शहाबुद्दीन सोहरवर्दी-9
हमने कहा कि ईरान के महाबुद्धिजीवी शैख शहाबुद्दीन अबूल फतूह यहिया बिन हबश सोहरवर्दी 12वीं ईसवी शताब्दी के प्रसिद्ध दर्शनशास्त्री और रहस्यवादी हैं और उनकी प्रसिद्ध उपाधि शेख इश्राक़ है।
महान ईरानी दर्शनशास्त्री और रहस्यवादी सोहरावर्दी महत्वपूर्ण इस्लामी दर्शनशास्त्र यानी इश्राक़ दर्शनशास्त्र की बुनियाद रखने वाले हैं।
हमने कहा कि उनका जन्म 549 हिजरी क़मरी में ज़न्जान के निकट सोहरावर्द गांव में हुआ था और वर्तमान सीरिया के हलब क्षेत्र के धर्मशास्त्रियों ने एक षडयंत्र रचा जिसके कारण 38 वर्ष की उम्र में 587 हिजरी क़मरी में सलाहुद्दीन अय्यूबी के आदेश से उनकी हत्या कर दी गयी। सोहरावर्दी ने कम आयु में ही लगभग 50 महत्वपूर्ण रचनाएं यादगार के रूप में छोड़ी हैं। इन रचनाओं में कुछ ऐसी हैं जिनमें सोहरावर्दी ने इशारों में बात की है। अध्ययनकर्ताओं का मानना है कि यह रचनायें सोहरावर्दी की वास्तविक तस्वीर को हमारे सामने पेश करती हैं और पिछले कई कार्यक्रमों में हमने इस महान ईरानी बुद्धिजीवी की कुछ फारसी रचनाओं से आपको परिचित कराया और उनकी समीक्षा की और उसके बाद हमने यह बताया कि पश्चिमी बुद्धिजीवियों और दर्शनशास्त्रियों के निकट उनका क्या स्थान है और वे किस सीमा तक इस महान ईरानी बुद्धिजीवी, दर्शनशास्त्री और रहस्यवादी को पहचानते हैं इसके लिए हमने फ्रांस और जर्मनी की सैर भी की।
पश्चिम और अंग्रेजी भाषा जानने वालों में जिन लोगों ने महान ईरानी रहस्यवादी सोहरावर्दी के बारे में अध्ययन किया है उनमें अग्रणी ईरानी मूल के सैयद हुसैन नस्र हैं। सैयद हुसैन नस्र ने वर्ष 1950 के अंतिम दशकों में पश्चिम को सोहरावर्दी से परिचित कराने का कार्य आरंभ किया। इस संबंध में उनकी रचनाएं इससे बहुत अधिक हैं जिन सबका उल्लेख यहां पर किया जा सके। यहां पर हम समकालीन बुद्धिजीवी और विद्वान सैयद हुसैन नस्र की कुछ रचनाओं से आपको परिचित करा रहे हैं। सैयद हुसैन नस्र ने सोहरावर्दी और उनके विचारों से परचित कराने के लिए बहुत लेख व किताबें लिखे हैं। सैयद हुसैन नस्र अपने एक लेख में उप महाद्वीप और पश्चिम में सूफी विचार फैलने के बारे में बात करते हैं। हुसैन नस्र ने इस्लामी दर्शनशास्त्र के इतिहास के बारे में भी एक लेख लिखा है जिसे एम.एम. शरीफ़ के प्रयास से अंग्रेज़ी भाषा में प्रकाशित किया गया और इसे सैयद हुसैन नस्र का पहला व्यापक और विस्तृत लेख समझा जाता है।
इसी प्रकार” से हकीम मुसलमान” अर्थात तीन मुसलमान हकीम नामक की एक किताब है और इस किताब में सैयद हुसैन नस्र से जो भाग संबंधित है उसमें और इसी प्रकार “सोहरावर्दीः शैख़ शहीद और पीर मकतबे इश्रराक़ व इरफान” नामक जो लेख है उसमें सोहरावर्दी को पश्चिम से परिचित कराने का प्रयास किया गया है। यह लेख वर्ष 1960 में प्रकाशित किया गया।
मजीद फख्री एक अन्य ईरानी हैं जिन्होंने सोहरावर्दी के बारे में अरबी भाषा में विभिन्न लेख लिखे हैं। वह अपनी किताब” तारीख़े फल्सफ़ये इस्लामी” में संक्षेप में सोहरावर्दी का उल्लेख करते हैं। इसी प्रकार उन्होंने अपनी किताब” फल्सफा,जज़मियत, व तासिरे अंदीशये यूनानी दर इस्लाम” के एक भाग को उस टीका- टिप्पणी से विशेष किया है जो सोहरावर्दी ने मश्शाई विचार धारा के दर्शनशास्त्रियों पर किया है। ब्रिटिश दर्शनशास्त्री रिचर्ड नेटन ने Richard netton अपनी कुछ किताबों में न केवल सोहरावर्दी की ओर संकेत किया है बल्कि सोहरावर्दी ने अफलातून के दर्शन शास्त्र को जिस नये रूप में पेश किया उसकी उन्होंने समीक्षा की है और उन्हें एक सूफी दर्शनशास्त्री बताया है।
अल्लामा इक़बाल ने भी अंग्रेज़ी भाषी लोगों में सोहरावर्दी को पहचनवाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उन्होंने “सैरे फल्सफ़ा दर ईरान” नाम की अपनी किताब के एक भाग को सूफीवाद से विशेष किया है और उसमें उन्होंने सोहरावर्दी और इश्राक़ी दर्शनशास्त्र के बारे में की बात है।
सूफीवाद के बारे में सोहरावर्दी की फारसी की जो अधिकांश किताबें हैं पहली बार हारवर्ड विश्व विद्यालय के प्रोफेसर और शोधकर्ता विलियम एम थैक्सटन WILLIAM M. THAckston ने उनका अनुवाद किया और उन्हें प्रकाशित करवाया और अभी हाल ही में इन्हें दूसरी बार प्रकाशित करवाया गया है। शायह कहा जा सकता है कि इस प्रकार के अनुवाद का परिणाम है जो विलियम ब्लैक WILLIAM BLAKE और विलियम बी एट्स WILLIAM B. YEATS जैसे अमेरिका के कुछ शायरों ने इश्राक़ी दर्शनशास्त्र में प्रयोग होने वाली परिभाषाओं व शब्दों पर ध्यान दिया है। इन शायरों ने अपने शेरों में इश्राक़ी दर्शनशास्त्र के दृष्टिकोणों की ओर संकेत किया है और उनमें से कुछ का प्रयोग भी किया है।
वर्तमान अध्ययन व शोधकर्ता सलाह सालिम अली ने “मज़ामीने इश्राक़ी दर अंदीशे व शेरे विलियम ब्लैक व विलियम बी एट्स” नामक किताब में और इन दोनों शायरों के विचारों पर सोहरावर्दी के प्रभावों का अध्ययन किया है।
दिवंगत मेहदी हायरी यज़्दी ने इस्लामी दर्शनशास्त्र के बारे में अस्लामी ज्ञानभीमांसा के सिद्धांत नाम की एक किताब लिखी है और उसमें एक अध्याय भौतिक ज्ञान के बारे है और उसके बारे में जो सोहरावर्दी के विचार हैं उसकी उन्होंने अंग्रेज़ी भाषियों के लिए व्याख्या की है।
अंग्रेजी भाषा में सोहरावर्दी के बारे में जो रचनायें अपरिचित हैं उनमें एडवर्ड जोर्जे EDWARD GEORGIE के लेख का नाम लिया जा सकता है। इसमें इश्रराक़ी दर्शनशास्त्र के दृष्टिकोणों को फिर से जीवित किये जाने की बात की गयी है।
एन्टोनियो ट्यूफी ANTONIO TUFY ने प्रतिकवाद और कलपना शीर्षक के अंतर्गत एक लेख लिखा है जिसमें इशारे से बात करने की सोहरावर्दी की शैली की समीक्षा की है और उन्होंने इशारे में प्रकाश से लाभ उठाने की उनकी शैली की तुलना ग़ज़ाली से की है।
एक अन्य लेखक जॉन वॉलब्रिज हैं जिन्होंने सोहरावर्दी के बारे में लिखा बहुत कुछ लिखा है। उनकी एक किताब का नाम ईश्वरीय ज्योति का ज्ञान है जिसमें सोहरावर्दी के इश्राक़ दर्शनशास्त्र की व्याख्या करने वाले कुत्बुद्दीन शीराज़ी और दूसरे व्याख्याकर्ताओं के बारे में बात की है। पूर्वजों की पूदी सोहरावर्दी के बारे में वालब्रिज की सबसे नई किताब है जिसमें उन्होंने सोहरावर्दी के इश्राक़ दर्शनशास्त्र के आधारों के बारे में बात की है। इसी प्रकार सोहरावर्दी के बारे में वालब्रिज की एक अन्य किताब का नाम” सोहर्वर्दी और पूरव की अफ़लातूनी संस्कृति की समीक्षा है। इस किताब में उन्होंने इश्राक़ दर्शनशास्त्र के बारे में अधिक शोध किया है।
हेनरी कोर्बेन और सैयद हसन नस्र ने सोहरावर्दी के बारे में जो किताबें लिखी हैं उनके प्रकाशित होने और उन्हें पढ़ने के बाद बहुत से छात्र इस महान ईरानी विद्वान और दर्शनशास्त्री से परिचित हो गये और उनसे प्रेम करने लगे। वर्ष 1970 में डाक्ट्रेड के बहुत से थिसेज़ इसी संबंध में यानी सोहरावर्दी के बारे में लिखे गये। सोहरावर्दी की कहानियों में जो साहित्यिक पहलु था मिशेल बेलब्ले ने उस पर किताब लिखी। सोहर्वर्दी के संकलन की कहानियों की समीक्षा मिशेल बेलब्ले की एक किताब है जिसमें उन्होंने सोहरावर्दी की फारसी की कहानियों के बारे में विस्तार से चर्चा की है और उनके साहित्यिक पहलुओं पर बल व ध्यान दिया है।
सूफीवाद के बारे में सोहरावर्दी की चार किताबें हैं। काज़िम तेहरानी ने डाक्ट्रेड के अपने थिसेज़ में उनके बारे अध्ययन करके एक व्यापक व अच्छा विश्लेषण पेश किया है।
इसी तरह हुसैन ज़ियाई ने अपने डाक्ट्रेड के थिसेज़ को सोहरावर्दी के दर्शनशास्त्र के बारे में लिखा है और पहली बार पेश किया है कि सोहरावर्दी के पास विशेष दर्शनशास्त्र था जो उन्हें मश्शाई दर्शनशास्त्रियों से भिन्न करता है। उन्होंने सोहरावर्दी के तर्क व दर्शनशास्त्र के बारे में कई लेख लिखे हैं और “दानिश व इश्राक़” नाम की एक किताब भी लिखी है। इसी प्रकार हुसैन ज़ियाई ने इश्राक़ दर्शनशास्त्र का अनुवाद किया है और यह कार्य उन्होंने जान वालब्रिज के सहयोग से किया है और सोहरावर्दी के विचारों की जो व्याख्या शहरज़ूरी ने की है वह भी वालब्रिज के आलोचनात्मक शोध में शामिल है।
सोहरावर्दी ने फरिश्तों की पहचान के बारे में जो बहस की है श्रीमती वेब साइला WEB GSYLA ने अपने डाक्ट्रेड का थिसेज़ इसी बारे में लिखा है और यह सोहरावर्दी को पहचाने हेतु अग्रेज़ी भाषियों के लिए एक अन्य किताब है। उन्होंने इस किताब में फरिश्तों की पहचान के सिलसिले में जो ज़रतुश्ती और इस्लामी बुनियादें हैं उसके बारे में शोध किया है।
सोहरावर्दी के संबंध में नाहिद चारादार की लाभदायक किताब है जो वर्तमान समय में अग्रेज़ी भाषियों से सोहरावर्दी को परिचित कराती है। नाहिद चारादार ने डाक्ट्रेड के अपने थिसेज़ में सोहरावर्दी की पहचान के संबंध में लिखा है और उसमें वास्तविकता के अर्थ और भौतिक ज्ञान की समीक्षा की है। इसी प्रकार नाहिद चारादार ने सोहरावर्दी के बारे में कई लेख लिखे हैं जिसमें विभिन्न पहलुओं से उनके विचारों की समीक्षा की है। आर्गोस जॉन मैनुएल एक स्पेनिश दर्शनशास्त्री हैं जिन्होंने सोहरवर्दी का सूफ़ीवाद नाम की एक किताब लिखी है। जिसमें उन्होंने सोहरावर्दी के सूफीवादी विचारों की समीक्षा की है।
स्पेन के दूसरे प्रसिद्ध दर्शनशास्त्री मिग्योल हर्नान्डेज़ हैं जिन्होंने” इस्लामी फ़लसफ़े में प्रतीकवाद और रहस्यवाद नाम की एक किताब लिखी है। आध्यात्मिक दृष्टि से इस किताब में सोहरावर्दी के विचारों की समीक्षा और उनकी तुलना इब्ने सीना के विचारों से की गयी है। सोहरावर्दी के निकट पक्षियों के उड़ने का जो अर्थ है और जो अर्थ किताबुत्तैर में है उसकी तुलना हर्नान्डेज़ ने की है। इसी प्रकार हर्नान्डेज़ ने अपनी दूसरी किताब में इश्राक़ दर्शनशास्त्र और रहस्यवादी दृष्टिकोणों और इन दोनों के मध्य संबंधों की समीक्षा की है। यहां पर हम सोहरावर्दी के बारे में स्पेनिश भाषा में शोध करने वाले अर्जेटाइना के युवा शोधकर्ता न्ड्रिय टू वीटा ANDREA TWO VITA के नाम का उल्लेख कर रहे हैं जिन्होंने अपने डाक्ट्रेड का थिसेज़ सोवरावर्दी पर लिखा है और वह स्पेनिश भाषा में सोहरावर्दी की कुछ किताबों का अनुवाद करने के भी प्रयास में हैं।
इटली और जापान में भी सोहरावर्दी के बारे में मूल्यवान शोध अंजाम दिये गये हैं। जापान में हालिया वर्षों में कई अध्ययन व शोधकर्ताओं ने सोहरावर्दी की किताबों की समीक्षा की है। यद्यपि उन्होंने इस बारे में अधिक कुछ लिखा नहीं है परंतु जो कुछ अंजाम दिया गया वह ध्यान योग्य है। जापानी शोधकर्ताओं के मध्य तोशीको आइज़ूस्तो हैं जिन्होंने वर्ष 1970 में हेनरी कोर्बेन और सैयद हुसैन नस्र की सहायता से सोहरावर्दी से निष्ठा रखने वाले छात्रों का प्रशिक्षण किया। इन छात्रों के मध्य हम “हारतू कूबायाशी” और उनकी किताब आत्मबोध के बारे में इब्ने सीना और सोहरवर्दी के विचार की तुलना करते हैं कि इस किताब में उन्होंने सोहरावर्दी की पहचान और उनके भौतिक ज्ञान के दृष्टिकोण की तुलना इब्ने सीना के दृष्टिकोण से की है।
इतालवी दर्शनशास्त्री फ्लिप पिव रोन्कनी ने सोहरावर्दी के इश्राक़ी दर्शनशास्त्र के बारे में महत्वपूर्ण किताब लिखी है और सूफीवाद धारणा के अंतर्गत सोहरावर्दी के इश्राक़ी विचारों की समीक्षा की है।
भारतीय उपमहाद्वीप और अरब देशों सहित विभिन्न देशों में सोहरावर्दी के बारे में बहुत सी किताबें लिखी गयी हैं जिनकी इस कार्यक्रम में चर्चा नहीं की जा सकती। आज के कार्यक्रम का समापन हम उस कथन से कर रहे हैं जो सोहरावर्दी की क़ब्र पर रखे पत्थर पर लिखा है। वह कथन यह है यह उसकी क़ब्र है जो रत्न था। छिपा हुआ रत्न जिसका मूल्य ईश्वर जानता था दुनिया ने उसका मूल्य नहीं समझा इसी कारण ईश्वर ने उसे लोगों की नज़रों से छिपाये रखा और उसे अपनी ओर वापस बुला लिया।