Oct १९, २०१६ ११:५५ Asia/Kolkata
  • गुरुवार - 22 अक्तूबर

1878 को सेलफ़ोर्ट में पहली बार रगबी मैच ब्राउटन और स्वींटन के बीच खेला गया।

22 अक्तूबर सन 1494 ईसवी को इतालवी नाविक क्रिस्टोफ़र कोलंबस ने अपनी दूसरी खोजी समुद्री यात्रा आंरभ की।  इस यात्रा में कोलंबस ने एंटील द्वीप समूह की खोज की। कोलंबस ने अपनी पहली खोजी यात्रा में, जो अक्तूबर महीने में आरंभ हुई, अमरीका महाद्वीप की खोज की।

22 अक्तूबर सन 1918 ईसवी को प्रथम विश्व युद्ध का अंतिम चरण जर्मन सेना पर संयुक्त सेना के आक्रमण के साथ आरंभ हो गया। यह युद्ध फ़्लान्डर युद्ध के नाम से प्रसिद्ध है क्योंकि यह युद्ध इसी नाम के एक क्षेत्र में लड़ा गया था। इस युद्ध में पहले तो जर्मन सेना ने डट कर मुक़ाबला किया किंतु अंततः संयुक्त सेना की विजय हुई। इस प्रकार नवंबर 1918 में जर्मनी के हथियार डाल देने के साथ ही प्रथम विश्व युद्ध समाप्त हुआ।

22 अक्तूबर सन 1956 ईसवी को फ्रांस में फ्रांसीसी, ब्रिटिश और ज़ायोनी प्रधानमंत्रियों की गुप्त बैठक हुई जिसमे मिस्र पर आक्रमण की योजना की समीक्षा की गई। वर्ष 1956 में मिस्र के तत्कालीन राष्ट्रपति जमाल अब्दुन्नासिर ने स्वेज़ नहर का राष्ट्रीयकरण कर दिया जिसके बाद इस क्षेत्र में फ्रांस और ब्रिटेन के अवैध हित ख़तरे में पड़ गए इस लिए उन्होंने स्वेज नहर पर नियंत्रण कर लेने का मन बना लिया। ज़ायोनी शासन ने जो मिस्र को उस समय अपना सबसे बड़ा शत्रु समझता था इस अवसर से लाभ उठाने का प्रयास किया। फ्रांस की बैठक के एक सप्ताह बाद मिस्र पर आक्रमण किया गया किंतु अतिक्रमणकारियों को उनके लक्ष्य प्राप्त नहीं हो सके।

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पहली आबान सन 1356 हिजरी शम्सी को इस्लामी क्रान्ति के संस्थापक इमाम ख़ुमैनी के पुत्र आयतुल्ला सैयद मुसतफ़ा ख़ुमैनी को इराक़ के नजफ़ नगर में उनके घर में शाह के सुरक्षाबलों ने शहीद कर दिया। सैयद मुस्तफ़ा सन 1309 हिजरी शम्सी को ईरान के पवित्र नगर क़ुम में जन्में थे। इस नगर में आरंभिक शिक्षा प्राप्त करने के बाद उच्च स्तरीय शिक्षा के लिए इराक़ के नजफ़ नगर रवाना हो गये।

उन्होंने बड़ी तेज़ी के साथ ज्ञान प्राप्त किया और फ़िर शिक्षा देने लगे। उन्होंने सदैव अपने पिता इमाम ख़ुमैनी के मार्ग पर चलते हुए शाही शासन के विरुद्ध संघर्ष किया।

उनकी शहादत से ईरान में क्रान्ति की लहर में और भी गति आगनी इमाम ख़ुमैनी ने इस अवसर पर कहा था कि मुसतफ़ा की शहादत, ईश्वर की निहित अनुकम्पाओं में से थी।

 

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5 रबीउल अव्वल सन 1268 हिजरी क़मरी को ईरान में नयी शैली के पहले विश्वविद्यालय दारुल फ़ूनून का उद्घाटन हुआ। यह नासिरूद्दीन काजार के शासन काल में वरिष्ठ अधिकारी व विद्वान मिर्ज़ा तक़ी अमीर कबीर के प्रयासों का परिणाम था। इसकी स्थापना का उद्देश्य उस समय के आधुनिक ज्ञान तक पहुंच प्राप्त करना था। आरंभ में इस विश्व विद्यालय में प्रशासन चिकित्सा तथा खदान जैसे विषयों के अतिरिक्त सैनिक मामलों की शिक्षा दी जाती थी। आगे चलकर इस विश्वविद्यालय ने बड़ी प्रगति की और इस समय ईरान में इसका बड़ा महत्तव है।