रोही गुट तुमको शहीद कर देगा। पैग़म्बरे इस्लाम स का यह कथन इस बात को पूर्ण रुप से स्पष्ट करता है कि सिफ़फ़ीन में हज़रत अली के मुक़ाबले में युद्ध करने वाले असत्य पर थे।