Jan ११, २०१७ १२:५४ Asia/Kolkata

14 जनवरी सन 1875 ईसवी को फ़्रांस के अलज़ास नगर में अलबर्ट श्वेट्ज़र का जन्म हुआ।

वे एक अच्छे संगीतकार और चिकित्सक थे। उन्होंने चिकित्सा विज्ञान की शिक्षा पूरी करके अफ़्रीक़ा की यात्रा की और अपनी आयु के अंतिम दिनों तक आफ़्रीक़ा के वंचित लोगों की सहायता और उनके उपचार में लीन रहे। इस मानवप्रेमी चिकित्सक ने कई महत्वपूर्ण पुस्तकें लिखी हैं।

14 जनवरी  सन् 1514 में पोप लियो एक्स ने दासता के विरुद्ध आदेश पारित किया।

14 जनवरी  सन्  1641 में यूनाइटेड ईस्ट इंडिया कंपनी ने मलक्का शहर पर विजय प्राप्त की।

14 जनवरी  सन् 1659 में हुए एलवास के युद्ध में पुर्तग़ाल ने स्पेन को पराजित किया।

14 जनवरी  सन् 1760 में फ्रांसीसी जनरल लेली ने पांडिचेरी अंग्रेज़ों के हवाले कर दिया।

14 जनवरी  सन् 1761 में भारत में मराठा शासकों और अहमदशाह दुर्रानी के बीच पानीपत का तीसरा युद्ध हुआ।

14 जनवरी  सन् 1784 में अमरीका ने ब्रिटेन के साथ शांति संधि की पुष्टि की।

14 जनवरी  सन् 1809 में इंग्लैंड और स्पेन ने नेपोलियन बोनापार्ट के ख़िलाफ़ गठबंधन किया।

14 जनवरी  सन् नेपोलियन तृतीय की हत्या की साजिश का 1858 में भंडाफोड़ हुआ।

14 जनवरी  सन् पेरू ने स्पेन के ख़िलाफ़ 1867 में जंग का ऐलान किया।

14 जनवरी  सन् 1907 में हुए जमैका में भूकंप से किंगस्टन शहर तबाह हो गया और लगभग 900 से अधिक लोग मारे गये।

14 जनवरी  सन् रेमंड पोंकारे 1912 में फ्रांस के प्रधानमंत्री बने।

14 जनवरी  सन् फ्रांस के पूर्व प्रधानमंत्री जोसेफ कैलाक्स को 1918 में देशद्रोह के आरोप में गिरफ़्तार किया गया।

14 जनवरी  सन् 1969 में भारत के दक्षिणी राज्य मद्रास का नाम बदलकर तमिलनाडु किया गया।

14 जनवरी  सन् 1974 में विश्व फुटबाल लीग की स्थापना की गयी।

14 जनवरी सन 1942 ईसवी को मोरक्को की कासाब्लांका बंदरगाह पर इसी नाम से एक ऐतिहासिक सम्मेलन आरंभ हुआ। द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान आयोजित होने वाले इस सम्मेलन में अमरीकी राष्ट्रपति फ़्रैंकलिन रुज़वेल्ट और ब्रिटेन के प्रधान मंत्री चरचिल, संयुक्त देशों के दो महत्वपूर्ण देशों के राष्ट्रध्यक्षों के रुप में मौजूद थे।

इस सम्मेलन में इटली के सिसली क्षेत्र पर आक्रमण की योजना और अमरीका द्वारा शत्रु के मोर्चे पर बम्बारी जैसे विषयों की समीक्षा की गयी। इस सम्मेलन के समापन पर भाग लेने वाले देशों ने एक संयुक्त घोषण पत्र जारी किया जिसके अनुसार वे शत्रु के हथियार डालने तक निरंतर लड़ने के लिए प्रतिबद्ध हुए।

 

14 जनवरी सन 1991 ईसवी को ज़ायोनी शासन की गुप्तचर सेवा मोसाड के सदस्यों ने पी एल ओ के वरिष्ठ अधिकारी सलाह ख़ल्फ़ को उनके दो साथियों के साथ टयूनेशिया में शहीद कर दिया। सलाह ख़ल्फ फ़त्ह आंदोलन के सुरक्षा अधिकारी भी थे। एक स्वाधीन देश अर्थात टयूनेशिया की प्रभुसत्ता का उल्लंघन करके पी एल ओ के वरिष्ठ अधिकारियों की हत्या से ज़ायोनी शासन ने यह सिद्ध कर दिया कि वह अपने विरोधियों के दमन के समय किसी भी अंतर्राष्ट्रीय क़ानून की परवाह नहीं करता क्योंकि इस्राईल ने कई बार अपने फ़िलिस्तीनी और लेबनानी विरोधियों को दूसरे देशों में शहीद किया है।

 

14 जनवरी सन 1980 ईसवी को संयुक्त राष्ट्र संघ की महासभा ने एक प्रस्ताव पारित करके अफ़ग़ानिस्तान से विदेशी सैनिकों के बाहर निकलने की मांग की। यह निर्णय सन 1979 में सोवियत संघ द्वारा अफ़ग़ानिस्तान पर सैनिक आक्रमण के बाद लिया गया।

 

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24 दैय सन, 1357 हिजरी शम्सी को ईरान के अत्याचारी शासक शाह ने इस्लामी क्रान्ति की व्यापकता को देखते हुए अपने पिटठुओं को राजशाही परिषद के गठन का आदेश दिया ताकि जनता के विरोध को दबाया जा सके। इस परिषद का दायित्व शाह से उसके बेटे को सत्ता हस्तांतरण की भूमि समतल करना था किंतु ईरान की जागरुक जनता ने सड़कों पर निकल कर शाह के इस क़दम का विरोध किया और स्वर्गीय इमाम ख़ुमैनी की स्वदेश वापसी की मांग की। इमाम ख़ुमैनी ने इसी दिन पेरिस में घोषणा की कि वे शीघ्र ही एक क्रान्तिकारी सरकार का गठन करेंगे।

यह सूचना सुनकर राजशाही परिषद के अध्यक्ष जलालुद्दीन तेहरानी इमाम ख़ुमैनी से मिलने पेरिस गये किंतु इमाम ख़ुमैनी ने जलालुद्दीन तेहरानी से मिलने के लिए दो शर्तें रखीं। एक तो राजशाही परिषद की अध्यक्षता से उनका त्यागपत्र और दूसरे इस परिषद के ग़ैर क़ानूनी होने की घोषणा।तेहरानी ने अपने पद से त्यागपत्र दे दिया और इस प्रकार यह परिषद भंग हो गयी।

 

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18 जमादिउल अव्वल 328 हिजरी क़मरी को अरब शायर व लेखक अहमद बिन मुहम्मद का निधन हुआ। वह इब्ने अब्दो रब्बेह के नाम से प्रसिद्ध थे। उनकी प्रसिद्ध पुस्तक अक़दुल फ़रीद है जो इतिहास, शेर व शायरी और व्याकरण के विषय पर लिखी गयी है। उन्होंने बहुत से शेर भी लिखे हैं जिनमें उनकी पूर्वी भावना को भलिभांति देखा जा सकता है।

 

18 जमादिउल अव्वल सन 450 हिजरी कम़री को नज्जाशी के नाम से प्रसिद्ध दर्मगुरु अबुल अब्बास अहमद बिन अली का 78 वर्ष की आयु में इराक़ के नगर सामर्रा में स्वर्गवास हुआ। उनकी गिनती तत्कालीन प्रसिद्ध धर्मगुरूओं में होती थी। रेजाले नज्जाशी उनकी प्रसिद्ध और विश्वसनीय पुस्तक है।