Jan ०३, २०१८ २२:३० Asia/Kolkata

4 जनवरी वर्ष 1998 को बांग्लादेश ने भारत को उल्फ़ा महासचिव अनूप चेतिया को सौंपने से इन्कार कर दिया।

  • 4 जनवरी वर्ष 1966 को भारत के प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री और पाकिस्तान के जनरल अय्यूब ख़ान के बीच भारत - पाकिस्तान सम्मलेन की शुरूआत हुई। भारत और पाकिस्तान के बीच संघर्षविराम समझौता कराने के उद्देश्य से ताशकंद सम्मेलन का आयोजन हुआ। इस समझौते के परिणाम स्वरूप भारत और पाकिस्तान के बीच दूसरा युद्ध समाप्त हो गया किंतु दोनों देशों के बीच तनाव अब भी जारी है।
  • 4 जनवरी वर्ष 1972 को नयी दिल्ली में इंस्टिट्यूट ऑफ क्रिमिनालॅजी एंड फारेंसिक साइंस का उद्घाटन हुआ।
  • 4 जनवरी वर्ष 1990 को पाकिस्तान में दो ट्रेनों की टक्कर में लगभग 307 लोग मारे गए और उससे दोगुने घायल हुए।
  • 4 जनवरी वर्ष 1998 को बांग्लादेश ने भारत को उल्फ़ा महासचिव अनूप चेतिया को सौंपने से इन्कार कर दिया।
  • 4 जनवरी वर्ष 1999 को मंगल ग्रह पर भाप का विश्लेषण करने हेतु अमेरिकी यान 'मार्स पौसर लैंडर प्रोब' का प्रस्थान हुआ।
  • 4 जनवरी वर्ष 2002 को ब्रिटिश प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर भारत पहुँचे।
  • 4 जनवरी वर्ष 2004 को भारत के प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री जफ़रुल्लाह ख़ान जमाली के बीच इस्लामाबाद में वार्ता आयोजित हुई।
  • 4 जनवरी वर्ष 2006 को दुबई के शासक शैख़ मकतूम बिन रशीद अल मकतूम का निधन हुआ।
  • 4 जनवरी वर्ष 2008 को गुजरात में मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी मंत्रीमण्डल में 18 नए मंत्रियों को पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलायी गयी।
  • 4 जनवरी वर्ष 2008 को अमेरिका ने श्रीलंका को सैन्य उपकरणों और सेवाओं की आपूर्ति पर रोक लगायी।
  • 4 जनवरी वर्ष 2009 को पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी ने यूपीए से नाता तोड़ लिया।
  • 4 जनवरी वर्ष 2010 को भारत में स्टॉक एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया के आदेश पर शेयर बाज़ारों के खुलने का समय एक घंटा पहले सुबह 9 बजे कर दिया गया।

4 जनवरी वर्ष 1998 को बांग्लादेश ने भारत को उल्फ़ा महासचिव अनूप चेतिया को सौंपने से इन्कार कर दिया।उल्फ़ा या युनाइटेड लिबरेशन फ्रॉन्ट ऑफ असम भारत के पूर्वोत्तर राज्य असम में सक्रिय एक प्रमुख आतंकवादी और उग्रवादी संगठन हैं। सशस्त्र संघर्ष के द्वारा असम को एक स्वतंत्र राज्य बनाना इसका लक्ष्य है। भारत सरकार ने इसे सन १९९० में प्रतिबन्धित कर दिया और इसे एक 'आतंकवादी संगठन' के रूप में वर्गीकृत किया।

उत्तरपूर्वी भारत में सक्रिय ढ़ेर सारे आतंकवादी संगठनों में से एक आतंकवादी संगठन उल्फा है। उल्फा का पूरा नाम यूनाइटेड लिबरेशन फ्रंट ऑफ असम है लेकिन संगठन उल्फा के नाम से ही प्रचलित है। सैन्य संघर्ष के जरिए संप्रभु समाजवादी असम को स्थापित करने के उद्देश्य से भीमकान्त बुरागोहाँइ, राजीव राजकोँवर उर्फ अरबिन्द राजखोवा, गोलाप बरुवा उर्फ अनुप चेतिया, समिरण गोगई उर्फ प्रदीप गोगई, भद्रेश्वर गोहाँइ और परेश बरुवा ने 7 अप्रैल 1979 में शिवसागर के रंघर में उल्फा की स्थापना की। ऐसा माना जाता है कि 1986 में उल्फा का संपर्क नैशनलिस्ट सोशलिस्ट काउंसिल ऑफ नागालैंड (एनएससीएन) और म्यांमार में सक्रिय संगठन काछिन रेबेल्स से हुआ। 1989 में इसे बांग्लादेश में कैंप लगाने की छूट मिल गई और 1990 के आते-आते उल्फा ने कई हिंसक वारदातों को अंजाम दिया।

अमेरिकी गृह मंत्रालय ने अन्य संबंधित आंतकवादी संगठनों की सूची में उल्फा को भी शामिल किया है। उल्फा उल्फा अपने-आप को भारत के खिलाफ सुंप्रभु और स्वतंत्र असम की स्थापना में संघर्षरत क्रांतिकारी राजनीतिक संगठन कहता है। उल्फा का कहना है कि असम कभी भी भारत का हिस्सा नहीं था। उल्फा का दावा है कि असम जिन ढ़ेर सारी मुश्किलों का सामना कर रहा है उनमें राष्ट्रीय पहचान सबसे प्रमुख समस्या है। इसलिए उल्फा स्वतंत्र दिमाग से संघर्षरत लोगों का प्रतिनिधित्व कर रहा है। ऐस लोग जो नस्ल, जनजाति, जाति, धर्म और राष्ट्रीयता से प्रभावित नहीं हैं।

जबकि भारत सरकार ने उल्फा को आतंकवादी संगठनों की श्रेणी में रखा है और प्रीवेंशन एक्ट के तहत उल्फा को प्रतिबंधित किया है। भारत ने उल्फा के खिलाफ भारतीय सेना द्वारा संचालित ऑपरेशन बजरंग शुरू किया है। सरकार ने उल्फा पर पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई और बांग्लादेशी खुफिया एजेंसी डीजीएफआई से संपर्क बना भारत के विरुद्ध छद्म युद्ध छेड़ने का आरोप लगाया है।

 

4 जनवरी सन 1573 ईसवी को ईसाइयों के नेता पोप ग्रीगोरी सपतम की पहल से एक सम्मेलन आयोजित हुआ। जिसमें ईसाई देशों के धर्मगुरुओं ने भाग लिया। इस सम्मेलन में निर्णय लिया गया कि धर्मगुरुओं की नियुक्ति के मामले में इन देशों के राजा कोई हस्तक्षेप न करें। इस निर्णय के कारण ईसाई धर्मगुरुओं और राजाओं के बीच लम्बे रक्त रंजित युद्ध हुए।

 

4 जनवरी सन 1642 ईसवी को ब्रिटेन के भौतिक शास्त्री विचारक व गणितज्ञ, आइज़क न्यूटन का जन्म हुआ। 24 वर्ष की आयु में वे मेकनिज़्म से संबंधित महत्वपूर्ण नियम का पता लगाने में सफल हुए। उन्होंने इन नियमों को अंतरिक्ष में पाये जाने वाले ग्रहों के संबंध में प्रयोग किया। उन्होंने ग्रेविटी अथवा गुरुकर्षण के मुख्य नियमों का पता लगाया और महत्वपूर्ण आविष्कारों की आधार शिला रखी। न्यूटन ने अपनी महत्वपूर्ण पुस्तक गणित के प्राकृतिक नियम में संचरण के तीनों नियमों का उल्लेख किया है। सन 1727 में उनका निधन हुआ।

 

4 जनवरी सन 1961 ईसवी को मोरक्को के दारुल बैज़ा नगर में इसी नाम का एक राजनैतिक सम्मेलन आयोजित हुआ इसका उददेश्य एक अफ़्रीक़ी राजनैतिक ब्लॉक को अस्तित्व में लाना था। यह सम्मेलन मिस्र के तत्कालीन राष्ट्रपति जमाल अब्दुन्नासिर की पहल का परिणाम था। अलजीरिया, घाना, गिनी, माली मोरक्को, मिस्र और सीरिया ने इसमें भाग लिया था। इस सम्मेलन में अफ़्रीक़ा की एक संयुक्त सैनिक कमान और मंडी बनाने के प्रस्ताव पारित किये गये किंतु इन प्रस्तावों को व्यावहारिक रुप नहीं दिया जा सका।

 

4 जनवरी सन 1948 ईसवी को म्यानमार ने ब्रिटेन से स्वतंत्रता प्राप्त की और आज का दिन देश में राष्ट्रीय दिवस के रुप में मनाया जाता है। 19वीं शताब्दी से यह देश ब्रिटेन के अधिकार में चला गया था और 19वीं शताब्दी के मध्य में इसका भारत में विलय हो गया जो उस समय ब्रिटेन का उपनिवेश था। द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान इस देश पर जापान का अधिकार हो गया किंतु इस युद्ध में जापान  की पराजय के बाद म्यानमार उसके अधिकार से निकल गया और अंतत: 1948 ईसवी में इस देश को पूर्ण रुप से स्वतंत्रता मिली।

 

4 जनवरी सन 2002 ईसवी को इटली के सरडीनिया द्वीप में विश्व के सबसे लम्बी आयु वाले पुरुष ऐटोनिया टोडे का निधन हुआ जिसके कुछ ही घंटों बाद विश्व की सबसे वृद्ध महिला मारिया ग्रेज़िया ब्रोकोलों का इटली की राजधानी रोम के दक्षिण में स्थित एक कस्बे में निधन हुआ। टोडे की आयु 112 वर्ष और मारिया ब्रोकोलो की आयु 110 दस वर्ष थी।

 

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8 जमादिल अव्वल सन 1313 हिजरी क़मरी को मुसलमान धर्मगुरु मीरज़ा मोहम्मद बाक़िर ज़ैनुल आबेदीन ख़ुन्सारी का ईरान के इस्फ़हान नगर में देहान्त हुआ। वह बहुत बड़े धर्मगुरु व पैग़म्बरे इस्लाम तथा उनके पवित्र परिजनों के कथनों के व्याख्याकार थे। वे इस्फ़हान के धार्मिक शिक्षा केन्द्र के प्रधानाचार्य भी थे। उन्होंने अनेक किताबें लिखीं जिनमें रौज़ातुल्ल जन्नात और शरहे लुमा पर हाशिया नामक किताबे उल्लेखनीय हैं।

 

8 जमादीउल औवल सन 1323 हिजरी क़मरी को मिस्र के इस्कंदरिया नगर में विख्यात मुसलमान संघर्षकर्ता शैख़ मोहम्मद अब्दोह का निधन हुआ। उन्होंने अलअज़हर विश्वविद्यालय में शिक्षा प्राप्त करना आरंभ किया। फिर वे जमालुद्दीन असदाबादी नामक विख्यात संघर्षकर्ता और धर्मगुरु की सेवा में उपस्थित हुए और उनके विचारों से लाभ उठाया। सैयद जमालुद्दीन असदाबादी को देशनिकाला दे दिए जाने के बाद अबदोह ने उनका स्थान संभाला किंतु मिस्र में ब्रिटेन का प्रभाव बढ़ने के बाद अब्दोह को भी देशनिकाला देकर सीरिया भेज दिया गया। सीरिया में 6 वर्ष तक शिक्षा दीक्षा में व्यस्त रहने के बाद वे पेरिस चले गये और वहॉ उरवतुल ऊस्क़ा नामक समाचार पत्र निकालने में जमालुद्दीन असदाबादी से सहकारिता की। वे दोबारा मिस्र लौटे और न्यायाधीश बना दिए गये। अपने गुरु जमालुद्दीन असदाबादी की ही भॉति वे भी इस्लामी जगत की एकता के बड़े समर्थक थे।