Jan ०३, २०१७ १०:२६ Asia/Kolkata

5 जनवरी सन 1691 ईसवी को योरोप में पहली बार करंसी नोट छपा।

यह काग़ज़ी मुद्रा स्वीडन के बैंक ने जारी की थी। इससे पहले तक स्वीडन में सिक्का चलता था जो चौकोर और बड़े आकार का होता था। सबसे पहले छपने वाले नोटों में से कुछ नोट अब भी सुरक्षित हैं जो स्वीडन के संग्रहालय में रखे हुए हैं।

 

5 जनवरी सन 1805 ईसवी को फ़्रांस के इतिहासकार एगोस्टीन टीयेरी का जन्म हुआ। 15 वर्ष की आयु से उन्होंने इतिहास का गहरा अध्ययन आरंभ किया। वे इतिहास लिखने की प्रचीन शैली से सहमत न थे। इस लिए उन्होंने इतिहास लिखने की नयी शैली अपनायी। टीयेरी अपने जीवन के अंतिम वर्षों में नेत्रहीन हो गये और वर्ष 1856 में उनका निधन हुआ।

5 जनवरी सन 1809 ईसवी को ब्रिटेन और उसमानी शासन के बीच डारडानेल समझौता हुआ जिसके अनुसार ब्रिटेन ने उसमानी शासक के मिस्र सहित समस्त क्षेत्रों को ख़ाली करने का वचन दिया। इस के जवाब में उसमानी शासन ने अपने क्षेत्र में ब्रिटेन के कांउसलर को स्वीकार किया। इस समझौते के पीछे ब्रिटेन का उद्देश्य भूमध्य सागर में अपनी नौकाओं की रूस के सैनिकों से रक्षा करना था क्योंकि इस समझौते के अनुसार उसमानी शासन ने वचन दिया था कि शांति के काल में वो रूस या किसी भी देश की युद्धक नौकाओं को डारडानेल जलडमरु  मध्य से पार होने की अनुमति नहीं देगा।

 

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15 देई वर्ष 1357 हिजरी शम्सी को ईरान में विश्व विद्यालयों के छात्रों ने अमरीका के तत्कालीन राष्ट्रपति जिमी कार्टर की ईरान यात्रा और उनके द्वारा मुहम्मद रज़ा शाह के समर्थन पर आपत्ति स्वरूप क्लासों का बहिष्कार किया और विश्व विद्यालों को बंद करा दिया। कार्टर यह प्रचार कर रहे थे कि वे मानवाधिकार के समर्थक और तानाशाही सरकारों को हथियार बेचने के विरोधी हैं लेकिन उनकी सरकार ने ईरान की तानाशही सरकार के साथ बड़े- बड़े सामरिक समझौते किए और ईरान में मानवाधिकार के व्यापक हनन की अनदेखी की। कार्टर ने अपनी ईरान यात्रा में तानाशाह मुहम्मद रज़ा पहलवी को जनता में लोकप्रिय और ईरान को स्थिरता का टापु बताया लेकिन जल्द ही ईरानी जनता का स्वतंत्रता आंदोलन आरंभ हो गया और कार्टर की यात्रा के तेरह महीने बाद, शाह की सरकार गिर गई और ईरान में इस्लामी प्रजातांत्रिक व्यवस्था स्थापित हुई।

 

पंद्रह दई वर्ष 1373 हिजरी शमसी को ईरानी वायु सेना के तत्कालीन कमांडर ब्रिगेडियर जनरल मन्सूर सत्तारी एक हवाई दुर्घटना में शहीद हो गए। उनका जन्म वर्ष 1327 में तेहरान के निकट एक क्षेत्र में हुआ था। कॉलेज की शिक्षा पूरी करने के बाद उन्होंने कैडिट कॉलेज में प्रवेश लिया। ब्रिगेडियर जनरल सत्तारी ने कैडिट कॉलेज में शिक्षा पूरी करने के बाद विश्व विद्यालय में प्रवेश लिया किंतु वर्ष 1359 में इराक़ की बास सरकार की सेना द्वारा ईरान पर हमले के बाद वे देश की रक्षा के लिए रणक्षेत्र में चले गए। उन्होंने युद्ध के दौरान देश की वायु सीमा की रक्षा में बेजोड़ साहस और कौशल का प्रदर्शन किया और इसी कारण उन्हें वर्ष 1365 में देश की वायु सेना का प्रमुख नियुक्त किया गया। अंतत: ब्रिगेडियर जनरल मन्सूर सत्तारी, वायु सेना के कई कमांडरों के साथ एक अभियान से वापसी के समय, विमान में तकनीकी ख़राबी आ जाने से शहीद हो गए।

 

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9 जमादिल अव्वल सन 1346 हिजरी क़मरी को ईरान के प्रसिद्ध विद्वान आयतुल्लाह हिल उज़मा सैयद अबू तुराब ख़ानसारी का स्वर्गवास हुआ। वे सन 1271 हिजरी क़मरी में ईरान के केन्द्रीय नगर ख़ानसार में जन्मे और आरंभिक शिक्षा प्राप्त करने के बाद पहले इस्फ़हान के धार्मिक केन्द्र गए और वहां से उच्च शिक्षा की प्राप्ति के लिए इराक़ के नजफ नगर चले गए जहां उन्होंने अपने समय के प्रतिष्ठित व प्रसिद्ध धर्मगुरूओं से शिक्षा प्राप्त की। उसके बाद उन्होंने इराक़ के धार्मिक केन्द्र में शिक्षा देना आरंभ किया। उन्होंने बहुत सी पुस्तकें लिखी हैं जिनमें मिस्बाहुस्सालेहीन का नाम लिया जा सकता है।

 

9 जमादिल अव्वल वर्ष 786 हिजरी क़मरी को शहीदे अव्वल के नाम से प्रसिद्ध इस्लामी जगत के महान धर्मगुरू मुहम्मद बिन जमाल मक्की आमेली रहमतुल्लाह अलैह शहीद हुए। उनका जन्म वर्ष 734 हिजरी क़मरी में लेबनान के जबले आमिल क्षेत्र के एक गांव में हुआ। उन्होंने ज्ञान व प्रतिष्ठा के घराने में प्रशिक्षण पाया और अपने घर से धार्मिक ज्ञान की प्राप्ति आरंभ की। शहीदे अव्वल ने अल्लामा हिल्ली जैसे अपने समय के महान शिक्षकों से ज्ञान अर्जित किया और अपनी धार्मिक जानकारियों में वृद्धि की। वे धार्मिक शिक्षा के अतिरिक्त शेर और साहित्य में भी दक्षता रखते थे और कभी कभी अपने ऊपर होने वाली आपत्तियों का उत्तर शेर में दिया करते थे। शहीदे अव्वल ने बावन वर्ष की अपनी आयु में अनेक यात्राओं और एक स्थान से दूसरे स्थान की ओर पलायन के बावजूद कई किताबें लिखी हैं जिनमें अलबाक़ियातुस्सालेहात और लुमआ का विशेष रूप से नाम लिया जा सकता है। आज ही के दिन उनके कट्टर विरोधियों के हाथों उन्हें शहीद कर दिया गया।