Dec ३१, २०१६ १०:४४ Asia/Kolkata

1833, ब्रिटेन ने दक्षिण अटलांटिक के फ़ॉकलैंड द्वीप पर क़ब्जा जमाया।

1911, अमरीका में डाक बचत बैंक का उद्घाटन हुआ।

1956, फ्रांस में एफ़िल टॉवर के ऊपरी हिस्से में आग लगने से नुक़सान।

1959, अलास्का को अमरीका का 49वां राज्य घोषित किया गया।

1991, ब्रिटेन से इराक़ी दूतावास के 8 अधिकारियों को निष्कासित किया गया।

1993, अमरीका और रूस ने अपने परमाणु हथियारों की संख्या को आधा करने पर सहमति जतायी।

1995, हरियाणा के डबवाली में एक स्कूल में लगी भीषण आग में 360 लोगों की मौत हो गई।

2000, कलकत्ता का नाम आधिकारिक रूप से कोलकाता रखा गया।

2004, मिस्र की विमानन कंपनी फ्लैश एयरलाइंस के बोइंग 737 विमान 604 के दुर्घटनाग्रस्त होने से उसमें सवार सभी 148 लोग मारे गए।

2008, संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की 15 सदस्यीय टीम में लीबिया, वियतनाम, क्रोएशिया, कोस्टारिका और बुर्किनाफ़ासो का पांच नए अस्थायी सदस्यों के रूप में चयन किया गया।

2013, इराक़ के मुसय्यिब क्षेत्र में एक आत्मघाती बम विस्फोट में 27 शिया मुसलमानों की मौत हो गई और 60 अन्य घायल हो गए।

2015, नाइजीरिया के पूवोत्तर शहर बागा में तकफ़ीरी आतंकवादी गुट बोको हराम के हमले में लगभग 2000 लोगों की मौत हो गई।

 

3 जनवरी सन 1698 ईसवी को इटली के लेखक और कवि पीटर मेताज़ ताज़ियो का जन्म हुआ।  उन्होंने अपनी पहली ट्रेजडी 14 वर्ष की आयु में लिखी। ख्याति मिलने के बाद वे वियना जाकर ऑस्ट्रिया के राजदरबारी शायर बन गये। सन 1782 में उनका निधन हुआ।

3 जनवरी सन 1875 ईसवी को फ़्रांस के साहित्यकार और शब्दकोष विशेषज्ञ पियर लारोस का निधन हुआ। वे 1817 ईसवी में जन्में। लारोस शिक्षा प्राप्ति के साथ ही अपने पिता के कारखाने में काम भी करते थे। उसी समय से उन्होंने शब्दकोष का संकलन आरंभ कर दिया। लारोस उन लोगों में से थे जिन्होंने फ़्रांस के स्कूलों की शिक्षा पद्धति को सुधारा और पुस्तकों को सरल भाषा में लिखा।

3 जनवरी सन 1923 ईसवी को चेक गणराज्य के युवा शायर जेरी वोल्कर का टी बी के रोग से निधन हुआ। 1883 ईसवी में उनका जन्म हुआ था और थोड़े ही समय में उन्होंने शायरी में ख्याति प्राप्त कर ली। प्रथम विश्व युद्ध से वे बहुत प्रभावित हुए थे उन्होंने अपनी शायरी में भी इस बात को प्रतिबिंबित किया है। कम आयु होने के बावजूद वोल्कर को वरिष्ठ कवियों में गिना जाता है।

 

 

3 जनवरी सन 1993 ईसवी को रुस और अमरीका के तत्कालीन राष्ट्रपतियों बोरिस येल्तसिन और बिल क्लिंटन ने स्टार्टटू नामक समझौते पर हस्ताक्षर किये। इस समझौते के अनुसार दोनों पक्ष वचनबद्ध हुए कि अपने 2 परमाणु हथियार भंडारों का दो तिहाई भाग कम करेंगे। यह समझौता परमाणु हथियारों को कम करने के रुस और अमरीका के स्टार्ट वन समझौते का पूरक है। स्टार्ट वन पर 1987 ईसवी में रुस के राष्ट्रपति मीख़ाईल गोरबाचोफ़ और अमरीकी राष्ट्रपति रोनाल्ड रीगन ने हस्ताक्षर किये। दोनों पक्षों ने समझौता किया था कि वे अपने कम और मध्यम दूरी के मारक प्रक्षेपास्त्रों को नष्ट करेंगे। अमरीका ने स्टार्ट टू समझौता इस लिए किया क्योंकि सोवियत संघ के विघटन के बाद रुस ने पश्चिम के साथ सहकारिता की नीति अपना ली थी और अमरीका के लिए कोई बड़ा ख़तरा नहीं रह गया था।

 

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13 दय वर्ष 1367 हिजरी शम्सी को इस्लामी क्रांति के संस्थापक स्वर्गीय इमाम ख़ुमैनी ने सोवियत संघ के अंतिम राष्ट्रपति मीख़ाइल गर्बाचौफ़ को मार्कसिज़्म को छोड़कर इस्लाम का दामन थामने का निमंत्रण दिया। इमाम ख़ुमैनी ने गर्बाचौफ़ के नाम अपने संदेश में उनको संबोधित करते हुए लिखा कि वास्तविकता को पहचानना चाहिए, आपके देश की मुख्य समस्या सत्ता, अर्थव्यवस्था और स्वतंत्रता नहीं है बल्कि आपकी मुख्य समस्या ईश्वर पर सच्चा ईमान न रखना है। यही वह समस्या है जिसने पश्चिम को बंद गली में पहुंचा दिया है या पहुंचा देगा। आपकी मुख्य समस्या ईश्वर, सृष्टि और रचयिता से दीर्घकालीन संघर्ष है। इमाम ख़ुमैनी ने अपने संदेश में कहा कि यह बात सब पर स्पष्ट है कि कम्युनिज़्म संग्राहलयों की ही शोभा बनेगा क्योंकि मार्कसिज़्म मनुष्य की वास्तविक आवश्यकताओं में से किसी एक का भी उत्तर नहीं दे सकता। उसके बाद इमाम ख़ुमैनी ने गर्बाचौफ़ को सलाह देते हुए कहा कि मैं आपसे कहता है कि आप इस्लाम के बारे में गंभीरता से शोध करें । प्रत्येक दशा में सोवियत नेताओं द्वारा इमाम ख़ुमैनी की शिक्षाओं की अनदेखी के कारण केवल दो वर्ष बाद मार्कसिज़्म के बारे में उनकी भविष्यवाणी व्यवहारिक हुई और वर्ष 1991 में सोवियत संघ के विघटन के बाद मार्कसिज़्म इतिहास के ठंडे बस्ते में चला गया।

 

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7 जमादिउल औवल सन 389 हिजरी क़मरी को विख्यात इस्लामी इतिहासकार और क़ारी इब्ने ग़ल्बून का निधन हुआ। वे सन ३०९ हिजरी क़मरी में सीरिया के हलब नामक क्षेत्र में जन्में थे किंतु वे मिस्र जाकर रहने लगे जहॉ उन्होंने वरिष्ठ धर्मगुरुओं और विद्वानों की सेवा में रहकर व्यापक ज्ञान प्राप्त किया। उन्हें पवित्र कुरआन की तिलावत की कला की पूर्ण जानकारी प्राप्त थी तथा इस कला में वे दक्ष हो गये।

उन्होंने इस कला के संबंध में स्वंय भी कुछ नियम बनाए हैं जिन्हें उनके एक शिष्य मक्की बिन अबीतालिब ने अलकश्फ़ नामक एक पुस्तक में बयान किया है। इसी प्रकार उन्होंने इस कला से संबंधित अलइरशाद नामक पुस्तक लिखी।

 

7 जमादिउल औवल सन 1386 हिजरी क़मरी को मिस्र के विख्यात विद्वान और संघर्षकर्ता सैयद कुत्ब को उनके दो साथियों के साथ मृत्युदंड दे दिया गया।

सैयद कुत्ब अपने राजनैतिक संघर्ष के दौरान हसन अलबन्ना से परिचित हुए और इखवानुल मुसलेमीन नामक संगठन से जुड़ गये। मिस्र के तत्कालीन राष्ट्रपति जमाल अब्दुन्नासिर और उक्त संगठन के बीच मतभेद उत्पन्न हो जाने के बाद सैयद कुत्ब को भी दूसरे सदस्यों के साथ गिरफ़तार किया गया और फिर फांसी दे दी गयी।

सैयद क़ुत्ब का मानना था कि पूर्वी और पश्चिमी ब्लॉक दोनों ही मुसलमानों के विरुद्ध सक्रिय हैं और दोनों ही इस्लामी देशों को लूटने के लिए एक होकर मुसलमानों के विरुद्ध युद्ध के लिए उठ खड़े हुए है।