Feb २५, २०१६ १२:१६ Asia/Kolkata

25 फ़रवरी सन 1954 ईसवी को सीरिया के स्वार्थी और भाई भतीजावादी राष्ट्रपति अदीब शीशकली के विरुद्ध इस देश की जनता ने पहाड़ी क्षेत्रों में सशस्त्र विद्रोह आरंभ किया।

25 फ़रवरी सन 1954 ईसवी को सीरिया के स्वार्थी और भाई भतीजावादी राष्ट्रपति अदीब शीशकली के विरुद्ध इस देश की जनता ने पहाड़ी क्षेत्रों में सशस्त्र विद्रोह आरंभ किया। यह विद्रोह सीरिया की जनता के पहले के विद्रोहों और आंदोलनों से बहुत अलग था। क्योंकि इस विद्रोह में विभिन्न देशप्रेमी गुट किसान मज़दूर छात्र यहॉ तक कि विद्यार्थी भी सक्रिय थे। सीरिया की जनता का सन 1954 का विद्रोह सेना का सहयोग प्राप्त हो जाने के बाद सफल हो गया।

 

25 फ़रवरी सन 1986 ईसवी को फ़िलिपीन के अत्याचारी तानाशाह राष्ट्रपति फ़रडीनैन्ड मारकोस अपने परिवार के साथ इस देश से भाग निकले। वे सन 1965 में इस देश के राष्ट्रपति बने और पश्चिमी शक्तियों विशेषकर अमरीका और सेना के समर्थन से उन्होंने फ़िलिपीन में अपना अत्याचारी और तानाशाही शासन जारी रखा और सन 1973 में स्वंय को फ़िलिपीन का आजीवन राष्ट्रपति घोषित कर दिया। यह ऐसी स्थिति में था कि जब देश के विभिन्न क्षेत्रों में लोग मारकोस की सरकार के विरुद्ध राजनैतिक और सशस्त्र आंदोलन चला रहे थे। 1980 के दशक के मध्य में फ़िलिपीन की जनता के संघर्ष में तीव्रता आ गयी यहॉ तक वे 25 फ़रवरी सन 1986 ईसवी को इस देश से फ़रार करने पर विवश हुए। द्वीप समूह फ़िलिपीन देश एशिया के दक्षिण पूर्व में और प्रशांत महासाग़र में स्थित है और इसका क्षेत्रफल तीन लाख वर्ग किलोमीटर है।

 

25 फ़रवरी सन 1991 ईसवी को वारसा संधि के सदस्य देशों के प्रतिनिधियों ने हंग्री में एक सम्मेलन के दौरान उस संधि के निरस्त होने की घोषणा की। यह संधि पूर्वी ब्लॉक के देशों द्वारा 14 मई सन 1955 में हुई थी। वारसा संधि, सदस्य देशों का एक संयुक्त सैनिक संगठन था जिसका निर्देशन मॉस्को के हाथ में था। इस संधि के सदस्य देशों ने सहमति की थी कि यदि उनमें से किसी पर किसी देश ने आक्रमण किया तो दूसरे सदस्य देश आक्रमण का निशाना बनने वाले उस सदेस्य देश के समर्थन में सक्रिय हो जाएंगे किंतु 1991 में सोवियत संघ के विघटन के समय जो वारसा संधि का ध्रुव्र था, हॉनैंड हंग्री रोमानिया बुलगारिया, चेकोस्लवाकिया और सोवियत संघ ने एक समझौते पर हस्ताक्षर किये जिसके अनुसार वारसा संधि निरस्त हो गयी।

 

25 फ़रवरी सन 1994 ईसवी को एक अतिवादी ज़ायोनी ने पश्चिमी तट के अलख़लील नगर में नमाज़ियों को गोलियों से भून दिया। इस पशविक आक्रमण में 29 नमाज़ी शहीद और बड़ी सख्या में लोग घायल हुए।

इस घटना के बाद इस्लामी देशों में बड़ी आपत्ति जताई गयी और फ़िलिस्तीन में जनता का संघर्ष और भी तेज़ हो गया।

 

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6 इसफ़ंद वर्ष 1362 हिजरी शम्सी को इराक़ के विमानों ने ईरान के कूहदश्त, सक़्क़ेज़, पोलदोख़्तर तथा महाबाद नगरों पर बम्बारी की। ख़ैबर नामक कार्यवाही में इस्लामी गणतंत्र ईरान के जियालों के विजय होने तथा मजनून द्वीपों  के क्षेत्र पर इराक़ी सेना की पराजय के पश्चात इराक़ की बासी सरकार ने ईरान के विभिन्न आवासीय क्षेत्रों पर बम्बारी की और प्रक्षेपास्त्र दाग़े जिस के परिणाम में ख़ुर्रमाबाद और बोरूजेर्द चार मिसाइलों का निशाना बन गए तथा कूहदश्त, सक़्क़ेज़, पोलदोख़्तर एवं महाबाद नगरों पर इराक़ी विमानों ने बम्बारी की, इस पश्विक बम्बारी में लगभग 5 हज़ार ईरानी नागरिक शहीद और चार सौ से अधिक घायल होगए।

 

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आज पहली रजब है यह वह महीना है जिसके बारे में पैग़म्बरे इस्लाम ने कहा है कि रजब का महीना महान है इसकी विशेषताएं असीम हैं, परिपूर्णताओं की दृष्टि से यह महीना अद्वितीय है, इस महीने में नास्तिकों तक से युद्ध हराम है। इस महीने में रोज़ा रखने की सिफ़ारिश की गयी है। कुछ इतिहासकारों के अनुसार पहली रजब सन 57 हिजरी क़मरी को पैग़म्बरे इस्लाम के पौत्र इमाम मोहम्मद बाकिर अलैहिस्सलाम का जन्म हुआ। उनका नाम मोहम्मद और बाक़िर उपाधि थी जिसका अर्थ है ज्ञान की गुत्थियों को खोलने वाला। उन्होंने सामाजिक समस्याओं के समाधान के लिए कठिन परिश्रम किये। उनके काल में इस्लामी ज्ञान को फलने फूलने का अच्छा अवसर मिला। उनका कथन है कि जो भी अच्छे आचरण का स्वामी, विनम्र और सहनशील हो उसे सारी अच्छाइयां दे दी जाएंगी और वह लोक परलोक में सुख से रहेगा और जो व्यक्ति अच्छा आचरण न रखता हो उसका मार्ग बुराइयों की ओर होगा।