Feb २४, २०१६ १०:३७ Asia/Kolkata

24 फ़रवरी सन 1525 ईसवी को पुर्तगाल के विख्यात कवि लुईस वास कैमुएन्स का पुर्तगाल के लिसबन नगर में जन्म हुआ।

वे कवि होने के साथ ही एक कुशल योद्धा भी थे। उनकी प्रसिद्ध काव्य रचना का नाम लोज़याद्स है। सन 1580 में उनका निधन हो गया।

 

24 फ़रवरी सन 1848 ईसवी को फ़्रांस की जनता के विद्रोह और इसके परिणामस्वरूप इस देश के अत्याचारी नरेश लुई फ़िलिप के अपदस्थ होने के बाद अंनरिम सरकार या फ़्रांस के गणराज्य का दूसरा चरण आरंभ हुआ। फ़्रांस में इस सरकार को पत्रकारों की सरकार के नाम से भी याद किया जाता है। क्योंकि फ़्रांस के लेखक और कवि अलफ़ांन्स डोला मार्टिन के नेतृत्व में 15 पत्रकार मिलकर इस सरकार को चला रहे थे। इसी वर्ष के दिसम्बर महीने में फ़्रांस में चुनाव आयोजित हुए और नेपोलियन बोनापार्ट के भाई लुई नेपोलियन राष्ट्रपति पद के लिए चुने गये। किंतु उन्होंने सन 1852 में लोकतांत्रिक शासन व्यवस्था के समर्थकों का बुरी तरह से दमन किया और स्वयं को फ़्रांस का सम्राट घोषित कर दिया। इस प्रकार से फ़्रांस में दूसरे चरण का लोकतंत्र समाप्त हो गया।

 

24 फ़रवरी सन 1949 ईसवी को ज़ायोनी शासन और मिस्र के बीच संघर्षविराम समझौता हुआ।

उल्लेखनीय है कि 1948 में अवैध अधिकृत फ़िलिस्तीन में ज़ायोनी शासन की स्थापना से ही मिस्र ने भी दूसरे अरब देशों के कदम से कदम मिलाकर इस्राईल का मुकाबला किया। किंतु अरब देशों की सेनाओं के संगठिन न होने और आधुनिक शस्त्रों के अभाव के कारण ज़ायोनी शासन ने जिसे पश्चिमी शक्तियों का समर्थन प्राप्त था मिस्र और लेबनान के अंदर अपनी सेनाएं घुसा दीं। अंतत: वर्ष 1949 में यह युद्ध थमा और संयुक्त राष्ट्र संघ के हस्तक्षेप से इसी वर्ष के फ़रवरी महीने में मिस्र और इसराईल के बीच शत्रुता समाप्त करने के समझौते पर हस्ताक्षर हुए और दूसरे अरब देशों ने भी इस पर अपनी सहमति व्यक्त की। इस समझौते के आधार पर पश्चिमी फ़िलिस्तीन की गज़्ज़ा पट्टी मिस्र के अधिकार में चली गयी।

 

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5 इस्फंद सन 597 हिजरी क़मरी को ईरान के अति महान विद्धान नसीरुद्दीन तूसी का जन्म हुआ था।  उनका नाम अबू जाफ़र मुहम्मद बिन मुहम्मद था।  उनको तूसी तथा उस्तादुल बशर की उपाधि मिली थी।  अपने काल के प्रचलित ज्ञानों में नसीरुद्दीन तूसी ने दक्षता प्राप्त कर ली थी।  अपने ज्ञान के बलबूते उन्होंने बहुत ही कम समय में विश्व ख्याति अर्जित की थी।  जब मंगोलों ने हमला किया तो हालकू ख़ान ने शेख तूसी को अपने नियंत्रण में रखा।  उन्होंने अपने प्रभाव के कारण बहुत से क्षेत्रों को हलाकू के हमले से बचाया जिसके कारण हज़ारों लोगों की जान और उनका माल सुरक्षित रहा।  बग़दाद पर विजय और अब्बासी शासन श्रंखला की समाप्ति के बाद उनको मराग़े वेधशाला बनाने की ज़िम्मेदारी सौंपी गई।  सन 657 हिजरी क़मरी में उन्होंने यह काम शुरू किया।  नसीरूद्दीन तूसी ने मराग़े वेधशाला के लिए एक बहुत बड़े पुस्तकालय का प्रबंध किया जिसके लिए बग़दाद, शाम, उत्तरी अफ़्रीका और ईरान तथा उसके निकटवर्ती क्षेत्रों से किताबें इस पुस्तकालय पहुंचवाई थीं।  75 वर्ष की आयु में सन 672 हिजरी क़मरी में नसीरुद्दीन तूसी का देहान्त हो गया।

 

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29 जमादिस्सानी सन 441 हिजरी क़मरी को पांचवी हिजरी शताब्दी के एक बड़े मोहद्दिस अर्थात पैग़म्बरे इस्लाम व उनके पवित्र परिजनों के कथनों के ज्ञानी मोहम्मद बिन अली सूरी का साठ वर्ष की आयु में स्वर्गवास हुआ। उन्होंने 418 हिजरी क़मरी में बग़दाद की यात्रा की थी और फिर वहीं बस गए। इस दौरान उन्होंने अपने समकालीन विद्वानों से पैग़म्बरे इस्लाम व उनके परिजनों के कथन सुने और उनको किताब का रूप दिया। उन्होंने ख़तीब बग़दादी से अनेक बार भेंट की और उनके हवाले से अनेक हदीसें नक़्ल की हैं। ख़तीब बग़दादी ने मोहम्मद बिन अली सूरी के बारे में अपने विचार इन शब्दों में व्यक्त किए हैः मैंने बग़दाद में हदीसों के ज्ञान में किसी को उनसे अधिक दक्ष नहीं पाया।

 

29 जादिस्सानी सन 709 हिजरी क़मरी को वरिष्ठ धर्म गुरू और साहित्यकार इब्ने अताउल्ला का निधन हुआ। वे शैखे कबीर के नाम से प्रसिद्ध थे। उनका जन्म क़ाहेरा के एक धार्मिक परिवार में हुआ था। वे बड़ी ही रोचक शैली में धार्मिक शिक्षा देते और कठिन बातें सरलता से लोगों को समझा देते। साथ ही उन्होंने अपनी नसीहत और उपदेश के माध्यम से तत्कालीन अधिकारियों को रास्ता दिखाया उनका मानना था कि शासकों को सही रास्ते पर लाना धर्मगुरुओं का काम है।