हालीवुड डिप्लोमेसी या राजनैतिक हस्तक्षेप
इस समय हालीवुड अमरीका के विदेश मंत्रालय, युद्ध मंत्रालय पेंटागोन और ख़ुफ़िया एजेंसी सीआईए से बढ़कर वाशिंग्टन की नीतियों को आगे ले जाने में प्रभावी भूमिका निभा रहा ह।
हालीवुड अपने पटकथा लेखकों, फ़िल्म निर्माताओं, निर्देशकों और अभिनेताओं की मदद से दुनिया के विभिन्न भागों में अपने दूत भेजता है जो अमरीकी स्वार्थ पूरे करने में भूमिका निभाते हैं।
अमरीका का विदेश नीति विभाग इस समय हज़ारों लोगों को वैज्ञानिक, सांस्कृतिक, सामाजिक क्षेत्रों में तथा सैकड़ों थिंक टैंकों और अनुसंधान केन्द्रों को प्रयोग कर रहा है और उनके माध्यम से अपने स्वार्थ पूरे कर रहा है। इस बीच लेखक, फ़िल्म निर्माता, निर्देशक और अभिनेता भी हैं जो अपने पेशे से मिलने वाली ख्याति की मदद से राजनैतिक गतिविधियों में भी शामिल हो जाते हैं और अमरीका की हस्तक्षेपपूर्ण नीतियों के लिए माहौल तैयार करते हैं। इन कलाकारों के राजनीति में लिप्त होने का एक उदाहरण ख़ुद हालीवुड है।
मार्च 2012 में जार्ज क्लोनी की गिरफ़तारी की ख़बर ने पूरे अमरीका की जनता को स्तब्ध कर दिया। हालीवुड का यह निर्देशक और अदाकार अपने पिता के साथ वाशिंग्टन में सूडान के दूतावास के सामने प्रदर्शन के दौरान गिरफ़तार किया गया। सवाल यह है कि जार्ज क्लोनी जैसे व्यक्ति का सूडान से क्या लेना देना है।
सूडान अफ़्रीक़ा महाद्वीप का तीसरा सबसे बड़ा देश है जहां मुसलमान बड़ी संख्या में रहते हैं। इस देश के राष्ट्रपति का नाम उमर अलबशीर है। लाल सागर के तट पर स्थित होने के कारण सूडान का स्ट्रैटेजिक महत्व भी है। इस द श में मुसलमान बहुसंख्यक हैं जो देश के उत्तरी भाग में बेस हुये हैं। ईसाई यहां अल्पसंख्या में हैं जो अन्य अल्पसंख्यको के साथ मिलकर दक्षिणी सूडान में रहते हैं जबकि वहां भी मुसलमानों की आबादी है। इस विशेष स्ट्रैटेजिक स्थिति के कारण तथा सूडान के क़बीलों की आपसी लड़ाई के चलते यह देश पश्चिम की विस्तारवादी नीतियों के निशाने पर है।
सूडान में दक्षिणी सूडान के क़बीलों और सरकार के बीच 50 साल पहले स्वाधीनता के लिए लड़ाई शुरू हुई। चूंकि इस देश में तेल और गैस के भड़े भंडार हैं इस लिए पश्चिम की साम्राज्यवादी सरकारों की लोभी निगाहें इस देश पर हमेशा से लगी रही हैं। पश्चिमी सरकारों ने दक्षिणी सूडान के क़बीलों को हर तरह के हथियारों से लैस कर दिया। जिसके कारण इस देश में शुरू होने वाला गृह युद्ध कई दशकों तक जारी रहा। इस लंबी लड़ाई में दक्षिणी सूडान के क़बीले कुछ क्षेत्रों को अपने क़ब्ज़े में कर लेने में सफल हुए जिसके बाद बहुराष्ट्रीय कंपनियों ने संसाधनों को लूटने का काम शुरू कर दिया।
पश्चिमी सरकारों ने इसके बाद सूडान के विभाजन की साज़िश रची जिसके तहत विद्रोहियों ने हथियार डाले और पश्चिम ने राजनैतिक दबाव डाला तथा सूडान सरकार को दक्षिणी सूडान की स्वाधीनता के विषय पर इस क्षेत्र में जनमत संग्रह कराने पर विवश कर दिया। यह ख़बर आते ही अमरीका ने सूडान में बहुत बड़े पैमाने पर गतिविधियां शुरू कर दीं और हालीवुड के योद्धा इस संदर्भ में सक्रिय हो गए।
अमरीका ने इस प्रकरण में जो बड़े क़दम उठाए उनमें एक जासूसी उपग्रह का प्रयोग जिसका ख़र्च जार्ज क्लोनी ने उठाया। क्लोनी उन लोगों में सबसे आगे थे जिन्होंने जनमत संग्रह से पहले वाशिंग्टन द्वारा वातावरण बनाने में प्रभावी भूमिका निभाई। क्लोनी इस बारे में कहते हैं कि मैं यह चाहता था कि जितना मैं लोगों के सामने हूं उमर अलबशीर भी उतना ही लोगों की नज़रों के सामने रहें।
जार्ज क्लोनी इससे काफ़ी पहले से राजनीति में सक्रिय थे और वह अपनी अंतर्राष्ट्रीय छवि का प्रयोग करके विश्व जनमत का ध्यान उन मुद्दों की ओर केन्द्रित करवाते थे जिनको वाशिंग्ट उछालना चाहता था। इस बार उन्होंने सूडान को अपने निशाने के रूप में चुना था। वैसे इस प्रकार की गतिविधियां अपने आप में बुरी तो नहीं हैं विशेषकर इस लिए भी कि सूडान ऐसा देश है जो महिलाओं और बच्चों पर अत्याचार के मामलों के कारण विश्व संस्थाओं के ध्यान का केन्द्र बनना चाहिए था लेकिन समस्या तब शुरू होती है जब लोगों का ध्यान सूडान की जनता से सहानुभूति के लिए नहीं बल्कि अमरीका के विस्तारवादी अभियान का रास्ता साफ़ करने के लिए सूडान की ओर केन्द्रित कराया जाता है।
जार्ज क्लोनी ने अपनी योजनाओं से उत्तरी सूडान की सरकार पर लगाए गए अमरीका के प्रतिबंधों को तार्किक क़दम बनाकर पेश किया जबकि यह ज़मीनी सच्चाई है कि सूडान पर लगाए गए प्रतिबंधों का सीधा नुक़सान इस देश की जनता को उठाना पड़ रहा है। हालांकि हालीवुड के यह अभिनेता अमरीकी सरकार तथा विश्व संस्थाओं को योरोपीय संघ की सहायता और सूडान का मुद्दा हल करने में मदद के लिए तैयार कर सकते थे।
सूडान के संबंध में क्लोनी की गतिविधियां यहीं तक सीमित नहीं हैं। उन्होंने वर्ष 2010 में सूडान में खेल का अंत नाम की एक फ़िल्म बनाई और बाराक ओबामा के सामने भाषण दिया और उनसे मांग की कि सूडान सरकार के मानवाधिकार हनन का नोटस लिते हुए उस पर रोक लगाएं। इसके अतिरिक्त उन्होंने हालीवुड के एक कैम्पेन के माध्यम से सूडान में अमरीका के हस्तक्षेप के लिए माहौल बनाया। लंदन में रहने वाले सूडानी सिंगर इमैनुएल जाल भी आलीशा कीज़ और पीटर गैबरियल के साथ मिलकर इस कैंपेन में शामिल हो गए। यह भी मशहूर गायक हैं। इन तीनों गायकों ने संयुक्त राष्ट्र संघ के पूर्व महासचिव कूफ़ी अन्नान, अमरीका के पूर्व राष्ट्रपति जिमी कार्टर के साथ मिलकर हम शांति चाहते हैं कि नाम से एक वीडियो संगीत तैयार किया जिसके माध्यम से सूडान के लोगों को यह संदेश दिया कि उन्हें अपने देश में जनमत संग्रह कराने का अधिकार है।
दक्षिणी सूडान के जनमत संग्रह को जनवरी 2011 में अंतिम रूप दिया गया और इस जनमत संग्रह से जो आंकड़े मिले उसके अनुसार दक्षिणी सूडान के 98 प्रतिशत लोगों ने इस क्षेत्र की सूडान से आज़ादी के पक्ष में मतदान किया। इस तरह दक्षिणी सूडान अफ़्रीक़ा का 55वां और संयुक्त राष्ट्र संघ का 196वां सदस्य देश बना।
कई साल बीत जाने के बाद अब इस कलाकार और सूडान के मामलों की ख़बरे सुर्खियों में आई हैं। जार्ज क्लोनी और अमरीकी अदाकार और फ़िल्म निर्माता डान चीदल ने दक्षिणी सूडान के युद्ध क बारे में हाल ही में अपनी रिपोर्ट वाशिंग्टन पोस्ट में प्रकाशित की है। बताया जाता है कि यह रिपोर्ट दक्षिणी सूडान में दो साल तक जारी रहने वाली जांच का नतीजा है। इस रिपोर्ट में दक्षिणी सूडान के राष्ट्रति तथा उनके सहयोगी और अंतर्राष्ट्रीय बैंकों, बहुराष्ट्रीय कंपनियों, खनिज क्षेत्र में काम करने वाले कंपनियों तथा रक्षा सौदों में सक्रिय दलालों की आपसी सांठगांठ से पर्दा उठाया गया है और बताया गया है कि इस सांठगांठ ने किस तरह दुनिया की एक अति रक्तरंजित लड़ाई की आग भड़का दी।
इस रिपोर्ट में कहा गया है कि दक्षिणी सूडान दुनिया का सबसे नया देश है जो भयानक गृह युद्ध में जल रहा है। इस युद्ध ने हज़ारों लोगों की जानें ले ली हैं और बहुत से लोग विस्थापित हो गए हैं। युद्ध के माहौल में महिलाओं से दुराचार किया गया है और बच्चों को सैनिक के रूप में भर्ती किया गया है और लड़ाई के मोर्चों पर भेजा गया है। शांति सेना की तैनाती हुई है लेकिन उनका दायरा बहुत सीमित है। मानवीय सहायता का रास्ता रोक दिया गया है तथा सहायता कर्मियों पर हमला किया जा रहा है। इस देश में 50 लाख से अधिक लोग भुखमरी का शिकार हैं उन्हें चिकित्सा सहायता की ज़रूरत है। इस रिपोर्ट के लेखकों का कहना है कि इन सारी चीज़ों से युद्धोन्मादियों को मौक़ा मिलता है कि वह देश के प्राकृतिक संसाधनों को लूटें।
इस रिपोर्ट के एक बड़े भाग में यह बताया गया है कि किस तरह युद्ध लड़ रहे नेता इन परिस्थितियों का लाभ उठाकर विदेशों में संपत्तियां ख़रीद रहे हैं, लग्ज़री कारों में घूमते हैं तथा बहुराष्ट्रीय कंपनियों के शेयर ख़रीदते हैं। कासीनो और एयरलाइनों में भी इन नेताओं ने पूंजीनिवेश किया है।
रोचक बात यह है कि वही क्लोनी जो कुछ साल पहले तक दक्षिणी सूडान को सूडान से अलग करने की बड़ी वकालत करते थे और इसे इस क्षेत्र की जनता की मुक्ति का एक मात्र मार्ग मानते थे अब इस कोशिश में हैं कि अंतर्राष्ट्रीय स्तर की कोई एसी व्यवस्था हो जिससे दक्षिणी सूडान के नेताओं का रुजहान बदले और वहां शांति स्थापित हो।
सूडान की घटनाओं के बारे में हमने जो बातें आपको बताईं उनसे यह पता चलता है कि इस समय साफ़्ट वार की ताक़त बहुत बढ़ चुकी है। आज के युग में संस्कृति का लोगों के जीवन में महत्व बहुत बढ़ गया है। लेकिन खेद की बात है कि बहुत से लोग अमरीका की संस्कृति और वहां के मीडिया से आस लगाए बैठे हैं। अमरीका की विदेश नीति में इस देश की संस्कृति का प्रसार भी शामिल है।
जाने पहिचाने और अंतर्राष्ट्रीय ख्याति रखने वाले लोगों के माध्यम से होने वाली कूटनीति से अमरीका को यह आसानी हो जाती है कि वह विश्व की जनता को ग़ैर पश्चिमी आंदोलनों से जुड़ने से रोक लेता है। लेकिन इसके लिए वह क्या तरीक़ा अपनाता है? यदि कोई आपसे कहे कि मैं आपकी मदद करना चाहता हूं कि आप उसकी यह बात स्वीकार कर लेंगे बल्कि संभव है कि आप उसे साधन भी उपलब्ध करा दें। लेकिन यदि कोई यह कहे कि मैं आपको यह सिखाना चाहता हूं कि आप अपने काम कैसे करें तो अधिक संभावना है कि आप उसका विरोध करेंगे। यही हस्तक्षेप और सहायता का अंतर है।
साफ़्ट वार में विदित रूप से मदद दिखाई देने वाला हस्तक्षेप किया जाता है। अमरीका हालीवुड के माध्यम से जो हस्तक्षेप करता है वह इसी साफ़्ट वार का एक भाग है। हालीवुड दुनिया के लोगों को यह समझाता है कि वह अपने जीवन के किन भागों को अमरीकी रंग में ढाल लें। इस उद्योग से जुड़े मुख्य लोग ख़ुद को हर क्षेत्र का विशेषज्ञ जानते हैं और वह इस देश के अधिकारियों के राजनैतिक हथकंडे बन गए हैं। इससे पता चलता है कि अमरीका का नर्म युद्ध उसकी विदेश नीति से अलग नहीं है। अमरीका हालीवुड के माध्यम से जो कुछ कर रहा है वह उससे बहुत आसान है जो उसने सैनिक चढ़ाई से किया है या करने की चेष्टा में रहा है।