Dec १४, २०१६ ०९:४६ Asia/Kolkata

हमने उल्लेख किया था कि मीर सैय्यद अली हमदानी का ईरान के शहर हमदान में 714 हिजरी क़मरी में को जन्म हुआ।

उन्होंने प्राथमिक शिक्षा प्राप्त करने के बाद, महान गुरूओं से हदीस, दर्शन शास्त्र, अध्यात्म और रहस्यवाद की शिक्षा ग्रहण की। शिक्षा ग्रहण करने के बाद, उन्होंने अपने उस्तादों की सिफ़ारिश पर ईरान के बाहर धर्म और इस्लामी रहस्यवाद का प्रचार प्रसार किया। वे अपने जीवन के अंत तक लोगों की शिक्षा दीक्षा में लगे रहे।

ईरान, मध्य एशिया और भारत में लोग उनका बहुत सम्मान करते थे। अध्यात्म के अलावा दर्शन शास्त्र में भी उन्हें उच्च स्थान प्राप्त था, इस संबंध में उनकी अनेक रचनाएं हैं। उनकी किताबों की संख्या 110 से अधिक है। यह रचनाएं अर्थ, विषय और शैली की दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं। यह किताबें विभिन्न कालों में क़ुरान की व्याख्या, हदीस, दर्शन शास्त्र, नैतिकता, रहस्यवाद और साहित्य के विषयों में लिखी गईं। उनकी समस्त किताबों में पेश किए गए विषय शिक्षाप्रद, आध्यात्मिक और रहस्यवादी हैं। मीर सैय्यद अली हमदानी की मौत के बाद उनकी संतान ने हमदान, श्रीनगर, बलख़ाब और अन्य क्षेत्रों में अपने पिता के मिशन को आगे बढ़ाया और लोगों का मार्गदर्शन किया।

मक़बरे किसी भी समुदाय या राष्ट्र की सांस्कृतिक, सामाजिक एवं धार्मिक धरोहर होते हैं, जो सामाजिक प्रासंगिकता के अलावा, विभिन्न समुदायों के बीच सांस्कृतिक आदान प्रदान का भी माध्यम बनते हैं। मीर सैय्यद अली हमदानी का मक़बरा ताजिकिस्तान के कूलाब शहर में स्थित है। ताजिकिस्तान के लोग इस मक़बरे का एक पवित्र स्थल के रूप में सम्मान करते हैं और बड़ी संख्या में वहां ज़ियारत के लिए जाते हैं।

किसी भी मक़बरे के निर्माण के इतिहास, उसके निर्माण के लिए प्रेरणा और उससे संबंधित कहानियों और दास्तानों के बारे में जिज्ञासा से इतिहास के अनेक अंधेरे पहलूओं से पर्दा उठता है। मीर सैय्यद अली हमदानी के मक़बरे का इतिहास भी काफ़ी महत्वपूर्ण है, जिसने ताजिकिस्तान के लोगों के धर्म और संस्कृति के बीच एक संबंध स्थापित किया है। मीर सैय्यद अली हमदानी के मक़बरे की कला के क्षेत्र में भी भूमिका रही है। कला ने प्राचीन काल से ही इंसान का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया है और यह इंसान के जीवन में विभिन्न रूपों में ज़ाहिर हुई है। कला धार्मिक एवं आध्यात्मिक आधार पर विकसित होती है।

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इस्लाम के सिद्धांत और नियम, ईरान और मध्य एशिया में मज़बूत प्रेरणा स्रोत माने जात रहे हैं। अरब मुसलमानें के ईरान पर विजय प्राप्त करने के बाद, ईरानी कला ने इस्लाम की सेवा की और इसने इस्लाम के प्रभाव में आकर नया रंग और रूप धारण कर लिया। यह बात धार्मिक स्मारकों में स्पष्ट रूप से देखी जा सकती है। जैसे कि मक़बरे, मज़ार और वे धार्मिक स्मारक एवं इमारतें जो ईरान और मध्य एशिया में बनाई गईं। इस प्रकार से कि यह इमारतें ईरानी और इस्लामी कला का नमूना समझी जाती हैं। यह ऐसी इमारतें हैं जो इस्लाम की अद्वितीय विशेषता अर्थात सामुदायिक और स्थानीय तंत्रों के अपनाने के बाद अस्तित्व में आई हैं। मस्जिदें और मक़बरे जैसी धार्मिक इमारतें कला के महत्वपूर्ण केन्द्र माने जाते हैं। ऐसे केन्द्र, जिन्होंने न केवल कला की सुरक्षा में भूमिका निभाई है, बल्कि ईरानी और इस्लामी कला को भी परिचित करवाया है। मक़बरे इस्लामी संस्कृति को अपनी कला, डिज़ाइन और रंगों द्वारा दूसरों तक स्थानांतरित करते हैं। टाइलिंग, ईंटों का पैटर्न, मोल्डिंग, आईनाकारी, चित्रकारी और डिज़ाइनों का उकेरना इस्लामी और ईरानी कला को बयान करते हैं।

मक़बरे के इमारत समूह में संग्राहलय के होने से यह इमारतें और आकर्षक बन जाती हैं, जिसके कारण देशी और विदेशी ज़ियारत करने वालों की ध्यान योग्य संख्या वहां पहुंचती है। इस प्रकार इस्लाम की समृद्ध संस्कृति का विस्तार होता है और धार्मिक हस्तियों का परिचय भी। नक्क़ाशी, मिनिएचर, सुलेख और सोने के काम से जो आम तौर पर संग्राहलयों के डेकोरेशन और शोकेस बनाने के लिए किया जाता है, स्थानीय कलाकारों की प्रतिभा एवं हुनरमंदी का पता चलता है। कूलाब में स्थित मीर सैय्यद अली हमदानी के मक़बरे की इमारत समूह में मौजूद संग्राहलय ईरान के अराक ज़िले के सारूक़ इलाक़े में 72 इमामज़ादों के मक़बरे की इमारत समूह के संग्राहलय की भांति है। जो इस मक़बरे और ईरानी मक़बरों के बीच के संबंध को ज़ाहिर करता है।

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जो लोग धार्मिक स्थलों में ज़ियारत के लिए जाते हैं, वह वहां उपहार स्वरूप कोई वस्तु या पैसा देते हैं। इसके अलावा भी इन धार्मिक स्थलों की आय अन्य स्रोतों जैसे कि वक़्फ़ की जायदादों से होती है। मज़ार पर ज़ायरीन के जाने और वहां पैसा ख़र्च करने से उस इलाक़े के आर्थिक विकास में मदद मिलती है, जहां वह मज़ार स्थित है। ईरान में मज़ारों से होने वाली आय का बड़ा हिस्सा आर्थिक गतिविधियों पर ही ख़र्च किया जाता है, जिससे इलाक़े का भी आर्थिक विकास होता है।

इसी प्रकार कुछ मज़ारों में आने वाले दान या उपहार को वहां के सेवकों और ज़रूरतमंद लोगों के लिए विशेष किया जाता है। इसके अलावा मज़ारों के आसपास के बाज़ार भी आर्थिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करते हैं। मीर सैय्यद अली हमदानी का मज़ार भी बड़ी संख्या में धार्मिक पर्यटकों विशेष रूप से विदेशी सैलानियों को, जो शिक्षा, व्यापार और सैर के लिए ताजिकिस्तान की यात्रा करते हैं, अपनी ओर आकर्षित करता है। कूलाब में ज़ायरीन और सैलानियों के पहुंचने से इस शहर और इलाक़े का काफ़ी विकास हुआ है।