वरिष्ठ नेता की इस्फ़हान की जनता से भेंट
इस्लामी क्रांति के वरिष्ठ नेता आयतुल्लाहिल उज़्मा सैयद अली ख़ामेनेई ने इस्फ़हान के 360 शहीदों की वर्षगांठ पर वहां की जनता के एक गुट से तेहरान में भेंट की।
इस भेंटवार्ता में वरिष्ठ नेता ने इस्फ़हान की प्रतिरोधक जनता, प्रतिरोधक अर्थव्यवस्था, राजनीतिक दूरदर्शिता और ईरान पर थोपे गए पिछड़ेपन की भरपाई के लिए क्रांतिकारी मनोबल को बनाए रखने जैसे विषयों पर अपने विचार व्यक्त किये।
ईरान की क्रांतिकारी जनता ने ईरान के गौरवशाली इतिहास में एसे महत्वपूर्ण दिन देखे हैं जिनका उदाहरण अन्य स्थान पर देखने को नहीं मिलता। ईरान पर थोपे गए आठ वर्षीय युद्ध के दौरान देश की सुरक्षा के लिए ईरानियों का कड़ा प्रतिरोध स्वयं में एसी स्वर्णिम पुस्तक है जिसका प्रत्येक पृष्ठ, पाठक को प्रशंसा और दाद देने के लिए बाध्य करता है। 25 आबान या 15 मार्च की तारीख़, ईरान के इतिहास का एक सुनहरा पन्ना है जिस दिन देश की क्रांतिकारी जनता ने एक नए अध्याय को इतिहास में दाख़िल किया।
इस्फ़हान की जनता ने थोपे गए आठ वर्षीय युद्ध के दौरान देश की रक्षा के लिए लगभग 23 हज़ार शहीद इस्लामी क्रांति को अर्पित किये। 25 आबान 1361 के दिन इस्फ़हान के 360 युवा एक सैन्य अभियान में मारे गए। सद्दाम के विरुद्ध युद्ध में “मुहर्रम सैन्य अभियान” के दौरान एक ही दिन में इस्फ़हान के 360 युवा शहीद हो गए। इस घटना के कुछ ही दिनों के बाद 250 अन्य युवाओं को, जो इसी अभियान में शहीद हुए थे, दफ़न किया गया। अपने नगर के 600 से अधिक युवाओं की शहादत के बाद इसी नगर के बहुत से युवा अपने शहीद भाइयों से रणक्षेत्र को होने वाली क्षतिपूर्ति की भरपाई के उद्देश्य से युद्ध के लिए रवाना हो गए। इस घटना के पश्चात स्वर्गीय इमाम ख़ुमैनी ने एक संदेश के माध्यम से इस्फ़हानी जनता से सहानुभूति प्रकट की। अपने संदेश में उन्होंने कहा था कि ईश्वर की कृपा हो सभी शहीदों पर। ईश्वर शहीदों की आत्मा को शांति प्रदान करे। सलाम हो शहीदों के परिजनों पर जिन्होंने अपने प्रियों को धर्म की रक्षा के लिए ईश्वर के मार्ग में न्योछावर कर दिया।
25 आबान या 15 मार्च को इस्फ़हानी शहीदों की वर्षगांठ पर वरिष्ठ नेता ने इस्फ़हान के लोगों के साथ भेंट में उनसे पुनः मुलाक़ात पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए इस्फ़हान को कला, संस्कृति और शहादत का शहर बताया। उन्होंने कहा कि 25 आबान से लेकर आबान महीने के अंतिम दिन, वे दिन हैं जिन्हें भुलाया नहीं जाना चाहिए। वरिष्ठ नेता ने कहा कि इतिहास के इन महत्वपूर्ण दिनों के महत्वहीन होने का महत्वपूर्ण कारण, शत्रुओं का आक्रमण है। उन्होंने कहा कि यदि किसी पश्चमी देश में इस प्रकार की कोई एक भी महत्वपूर्ण घटना होती तो वे उसे कभी भी इतिहास की किताबों से नष्ट नहीं होने देते। वरिष्ठ नेता ने कहा कि ईरान की इस्लामी क्रांति का इतिहास, बलिदान की बहुत सी महान घटनाओं से भरा हुआ है जिनको सुरक्षित रखा जाना चाहिए।
इस्लामी क्रांति के वरिष्ठ नेता आयतुल्लाहिल उज़्मा सैयद अली ख़ामेनेई ने अपने संबोधन में इमाम हुसैन के चेहलुम पर करबला में होने वाली लाखों लोगों की रैली की ओर संकेत करते हुए कहा कि हर प्रकार के ख़तरों के बावजूद एसी भव्य रैली का आयोजन एक बहुत ही महत्वपूर्ण घटना है। उन्होंने कहा कि देश की जतना में एसी महान रैली को आयोजित करने का उत्साह ही देश की सुरक्षा की गारंटी है।
आयतुल्लाहिल उज़्मा सैयद अली ख़ामेनेई ने इस्फ़हान को अति प्राचीन नगर बताते हुए उसे एक वैभवशाली नगर बताया। उन्होंने कहा कि इस्फ़हान के लोगों की एक प्रमुख विशेषता, संतोष है जो उनके निजी जीवन में स्पष्ट रूप से दिखाई देता है। उन्होंने कहा कि इस्फ़हानियों की एक अन्य विशेषता, ईश्वर के मार्ग में दान-दक्षिणा है। वरिष्ठ नेता ने कहा कि इस्फ़हान को इस प्रकार से प्रभाषित किया जा सकता हैः क्रांतिकारी नगर, धार्मिक नगर, ज्ञान का नगर, प्रशिक्षण का नगर या जनसेवकों का नगर। उन्होंने कहा कि इन महान विशेषताओं की सुरक्षा की जानी चाहिए और इस महान पूंजी को नष्ट करने के शत्रु के षडयंत्रों को विफल बनाया जाए। उन्होंने कहा कि शत्रु के मुक़ाबले में समर्पण किसी देश या राष्ट्र के लिए हर प्रकार की बुराइयों का प्रवेश द्वार है।
वरिष्ठ नेता ने कहा कि हम चाहते हैं कि इस्लाम की बरकतों से अपने देश को चरम पर पहुंचाएं। उन्होंने कहा कि हम ईरानी राष्ट्र को आदर्श राष्ट्र बनाना चाहते हैं। वरिष्ठ नेता का कहना था कि ईरानी राष्ट्र को न केवल मुस्लिम राष्ट्रों के लिए बल्कि पूरी मानवता के लिए आदर्श बनाना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि यह मार्ग लंबा और कठिन है। वे कहते हैं कि शत्रु कभी भी यह नहीं चाहता कि इस्लाम को सम्मान मिले। यही कारण है कि शत्रु मिल बैठकर इस्लाम के विरुद्ध षडयंत्र रचते हैं और उसके विरुद्ध गतिविधियां करते हैं। आयतुल्लाह ख़ामेनेई ने कहा कि इसलिए आपको उनके षडयंत्रों से निश्चेत नहीं रहना चाहिए।
वरिष्ठ नेता ने अपने संबोधन को आगे बढ़ाते हुए क्रांति के नियमों के प्रति कटिबद्धता को वर्तमान समय में देश की सबसे बड़ी आवश्यकता बताया। उन्होंने कहा कि स्वर्गीय इमाम ख़ुमैनी के बयान और उनका वसीयतनामा, क्रांति का आधार हैं। जिस इमाम ने दुनिया को हिला कर रख दिया उनका वसीयतनामा वास्तव में महत्वपूर्ण है। आयतुल्लाह ख़ामेनेई ने बल देकर कहा कि क्रांति के नियमों के प्रति कटिबद्ध रहने पर बल दिया जाना, कट्टरपन या अज्ञानता के कारण नहीं है बल्कि यह इसलिए है क्योंकि शताब्दियों से थोपे गए पिछड़ेपन को दूर किया जाए। उन्होंने कहा कि क्रांति के मार्ग पर चलकर ही यह संभव है।
वरिष्ठ नेता ने कहा कि वर्तमान समय में देश की सबसे महत्वपूर्ण आवश्यकता, अर्थव्यवस्था है। उन्होंने प्रतिरोधक अर्थव्यवस्था के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि प्रतिरोधक अर्थव्यवस्था एसी अर्थव्यवस्था है जो देश के भीतर से निकलती है और दूसरों पर हमारी निर्भर्ता को कम करते हुए इस निरभर्ता को समाप्त कर देती है। इस प्रकार विदेशी झटकों के प्रभाव को यह प्रभावहीन बनाती है। आयतुल्लाहिल उज़्मा सैयद अली ख़ामेनेई ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों के दौरान पश्चिमी विशेषकर अमरीकी सरकार ने यह प्रयास किया कि अत्याचारपूर्ण प्रतिबंध लगाकर ईरान की अर्थव्यवस्था को संकट में डाल दिया जाए। उन्होंने कहा कि एसी स्थिति में देश की आर्थिक समस्याओं पर नियंत्रण पाने का एकमात्र मार्ग, प्रतिरोधक अर्थव्यवस्था को अपनाना है। उन्होंने कहा कि विदेशी शक्तियों पर निर्भर रहने के स्थान पर हमें देश के भीतर पाई जाने वाली संभावनाओं और योग्यताओं पर आश्रित रहना चाहिए।
अपने भाषण में उन्होंने राजनैतिक दूरदर्शिता के बारे में भी चर्चा की। वरिष्ठ नेता ने कहा कि जब दूरदर्शिता पाई जाती है तो मनुष्य अपने इर्दगिर्द के वातावरण को सही ढंग से पहचानता है। यदि दूरदर्शिता नहीं होगी तो हो सकता है कि मनुष्य किसी एसी चीज़ की ओर आकृष्ट हो जिसमें वास्तव में आकर्षण ही न हो। वरिष्ठ नेता ने कुछ तथाकथित मेधावियों के अमरीका की ओर आकृष्ट हो जाने की ओर संकेत करते हुए कहा कि यह बात, अमरीका की अस्थिर परिस्थतियों को न पहचानने के कारण है। उन्होंने कहा कि अमरीका में राष्ट्रपति पद के चुनाव प्रचार के दौरान राष्ट्रपति पद के दोनो प्रत्याशियों ने अमरीका की अस्थिर परिस्थितियों के बारे में स्पष्ट रूप से बातें कही हैं। उन्होंने कहा कि उस देश में बहुत सी बुराइयां पाई जाती हैं उसके बावजूद वहां का पैसा निर्दोष लोगों की हत्याएं करने और युद्ध भड़काने जैसे कामों में ख़र्च किया जा रहा है। वरिष्ठ नेता ने अफ़ग़ानिस्तान, इराक़, यमन, लीबिया और सीरिया में अमरीकी अपराधों की ओर संकेत करते हुए कहा कि दूरदर्शिता तो यह है कि हमे ज्ञात होना चाहिए कि हमारे मुक़ाबले में कौन है या हम किसके सामने हैं? हमे मालूम होना चाहिए कि वह हमारे बारे में कैसी सोच रखता है। तुमको जान लेना चाहिए कि यदि इन बातों से तुमने अपनी आंखें मूंद लीं और सोच-विचार नहीं किया तो तुम एसी चोट खाओगे जिसकी भरपाई कठिन होगी।
अमरीका में हुए राष्ट्रपति पद के चुनाव के बारे में इस्लामी क्रांति के वरिष्ठ नेता ने कहा कि मैं इस बारे में कोई दृष्टिकोण नहीं रखता। अमरीका तो अमरीका ही है। वहां पर चाहे जिस पार्टी की सरकार हो उससे हमें कोई लाभ नहीं है बल्कि उनसे हमें अबतक नुक़सान ही हुआ है। आयतुल्लाह ख़ामेनेई ने कहा कि हमें किसी प्रकार की चिंता भी नहीं है। ईश्वर की कृपा से हम हर संभावित कार्यवाही का मुक़ाबला करने के लिए तैयार हैं। उन्होंने देश की व्यवस्था को संगठित बनाए रखने का आह्वान करते हुए युवाओं से मांग की है कि वे अपनी क्रांतिकारी भावना की सुरक्षा करें और इधर-उधर की बातों से बचें।
अपने संबोधन के अन्तिम भाग में इस्लामी क्रांति के वरिष्ठ नेता आयतुल्लाहिल उज़्मा सैयद अली ख़ामेनेई ने पुनः इस्फ़हान की जनता की विशेषताओं का उल्लेख करते हुए कहा कि विगत में इस्फ़हान के लोगों की परीक्षा, एक सार्थक परीक्षा थी और यह बात पूरे ईरानी राष्ट्र पर लागू होती है। उन्होंने ईश्वरीय परीक्षा को एक प्रकार का अभ्यास बताया जिसमें मनुष्य को अपनी कमज़ोर और सशक्त बातों का पता चलता है ताकि वह अपने भीतर पाई जाने वाली कमज़ोरी को दूर कर सके।
अंत में वरिष्ठ नेता ने कहा कि आप लोगों को जान लेना चाहिए कि देश का भविष्य बहुत उज्जवल है। उन्होंने कहा कि ईश्वर पर भरोसे, क्रांति की उपलब्धियों और सुदृढ़ ईमान के सहारे हम मुश्किलों पर विजय प्राप्त करेंगे इन्शाल्ला।