Jan ०८, २०१७ ०९:५१ Asia/Kolkata

1613, मुग़ल सम्राट जहाँगीर ने ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कम्पनी को सूरत में कारख़ाना लगाने की अनुमति दी।

1681, ब्रैडेनबर्ग और फ़्रांस के बीच रक्षा गठबंधन हुआ।

1753, स्पेन नरेश जोकिन मुरात ने नेपोलियन बोनापार्ट का साथ छोड़ दिया।

1866, आस्ट्रेलिया जाते समय लंदन नामक जहाज़ में हुई दुर्घटना में 231 लोगों की डूबकर मौत हो गई।

1923, प्रथम विश्व युद्ध की क्षपि-पूर्ति देने के लिए बाध्य करने के उद्देश्य से ब्रिटेन के विरोध के बावजूद, फ्रांस और बेल्जियम के सैनिकों ने जर्मनी के रूर क्षेत्र पर क़ब्जा कर लिया।

1942, द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान जापान ने कुआलालंपुर पर क़ब्ज़ा कर लिया।

1955, भारत में अख़बारी काग़ज़ का उत्पादन शुरू हुआ।

1972, पूर्वी पाक्स्तान का नाम बदलकर बांग्लादेश किया गया।

1973, बांग्लादेश को पूर्वी जर्मनी ने मान्यता प्रदान की।

1995, कार्टहेना, कोलम्बिया में विमान दुर्घटना में 52 व्यक्ति मारे गये।

2001, भारत और इंडोनेशिया के बीच पहला रक्षा समझौता हुआ।

2006, ओकलाहोमा राज्य के जंगलों में लगी आग को अमरीकी राष्ट्रपति जार्ज डब्ल्यू बुश ने संघीय आपदा की घोषणा की।

2008, संघर्ष विराम बहाल करने की लिट्टे की अपील को श्रीलंकाई सरकार ने ठुकराया।

2010, भारत ने उड़ीसा के बालासोर में हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइल अस्त्र के दो सफल परीक्षण किए।

2010, अमरीका द्वारा ताइवान को मिसाइल रोधी प्रणाली बेचने पर सहमति देने के एक हफ्ते बाद ही चीन ने मध्यम दूरी की मिसाइल रोधी प्रणाली का सफ़ल परीक्षण किया।

 

 

11 जनवरी सन 1325 ईसवी को एज़टेक शासन श्रृंखला के अंतिम शासक ने मेक्सिको नगर की आधारशिला रखी। एज़टेक, दक्षिणी अमरीका की रेड इंडियन जाति के लोग थे जो 12वीं शताब्दी ईसवी में मेक्सिको आए थे। उनका जीवन कृषि पर आधारित था। १६वीं शताब्दी से इस क्षेत्र में स्पेन का वर्चस्व स्थापित हुआ। मेक्सिको के आधिपत्य को लेकर एज़टेक जाति तथा स्पेन के मध्य संघर्ष आरंभ हुआ जिसमें स्पेन को विजय प्राप्त हुई। इसी बीच स्पेन से आकर लाखों लोग मेक्सिको में बस गये।

 

11 जनवरी सन 1889 ईसवी को फ्रांस के रसायनशास्त्री मिशल यूजीन शेवरल का निधन हुआ। वे 1786 ईसवी में जन्मे थे। उन्होंने दूध और विभिन्न वनस्पतियों के तैलीय पदार्थ के संबंध में महत्वपूर्ण शोधकार्य किया। उन्होंने एक प्रकार की मोमबत्ती का अवष्कार किया  जिसे चूने की मोमबत्ती कहा जाता है।

 

11 जनवरी 1842 ईसवी को मशहूर अमरीकी विचारक व दार्शनिक विलियम जेम्ज़ का न्यूयॉर्क में जन्म हुआ। उन्होंने आरंभिक व माध्यमिक शिक्षा फ़्रांस में हासिलज की थी। उसके बाद उन्होंने मनोविज्ञान और फिर दर्शनशास्त्र का अध्ययन किया। उन्होंने बड़े अध्ययन के बाद प्रैग्मटिज़्म या व्यवहारवाद का विचार पेश किया। विलियम जेम्ज़ का मानना था कि इंसान की मुक्ति उसके संकल्प पर निर्भर है। उनका मानना था कि दुनिया हर तरह से अच्छी नहीं है लेकिन अगर हम चाहें तो उसे अच्छा बना सकते हैं। दुनिया में एक व्यवस्था नहीं है बल्कि अनेक व्यवस्थाएं है। एक दूसरे की विरोधी प्रक्रियाएं हैं जिनमें कुछ अच्छी तो कुछ बुरी हैं। हमारी ज़िम्मेदारी है कि हम बुराई को दूर करें और अच्छाई को स्थापित करें। उनका यह भी मानना था कि भलाई के लिए लड़ने का अगर परिणाम न भी निकले तब भी इस क़दम से ख़ुशी हासिल होती है। यह बात भी याद रखना चाहिए कि इस प्रकार की जंग में ईश्वर हमारा मददगार है। उन्होंने अनेक मुल्यवान किताबें लिखीं जिसमें प्रैग्मटिज़्म ए न्यू नेम फ़ॉर ओल्ड वेज़ ऑफ़ थिन्किंग बहुत मशहूर है।

विल्यम जेम्ज़ का 26 अगस्त 1910 में 68 साल की उम्र में देहान्त हुआ।

 

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21 दय सन 1335 हिजरी शम्सी को ईरान के विख्यात भूशास्त्री अबुल क़ासिम सहाब का निधन हुआ। वे सन 1266 हिजरी शम्सी में तफ़रिश नगर में जन्मे और इसी नगर में शिक्षा ग्रहण की। अबुल क़ासिम सहाब को अरबी, फ्रांसीसी, अंग्रेज़ी और जर्मन भाषाओं का ज्ञान था। उन्होंने अलग अलग विषयों पर लगभग 70 पुस्तकें लिखी हैं। उन्होंने छह प्रतियों पर आधारित कारपेन्टर की जियोग्रैफ़ी नामक पुस्तक का फ़ारसी भाषा में अनुवाद किया। वर्ष 1315 हिजरी शम्सी में उन्होंने भूगोल संस्था की स्थापना की जो आज भी महत्वपूर्ण संस्था के रूप में पहचानी जाती है। उन्होंने इस संस्था में एक पुस्तकालय बनाया जिसमें भूगोल के विषय पर 34 हज़ार पुस्तकें और 20 हज़ार मानचित्र मौजूद हैं।

अबुल क़ासिम सहाब

 

21 दय 1390 हिजरी शम्सी को इस्लामी गणतंत्र ईरान के परमाणु वैज्ञानिक मुस्तफ़ा अहमदी रौशन, ज़ायोनी शासन के एजेन्टी के हाथों शहीद हुए।

वह ईरान के शांतिपूर्ण परमाणु कार्यक्रम के संदर्भ में शहीद होने वाले चौथे वैज्ञानिक थे। वह 1358 हिजरी शम्सी को पश्चिमी ईरान के हमेदान शहर के निकट एक गांव में पैदा हुए। स्कूल से शिक्षा हासिल करने के बाद उन्होंने विश्वविद्यालय में केमिकल इंजीनियरिंग की शिक्षा हासिल की थी। वह ईरान के शांतिपूर्ण परमाणु कार्यक्रम के लिए काम करते थे। जिस समय वह अपने दफ़्तर जा रहे थे कि ज़ायोनी शासन के एजेन्ट के हमले का निशाना बने और उनके साथ उनका ड्राइवर रज़ा क़शक़ाई भी शहीद हुआ। उनकी शहादत के कुछ दिन बाद उनका और ईरान के अन्य परमाणु शहीदों के हत्यारों का गुट पकड़ा गया। इस गुट के सदस्यों ने अपनी स्वीकारोक्ति में ज़ायोनी शासन के साथ संपर्क और इस शासन के तत्वों के हाथों ट्रेनिंग हासिल करके ईरान के परमाणु वैज्ञानिकों को शहीद करने की बात कही।

परमाणु वैज्ञानिक मुस्तफ़ा अहमदी रौशन

 

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15 जमादिउल अव्वल सन 38 हिजरी क़मरी को एक कथन के अनुसार इमाम ज़ैनुल आबेदीन अलैहिस्सला का जन्म मदीना नगर में हुआ था। आप हज़रत इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम के पुत्र थे । हज़रत इमाम ज़ैनुल आबेदीन अलैहिस्सलाम, उपासना, दया, विनम्रता और लोगों के साथ अच्छा व्यवहार करने में अपने समय में सबसे आगे थे। आप उपासना और रात्रि जागरण में सदैव व्यस्त रहते थे और बहुत अधिक सज्दे करने के कारण आपको सज्जाद के नाम से याद किया जाता है। हज़रत इमाम ज़ैनुल आबेदीन अलैहिस्सलाम ने आशूरा के अंदोलन को जो इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम ने सत्य और न्याय की स्थापना के लिए आरंभ किया था, पूरे संसार में फैलाया और बहुत से अवसरों पर अमवी शासक के अत्याचारों को जगज़ाहिर किया। आप करबला की घटना के बाद 35 वर्ष तक जीवित रहे और इस्लामी कथनों के अनुसार उमवी शासक हेशाम बिन अब्दुल मलिक ने आपको शहीद किया। हज़रत इमाम ज़ैनुल आबेदीन अलैहिस्सलाम की दुआओं के संग्रह का नाम सहीफ़ये सज्जादिया है जिसे ज़बूरे आले मुहम्मद भी कहा जाता है। यह पुस्तक आध्यात्म, तत्वदर्शिता और अंतर्ज्ञान की पुस्तकों में गिनी जाती है।

 

15 जमादिउल अव्वल सन 1230 हिजरी क़मरी को तंबाकू के बहिष्कार आंदोलन के नेता और महान वरिष्ठ धर्म गुरू आयतुल्लाह मिर्ज़ा हसन शीराज़ी जो महान मिर्ज़ा के नाम से प्रसिद्ध थे, शीराज़ में जन्मे। वे बहुत द्धिमान थे और बीस वर्ष की आयु में मुजतहिद बने। वे 259 हिजरी क़मरी में अपने उस्ताद शैख़ मुर्तज़ा अनसारी के स्वर्गवास के बाद नजफ के धार्मिक शिक्षा केन्द्र के प्रमुख बने और मुसलमानों के नेतृत्व की ज़िम्मेदारी संभाली। मिर्ज़ा शीराज़ी धार्मिक और सामाजिक क्षेत्रों के अतिरिक्त राजनैतिक क्षेत्र में भी पैनी दृष्टि रखते थे। उनका महत्त्वपूर्ण राजनैतिक कारनामा ब्रिटिश साम्राज्य के विरुद्ध चलाया जाने वाला तंबाकू का बहिष्कार आंदोलन है जिसके द्वारा उन्होंने ईरानी समाज पर ब्रिटेन के बढ़ते हुए प्रभावों को समाप्त किया और इस आंदोलन ने ईरान पर ब्रिटिश सम्राज्य के ख़ूनी चंगुल को भी तोड़ दिया। ईरान के तानाशाह नासिरूद्दीन शाह क़ाजार ने ईरानी तंबाकू की खेती और व्यापार का लाइसेंस एक ब्रिटिश कंपनी को दे दिया था जिसके बाद ईरान के नगरों में ब्रिटिश लोगों ने अपने केन्द्रों की स्थापना की। मिर्ज़ा शीराज़ी और अन्य जागरूक धर्म गुरू इस षड्यंत्र को भांप गये और पूरे ईरान में यह आंदोलन चलाया गया। अंततः मिर्ज़ा शीराज़ी ने तंबाकू के हर प्रकार के उत्पाद को वर्जित करने का फ़त्वा जारी किया। जिसके परिणाम में पूरे ईरान में जन प्रदर्शन हुए और अंग्रेज़ों को ईरान से भागना पड़ा।

15 जमादिउल अव्वल सन 1301 हिजरी क़मरी को उरवतुल वुस्क़ा नामक समाचार पत्र पहली बार पेरिस में प्रकाशित हुआ। इस समाचार पत्र के संपादक सैयद जमालुद्दीन असदाबादी और शैख़ मुहम्मद अब्दोह थे। सैयद जमालुद्दीन असदाबादी ने मुसलमानों की एकता पर आधारित अपने उद्देश्यों की पूर्ति के लिए उरवतुल वुस्क़ा नाम एक संघ की स्थापना की थी और समाचार पत्र भी इसी नाम से आरंभ किया। समाचार पत्र के दोनों प्रबंधकों ने विभिन्न राजनैतिक और वैज्ञानिक हस्तियों के आलेख और साक्षात्कार प्रकाशित करके मुसलमानों की एकता और अपने विचारों की ओर लोगों का ध्यान आकर्षित किया किन्तु उस समय की कुछ सरकारों के राजनैतिक दबावों के कारण यह समाचार पत्र उसी वर्ष ज़िलहिज्जा में यूरोप, मिस्र, भारत और ईरान में कुछ महीने प्रकाशित होने के बाद बंद हो गया।