Jan ११, २०१७ १०:५१ Asia/Kolkata

12 जनवरी सन 1665 ईसवी को फ़्रांस के गणितज्ञ पियरडी फ़रमा का निधन हुआ।

वे 1601 ईसवी में पैदा हुए थे। फरमा डेकार्ट के समकालिक और उनसे तथा उनकी रचनाओं से पूरी तरह परिचित थे। उन्होंने गणित से संबंधित कई नियम बनाए जो उन्ही के नाम से जाने जाते हें। उन्होंने इस विषय में कई प्रसिद्ध पुस्तकें भी लिखीं हैं।

12 जनवरी सन 1708 को छत्रपति शाहू जी को मराठा शासक का ताज पहनाया गया।

12 जनवरी सन 1757 को ब्रिटेन ने पश्चिम बंगाल के बंदेल प्रांत को पुर्तग़ाल से अपने कब्जे में लिया।

12 जनवरी सन 1866 को लंदन में रॉयल एयरोनॉटिकल सोसायटी का गठन हुआ।

12 जनवरी सन 1908 को पेरिस स्थित एफिल टॉवर से पहली बार लंबी दूरी का वायरलेस संदेश भेजा गया।

12 जनवरी सन 1934 को भारत के स्वतंत्रता संग्राम के महान क्रान्तिकारी सूर्य सेन को चटगांव में फांसी दी गयी। उन्होने इंडियन रिपब्लिकन आर्मी की स्थापना की और चटगांव विद्रोह का सफल नेतृत्व किया।

12 जनवरी सन 1948 को महात्मा गांधी ने अपना अंतिम भाषण देकर सांप्रदायिक हिंसा के विरुद्ध अनशन में बैठने का फैसला किया।

12 जनवरी सन 1950 को स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद ‘संयुक्त प्रांत’ का नाम बदल कर ‘उत्तर प्रदेश’ रखा गया।

12 जनवरी सन 1964 को भारत के पूर्व गेंदबाज बापू नाडकर्णी ने मद्रास में इंग्लैंड के साथ पहले टेस्ट में लगातार 21 ओवर मेडन फेंके। छह गेदों के ओवर के इतिहास में यह अब तक रिकॉर्ड है।

12 जनवरी सन 1876 ईसवी को अमरीकी लेखक जैक लंदन का जन्म हुआ। उन्होंने अपने जीवन के कई वर्ष उत्तरी ध्रुव और दक्षिण के तूफ़ानी समुद्र में बिताए वे भॉति - भॉति की जातियों और लोगों से परिचित हुए। उन्होंने अपनी पुस्तकों में जिन दृश्यों का चित्रण किया है उनमें से लगभग सभी को उन्होंने स्वयं निकट से देखा था।

इस अमरीकी लेखक ने अपनी 40 वर्ष की आयु में 18 वर्ष लेखन में बिताए उन्होंने 51 लम्बी और 125 छोटी कहानियां लिखीं।

 

 

12 जनवरी वर्ष 2010 को कैरेबियन सागर के तटवर्ती देशों में एक भूकंप आया जिसकी तीव्रता रिक्टर स्केल पर सात डिग्री दर्ज की गई।  इस भूकंप में लगभग तीस हज़ार लोग मारे गए थे।  पिछले कुछ दशकों के दौरान यह भूकंप विश्व का सबसे बड़ा भूकंप बताया जाता है।  हैइटि के इस विधवंसकारी भूकंप में मूलभूत संरचना को बहुत क्षति पहुंची और बड़ी संख्या में लोग बेघर हो गए।  इस भूकंप से उबरने में हैइटि को बहुत समय लगा।   इस भीषण भूकंप के कारण विश्व के विभिन्न देशों ने भूकंप पीड़ितों को भारी मात्रा में राहत सामग्री भेजी।

 

 

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22 दय सन 1357 हिजरी शम्सी को ईरान में इस्लामी क्रान्ति के संस्थापक इमाम ख़ुमैनी ने अत्यंत संवेदनशीन समय में जब अमरीका अत्याचारी शासक शाह की सरकार को बचाने के लिए प्रयासरत था, क्रान्ति परिषद के गठन का आदेश दिया। इस परिषद का दायित्व शाह की सरकार के विरुद्ध जनता के संघर्ष को सुव्यस्थित करना तथा अंतरिम सरकार बनाने की भूमिका तैयार करना था। इमाम ख़ुमैनी ने अपने इस आदेश में बल दिया कि ईरान की मुसलमान जनता की इच्छा केवल शाह का ईरान से निकलना और राजशाही शासन व्यवस्था का अंत ही नहीं है बल्कि ईरानी राष्ट्र का संघर्ष ऐसे इस्लामी लोकतंत्र की स्थापना के लिए है जो जनता की स्वतंत्रता, ईरान की स्वाधीनता और सामाजिक न्याय की स्थापना को सुनिश्चित बनाता हो।

उल्लेखनीय है कि शाह की सरकार गिरने के बाद क्रान्ति परिषद ने ईरान की संसद मजलिसे शूराए इस्लामी के गठन से पहले तक इसके दायित्वों का निर्वाह किया।