Sep २६, २०१६ ०९:०५ Asia/Kolkata
  • हरमैन मिलवेल
    हरमैन मिलवेल

1838, भारत में मुग़ल वंश के अंतिम सम्राट बहादुरशाह ज़फ़र, अपने पिता की मृत्यु के बाद सिंहासन पर बैठे।

28 सितम्बर सन 1891 ईसवी को अमरीकी लेखक हरमैन मिलवेल का देहान्त हुआ। उनका जन्म वर्ष 1819 में हुआ था। उन्हें समुद्री यात्रा से बहुत लगाव था। एक समुद्री यात्रा के दौरान उनका जहाज़ डूब गया और उन्होंने एक ऐसे द्वीप में शरण ली जहॉ के लोग नरभक्षा थे मिलवेल ने इस पूरी घटना और इस द्वीप से अपने फ़रार के बाद एक पुस्तक लिखी जिससे उन्हें बड़ी ख्याति मिली। उनकी एक अन्य महत्वपुर्ण पुस्तक मोबी डेक है। इसके अतिरिक्त भी उन्होंने कई पुस्तकें लिखीं हैं।

28 सितंबर वर्ष 1907 को भारत के प्रसिद्ध स्वतंत्रता सेनानी सरदार भगत सिंह का जन्म हुआ। उनके पिता का नाम सरदार किशन सिंह और माता का नाम विद्यावती कौर था। अमृतसर में 13 अप्रैल, 1919 को हुए जलियाँवाला बाग हत्याकाण्ड ने भगत सिंह की सोच पर गहरा प्रभाव डाला था। लाहौर के नेशनल कॉलेज़ की पढ़ाई छोड़कर भगत सिंह ने भारत की स्वतंत्रता के लिये नौजवान भारत सभा की स्थापना की थी। काकोरी काण्ड में राम प्रसाद बिस्मिल और अशफ़ाकुल्लाह ख़ां सहित ४ क्रान्तिकारियों को फाँसी व 16 अन्य को कारावास की सज़ाओं से भगत सिंह इतने अधिक उद्विग्न हुए कि पण्डित चन्द्रशेखर आज़ाद के साथ उनकी पार्टी हिन्दुस्तान रिपब्लिकन ऐसोसिएशन से जुड गये और उसे एक नया नाम दिया हिन्दुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन दिया। भगत सिंह ने राजगुरु के साथ मिलकर 17 दिसम्बर 1928 को लाहौर में सहायक पुलिस अधीक्षक रहे अंग्रेज़ अधिकारी जे० पी० सांडर्स को मारा था। इस कार्रवाई में क्रान्तिकारी चन्द्रशेखर आज़ाद ने उनकी पूरी सहायता की थी। क्रान्तिकारी साथी बटुकेश्वर दत्त के साथ मिलकर भगत सिंह ने अलीपुर रोड दिल्ली स्थित ब्रिटिश भारत की तत्कालीन सेण्ट्रल एसेम्बली के सभागार में 8 अप्रैल 1929 को अंग्रेज़ सरकार को जगाने के लिये बम और पर्चे फेंके थे। बम फेंकने के बाद वहीं पर दोनों ने अपनी गिरफ्तारी भी दी। जिसके फलस्वरूप उन्हें 23 मार्च वर्ष 1931 को उनके दो अन्य साथियों, राजगुरु और सुखदेख के साथ फाँसी पर लटका दिया गया।

28 सितम्बर सन 1970 ईसवी को मिस्र के राष्ट्रपति जमाल अब्दुन्नासिर का निधन हुआ। उनका जन्म 1916 ईसवी को हुआ। वे वर्ष 1948 में अरब देशों और इस्राईल के बीच पहले युद्ध में शामिल थे। उन्होंने वर्ष 1952 ईसवी में जनरल नजीब के साथ मिलकर मिस्र के राजशाही शासन के विरुद्ध सैनिक विद्रोह करके इस शासन व्यवस्था को समाप्त कर दिया और इसके दो वर्ष बाद जनरल नजीब को सत्ता से हटाकर स्वंय मिस्र के राष्ट्रपति बन गये। उन्होंने मिस्र में बहुत से सुधार किये वर्ष 1956 ईसवी में स्वेज़ नहर का राष्ट्रीय करण किया जिसके बाद फ़्रांस ब्रिटेन और ज़ायोनी शासन के सैनिकों ने मिस्र पर आक्रमण कर दिया। जिसका अब्दुन्नासिर ने डटकर मुक़ाबला किया उनकी इस साहसी कार्रवाई के कारण उन्हें अरब जगत में मुख्य स्थान प्रप्त हो गया। अब्दुन्नासिर ने वर्ष 1958 ईसवी में यमन और सीरिया के साथ मिलकर संयुक्त अरब गणराज्य की स्थापना की जो केवल तीन साल तक चला।

वर्ष 1967 ईसवी में ज़ायानी शासन के हाथों मिस्र की पराजय अब्दुन्नासिर की एक बड़ी विफलता थी इसके, तीन वर्ष बाद उनका निधन हो गया।

28 सितंबर वर्ष 1977 को भारत के प्रसिद्ध कवि सुमित्रानंदन पंत का निधन हुआ। वे हिन्दी साहित्य में छायावादी युग के चार प्रमुख स्तंभो में से एक हैं। उनका जन्म 20 मई वर्ष 1900 को अलमोड़ा ज़िले के कौसानी नामक गांव में हुआ था। उनकी मुख्य रचनाओं में वीणा, पल्लव, युगांत और ग्राम्या का नाम लिया जा सकता है।

28 सितम्बर सन 1996 ईसवी को संयुक्त राष्ट्र संघ की सुरक्षा परिषद ने एक प्रस्ताव पारित करके ज़ायोनी शासन से मस्जिदुल अकसा के प्रांगण में सुरंग खोदने की प्रक्रिया को रोकने की मांग की। इस प्रस्ताव के मसौदे में इस सुरंग के खोदने की आलोचना भी की गयी थी किंतु अमरीका के विरोध के बाद इस भाग को निकाल दिया गया। ज़ायोनी शासन ने 23 सितम्बर सन 1996 ईसवी को यह सुरंग खोदनी आरंभ की जिसके बाद ज़ायोनी शासन के सुरक्षा बलों और फ़िलिस्तीनियों के बीच रक्त रंजित झड़पें हुईं सुरक्षा परिषद के बारम्बार विरोध के बावजूद जायोनी शासन ने मस्जिदुल अक़सा के प्रांगण में सुरंग खोदने का काम जारी रखा।

 

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7 मेहर सन 1360 हिजरी शम्सी को ईरान के मुसलमान धर्म गुरु और संघर्ष कर्ता सैयद अब्दुल करीम हाशिमी नेजाद को मशहद नगर में आतंकवादी गुट एम के ओ के आतंकियों ने शहीद कर दिया। उनका जन्म सन 1312 हिजरी शम्सी में हुआ था। उन्होंने आयतुल्लाह बुरुजर्दी तथा इमाम ख़ुमैनी जैसे महान धर्मगुरुओं से शिक्षा ली। ईरान की इस्लामी क्रान्ति के दौरान वे अग्रणी लोगों में रहे जिसके चलते उन्हें कई बार जेल जाना पड़ा। इस्लामी क्रान्ति की सफलता के पश्चात हाशिमी नेज़ाद लोगों की शिक्षा- दीक्षा मे लग गये और इस क्षेत्र में उन्होंने प्रभावशाली योगदान दिया। वे एक अच्छे लेखक और कुशल राजनीतिज्ञ थे। उन्होंने कई पुस्तकें भी लिखीं।

 

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10 सफ़र वर्ष 1382 हिजरी क़मरी को ईरान के प्रसिद्ध वरिष्ठ धर्मगुरू सैयद अब्दुल हादी शीराज़ी का स्वर्गवास हुआ। उनके बचपने में ही उनके पिता का देहान्त हो गया था और उनका पालन पोषण उनके निकटवर्ती मिरज़ाए शीराज़ी के यहां हुआ और आरंभ से ही वे इस्लामी सिद्धांतों से परिचित हुए। उन्होंने आख़ुन्द ख़ुरासानी और अल्लामा यज़दी जैसे अपने काल के प्रसिद्ध धर्मगुरूओं से शिक्षा प्राप्त की और अध्यात्म और ज्ञान के शिखर पर पहुंच गये। आयतुल्लाह सैयद अब्दुल हादी शीराज़ी कई वर्षों तक पवित्र नगर नजफ़े अशरफ़ के धार्मिक शिक्षा केन्द्र के प्रमुख रहे। उन्होंने कई महत्त्वपूर्ण पुस्तकें लिखी हैं जिनमें दारुल इस्लाम सबसे प्रसिद्ध है।

 

10 सफर सन 1263 हिजरी क़मरी को ईरान के विख्यात विद्वान और कुशल लेखक मुल्ला जाफ़र शरीअतमदार तेहरानी का निधन हुआ। वे वर्ष 1197 हिजरी क़मरी में तेहरान में जन्मे थे। उन्होंने अपना बचपन तथा युवाकाल शिक्षा प्राप्ति में बिताया। उन्होंने इराक़ जाकर वरिष्ठ धर्मगुरुओं से भी शिक्षा ली। उसमानी सेना कमांडर दाऊद पाशा द्वारा इराक़ के कर्बला नगर का परिवेष्टन किये जाने के बाद वे वहॉ से स्वेदश लौट आए। उन्होंने वर्षों तक न्यायाधीश का कार्यभार संभाला साथ ही उन्होंने अपनी साहित्यिक गतिविधियां भी जारी रखीं किंतु उनकी ख्याति का मुख्य कारण उनके द्वारा इस्लामी विषयों जैसे फिक़ह उसूले फ़िक़ह हिकमत, अख़लाक़ आदि से संबंधित लिखी गयी पुस्तकें हैं उनकी पुस्तकों में अलमसाबीह, अश्शारेउल कबीर सफ़ीनतुन्नजात अलबराहीनुल क़ातेआ आदि का नाम लिया जा सकता है।