Feb २८, २०१६ १३:५७ Asia/Kolkata

28 फ़रवरी सन 1522 ईसवी को स्वीडन में जनता ने डेनमार्क के वर्चस्व के विरुद्ध संघर्ष का आरंभ किया।

इस संघर्ष का नेतृत्व गोस्तव वाज़ा कर रहे थे। उन्होंने स्वीडन के किसानों और प्रोटेस्टेंट ईसाइयों की सहायता से इस देश की स्वतंत्रता के लिए संघर्ष आरंभ किया। इस जनान्दोलन के परिणाम स्वरुप गोस्ताव वाज़ा स्वीडन के शासक बने और इस देश में वाज़ा शासन श्रृंखला की नींव पडी। इस वंश ने लगभग तीन शताब्दियों तक स्वीडन पर राज किया। यहॉ तक कि सन1818 ईसवी में मार्शल बाटिस्ट बरनाडोट ने इस श्रृंखला के शासन का अंत किया।

 

28 फ़रवरी सन 1813 ईसवी को रूस और प्रांस के बीच रानजैतिक व सैनिक संधि हुई। इन दोनों देशों के शासकों ने फ़्रांस के तानाशाह नेपोलियन बोनापार्ट का मुकाबला करने के लिए यह संधि की थी क्योंकि दोनों देशों की सेनाओं ने नेपोलियन बोनापार्ट से मात खाई थी। इस संधि में ब्रिटेन, ऑस्ट्रिया और स्वीडन के शामिल हो जाने के बाद नेपोलियन बोनापार्ट के विरुद्ध एक मज़बूत मोर्चा तैयार हो गया और इस संयुक्त मोर्चे ने नेपोलियन को पराजित कर दिया।

 

28 फ़रवरी सन 1922 ईसवी को प्राचीन देश मिस्र ने स्वतंत्रता प्राप्त की। लगभग8 हज़ार वर्ष पूर्व इस देश में आबादी बसी और लगभग साढ़े 6 हज़ार वर्ष पूर्व इस देश में केंद्रीय सरकार का गठन हुआ।

इस्लाम के उदय के बीस वर्षों के बाद इस देश पर मुसलमानों का अधिकार हुआ। सन 969 ईसवी में फ़ातेमी शासकों ने मिस्र पर अधिकार किया और धीरे धीरे यह देश फ़ातेमी शासकों का केंद्र बन गया। सन 1172 ईसवी में फ़ातेमी शासन श्रृंखला का अययूबी शासक ने अंत कर दिया और 16 वीं शताब्दी के आरंभ में उसमानियों ने मिस्र पर अधिकार किया। 1805 ईसवी में उसमानी और ब्रिटिश सेनाओं ने मिस्र पर नेपोलियन के कुछ महीने के शासन का अंत किया जिसके बाद मिस्र की बागडोर अलबानिया के सेनाधिकारी मोहम्मद अली को सौंप दी गयी। १९वीं शताब्दी ईसवी के अंत में मिस्र में ब्रिटेन का प्रभाव बढ़ना आरंभ हुआ। जिसके परिणामस्वरुप जनता ने विद्रोह किया जिसे कुचलने के लिए ब्रिटेन ने 1882 ईसवी में इसकंदिरया बंदरगाह पर अपनी सेनाएं उतारीं। 1914 ईसवी में प्रथम विश्व युद्ध के आरंभ में मिस्र की जनता ने फिर विद्रोह किया जिसके कारण ब्रिटेन को इस देश से निकलना पड़ा और 1922 ईसवी में ब्रिटेन ने मिस्र की स्वाधीनता को औपचारिकत प्रदान की।

28 फ़रवरी सन 1991 ईसवी को फ़ार्स की खाड़ी के 40 दिवसीय युद्ध में अमरीका के तत्कालीन राष्ट्रपति जार्ज बुश सीनियर ने संघर्ष विराम की घोषणा की। फ़ार्स की खाड़ी का संकट, इराक़ द्वारा कुवैत पर आक्रमण और इस देश पर अतिग्रहण कर लेने के बाद आरंभ हुआ। कुवैत पर इराक़ का क़ब्ज़ा जारी रखने और अमरीका द्धारा इस संकट के सैनिक समाधान पर बल दिये जाने के बाद अमरीका ब्रिटेन फ़्रांस और जापान के युद्धक विमानों ने जनवरी सन 1991 में इराक़ पर आक्रमण आरंभ किया। संघर्षविराम की घोषणा के बाद इराक़ और संयुक्त देशों के बीच वार्ता आरंभ हुई और इराक़ ने सुरक्षा परिषद के 12 सुत्रीय प्रस्ताव को स्वीकार किया। इस प्रकार यह युद्ध समाप्त हुआ किंतु क्षेत्र के देशों सऊदी अरब कुवैत बहरैन और फ़ार्स की खाड़ी में अमरीकी सैनिकों ने अपने अड्डे बना लिए। इस प्रकार इस क्षेत्र में अमरीका की सैनिक उपस्थिति जारी है।

 

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4 रजब वर्ष 592 हिजरी क़मरी को प्रसिद्ध मुसलमान शायर मुहम्मद बिन अली वास्ती का देहान्त हुआ। वह वर्ष 501 हिजरी क़मरी में जन्मे और इब्ने मुअल्लिम के नाम से प्रसिद्ध हुए। इब्ने मुअल्लिम ने अपनी शायरी में शिष्टाचार और सामाजिक विषयों को बहुत ही सरल ढंग से पेश किया है। उनकी शायरी में अंतर्ज्ञान के विषय बहुत अधिक मिलते हैं। इब्ने मुअल्लिम द्वारा लिखी गयी पुस्तकों में केवल उनका काव्य संकलन ही बाक़ी है।