गुरुवार - पहली अक्तूबर
पहली अक्तूबर वर्ष 1684 ईसवी को फ़्रांस के प्रसिद्ध कवि और लेखक पीयर कारनेली का 78 वर्ष की आयु में निधन हो गया।
उन्हें नाटक लिखने में बहुत रुचि थी और उन्होंने इस कार्य में इतनी प्रगति की कि आगे चलकर उन्हें फ़्रांस में नाटक लिखने के मैदान का पितामह और क्लासिकल नाटक का संस्थापक कहा जाने लगा। कारनेली ने अपने शेरों में साधारण और सरल भाषा का प्रयोग किया है इसीलिए उनके बहुत से शेर लोगों में प्रवचन के रूप में प्रचलित है। उन्होंने इसी प्रकार कई प्रसिद्ध पुस्तकें भी लिखी हैं।
पहली अक्तूबर वर्ष 1949 को चीन जनवादी गणराज्य की स्थापना हुई और माओत्से तुंग उसके राष्ट्रपति बने। चीन प्राचीन सभ्यता के स्वामी देशों में से है। सोलहवीं शताब्दी के अंत में यह देश यूरोपी सरकारों के प्रभाव में था। चीनियों ने पश्चिमी साम्राज्य विशेषकर ब्रिटेन से स्वतंत्रता के लिए कई युद्ध किए किन्तु उन्हें हर युद्ध में पराजित होना पड़ा। वर्ष 1912 में सोन यात सेन के नेतृत्व में मन्चू की सरकार को गिराने के लिए होने वाली क्रांति सफल हुई और वे राष्ट्रपति चुने गये। वर्ष 1931 में चीन पर जापान का आक्रमण आरंभ हुआ और यह ऐसी स्थिति में था कि कम्युनिस्ट लोग माओत्से तुंग और राष्ट्रवादी चियान काय चेक के नेतृत्व में सत्ता प्राप्त करने के लिए युद्धरत थे। वर्ष 1945 में द्वितीय विश्व युद्ध में जापान के हथियार डाल देने के बाद जापान और चीन के मध्य जारी युद्ध भी समाप्त हो गया। चीन की धरती से जापानी सैनिकों के निकलने के बाद स्वतंत्र हुए क्षेत्रों पर कम्युनिस्टों और सरकारी सेना का क़ब्ज़ा हो गया जो एक दूसरे से युद्धरत थे। यह युद्ध कम्युनिस्टों की सफलता के साथ समाप्त हो गया और वर्ष 1949 को माओ ने औपचारिक रूप से चीन जनवादी गणराज्य की स्थापना की घोषणा की। इस घटना के बाद चियान काय चेक ने जिन्हें अमरीका की ओर से भरपूर समर्थन प्राप्त था, चीन के दक्षिण पूर्वी क्षेत्र में स्थित ताइवान को अपनी राजधानी बनाया और वहॉ स्वतंत्र सरकार का गठन किया ताकि चीन की ओर वापसी की भूमिका प्रशस्त हो किन्तु यह लक्ष्य उनकी आयु के अंतिम वर्षों तक प्राप्त न हो सका। विश्व की सबसे बड़ी जनसंख्या चीन की है और रूस,मंगोलिया, उत्तरी कोरिया, अफ़ग़ानिस्तान, पाकिस्तान, भारत, भूटान, म्यांमार, लाओस और वियतनाम इसके पड़ोसी देश हैं।

पहली अक्तूबर वर्ष 1960 को नाइजेरिया ब्रिटेन से स्वतंत्र हुआ और आज के दिन को वहॉ राष्ट्रीय दिवस के रूप में मनाया जाता है। पंद्रहवी शताब्दी में पुर्तगाल और उसके बाद की शताब्दी में ब्रिटेन ने नाइजीरिया पर क़ब्ज़ा कर लिया। सत्रहवीं शताब्दी में यह देश दासों के व्यापार के केन्द्रों में से एक बन गया। उन्नीसवीं शताब्दी के अंत में ब्रिटेन के सैनिकों ने पूरे नाइजेरिया का अतिग्रहण कर लिया। वर्ष 1914 में ब्रिटेन ने नाइजेरिया को अपना उपनिवेश बना लिया। चालीस वर्ष बाद इस देश ने अपनी स्वाधीनता की घोषणा की और राष्ट्रमंडल की सदस्यता ग्रहण कर ली। वर्ष 1960 में नाइजीरिया की जनता ने एक जनमत संग्रह में भाग लेकर ब्रिटेन से स्वतंत्र सरकार के पक्ष में मतदान किया। नाइजीरिया का क्षेत्रफल 923768 वर्गकिलोमीटर है और यह अफ़्रीक़ा महाद्वीप के उत्तर और एटलांटिक महासागर के तट पर स्थित है। नाइजर, कैमरून और बेनीन इसके पड़ोसी देश हैं।

पहली अक्तूबर वर्ष 1985 को ज़ायोनी सेना के युद्धक विमानों ने ट्यूनीशिया में पीएलओ के कार्यालय पर आक्रमण किया। इस आक्रमण में सत्तर लोग हताहत और बहुत से घायल हुए थे। पीएलओ ने वर्ष 1982 में ज़ायोनी सेना के लेबनान स्थित पीएलओ कार्यालय पर निरंतर आक्रमण के बाद अपने कार्यालय को ट्यूनीशिया स्थानांतरित कर दिया था। ज़ायोनी शासन के युद्धक विमानों के इस आक्रमण से जनता में तेलअवीव के विरुद्ध घृणा में वृद्धि हुई। इन सबके बावजूद अमरीका का भरपूर समर्थन, इस शासन के विरुद्ध सुरक्षा परिषद की गंभीर कार्यवाही में सबसे बड़ी रुकावट है।
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10 मेहर सन 13 हिजरी शम्सी को ईरान में खुरासान क्षेत्र के सीमा सुरक्षा बल के कमांडर मोहम्मद तक़ी ख़ान पेसियान की तत्कालीन सरकार के समर्थकों ने हत्या कर दी। स्वतंत्रता प्रेमी विचाराधार रखने के कारण उनका लोगों में बड़ा प्रभाव था वर्ष 1299 हिजरी शम्सी में रज़ाख़ान के विद्रोह के बाद श्री पेसियान ने ख़ुरासान प्रांत के सीमा सुरक्षा बल की कमान संभाली फिर कुछ समय बाद उन्होंने इस प्रांत के प्रशासन को भी अपने हाथ में लिया। ईरान में विदेशियों के बढ़ते प्रभाव और देश की बुरी स्थिति के दृष्टिगत उन्होंने ईरान की जनता को ब्रिटेन के वर्चस्व से निकालने तथा ईरानी जनता की स्थिति को बेहतर बनाने के लिए केंद्रीय सरकार से संघर्ष आरंभ कर दिया। इस प्रकार से ख़ुरासान प्रांत में सैनिक अधिकारियों का विद्रोह आरंभ हुआ। उस समय ख़ुरासान प्रांत पूरी तरह मोहम्मद तक़ी पेसियान के हाथ में था। उन्होंने केंद्रीय सरकार के सैनिकों का डटकर मुक़ाबला किया और अंतत: इसी प्रकार की एक झड़प में उनकी हत्या कर दी गयी उनकी हत्या के साथ ही केंद्र की अत्याचारी सरकार के विरुद्ध सेनाधिकारियों का विद्रोह भी समाप्त हो गया।
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13 सफर 303 हिजरी को इस्लामी जगत के प्रसिद्ध मोहद्दिस अर्थात पैग़म्बरे इस्लाम और उनके पवित्र परिजनों के कथनों को बयान करने वाले अबू अब्दुर्रहमान अहमद बिन शोएब नेसाइ का निधन हो गया। उनका जन्म 220 हिजरी कमरी में ईरान के पूर्वोत्तर में स्थित खुरासान के एक गांव में हुआ और वह जवानी में मिस्र चले गये और वहीं रहने लगे। वह मिस्र में ही फिक्ह और हदीस के दक्ष गुरू बन गये। नेसाई ने दमिश्क की यात्रा के दौरान पैग़म्बरे इस्लाम के पवित्र परिजनों के सदगुणों को बयान किया जिसके कारण विरोधियों ने उन्हें कई बार मारा- पीटा। अंत में वह पवित्र नगर मक्का चले गये और वहीं पर वह रहने लगे। उन्होंने कई किबातें लिखी हैं जिनमें "ख़साएसे अमीरूल मोमिनीन अली" का नाम लिया जा सकता है। इसी प्रकार उनकी एक किताब का नाम "सोनने नेसाई" है।