बुधवार- 15 जनवरी
15 जनवरी 1870 को अमरीकी डेमोक्रेटिक पार्टी ने गधे को चुनावी चिन्ह के रूप में पहली बार इस्तेमाल किया।
15 जनवरी 1918 को भूतपूर्व मिस्री राष्ट्रपति जमाल नासिर का जन्म हुआ।
15 जनवरी 1943 को दुनिया की सबसे बड़ी दफ़्तरी इमारत पेन्टगॉन का निर्माण पूरा हुआ।
15 जनवरी 1975 को अंगोला की आजादी के लिए समझौते पर पुर्तग़ाल ने हस्ताक्षर किये।
15 जनवरी 2007 को इराकी अदालत के पूर्व प्रमुख एवं सद्दाम हुसैन के सौतेले भाई फ़ाँसी पर चढ़ाये गये।
15 जनवरी 2001 को दुनिया का सबसे बड़ा ऑनलाइन इन्साइक्लोपीडिया विकिपीडिया लॉन्च हुआ।
15 जनवरी सन 1839 ईसवी को एलसेल्वाडोर को केन्द्रीय अमरीकी संघ के विघटन के बाद औपचारिक रूप से स्वतंत्रता मिली किंतु स्वतंत्रता के एक शताब्दी बाद तक भी इस देश में शांति एवं स्थिरता स्थापित न हो सकी।
यह देश वर्षों तक स्पेन के अधिकार में था जिसे वर्ष 1821 ईसवी में स्वतंत्रता मिली और वर्ष 1824 में वह केन्द्रीय अमरीकी संघ का सदस्य बन गया बाद में यह संघ टूट गया और एलसेल्वाडोर को पूर्ण स्वतंत्रता प्राप्त हो गई। वर्ष 1931 में इस देश को गंभीर आर्थिक समस्याओं का सामना हुआ जिससे जनता में सरकार के प्रति आक्रोश फैल गया और विद्रोह आरंभ हो गया। उस समय फ़र्नान्डेज़ मार्टीन्ज़ इस देश के तानाशाह थे। इसी ऊहापोह के कारण इस देश के बहुत से लोग पड़ोसी देशों में जा बसे।
15 जनवरी सन 1854 ईसवी को जर्मनी के गणितज्ञ और भौतिक शास्त्री जार्ज साइमन ओहम का 67 वर्ष की आयु में निधन हुआ। उनका जन्म 1787 ईसवी में हुआ था। उन्हें गणित के साथ ही भौतिक शास्त्र से भी बहुत लगाव था। गहरे अध्ययन के बाद वे इलेक्ट्रिसिटी के क्षेत्र में महत्वपूर्ण नियम बनाने में सफल हुए जिन्हें ओहम क़ानून कहा जात है।
15 जनवरी सन 1919 ईसवी को जर्मनी की कम्युनिस्ट नेता रोज़ा लग्ज़म्बर्ग और उनके साथी कार्ल लिएकनेट की सैनिकों ने हत्या कर दी। यह लोग जर्मनी में क्रान्ति लाना चाहते थे किंतु इस प्रयास में असफलता के बाद उन्हें जान से हाथ धोना पड़ा।
15 जनवरी सन 1990 ईसवी को बुल्गारिया की संसद ने इस देश में सत्ता पर कम्युनिस्ट पार्टी के एकाधिकार को समाप्त कर दिया जिसके बाद बहुदलीय लोकतंत्र का रास्ता साफ़ हुआ।
15 जनवरी सन 1795 ईसवी को रूसी लेखक व राजनेता लेग्ज़न्डर ग्रिबाइडोफ़ गिरीबायोदेफ़ का जन्म हुआ। उन्हें ड्रामा लेखन में बड़ी दक्षता प्राप्त थी। इसी प्रकार वे आलोचनात्मक कामेडी लिखने में भी निपुण थे। राजनीति के मंच पर वे अधिक सफल नहीं रहे। गिरीबायोदेव रूस और ईरान के मध्य होने वाले द्वितीय विश्व युद्ध में सैन्य अधिकारी थे। इस युद्ध में ईरान के पराजित होने के बाद गिरीबायोदेफ़ रूस के ज़ार शासक के आदेश पर वर्ष 1828 में तेहरान आए ताकि अपने देश के कुछ बंदियों को ले जाएं। इस दायित्व के निभाने में सामने आने वाले उनके घमंड और उनकी अनुभवहीनता तथा हिंसक स्वभाव के कारण लोग नाराज़ हो गए और उनके विरुद्ध विद्रोह हो गया और फिर वर्ष 1829 में उनकी हत्या कर दी गई।

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25 दैय सन 1357 हिजरी शम्सी को ईरान में अत्याचारी शासक शाह के विरुद्ध जनता के विरोध प्रदर्शनों और रैलियों के दौरान प्रदर्शनकारियों और सैनिकों में झड़पें हुई। बहुत से सैनिकों ने जो जनता की सच्चाई से परिचित हो गये थे अपने ठिकाने छोड़ दिए और जनता के साथ मिल गये जिसके बाद जनता में उत्साह और भी बढ़ गया। इमाम ख़ुमैनी ने भी अपने संदेशों में सेना से अपील की कि वह जनता के साथ मिलकर अत्याचारी सरकार के विरुद्ध प्रदर्शन करे और अपने देश को विदेशियों के चंगुल से छुड़ाए।

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19 जमादिउल अव्वल वर्ष 796 हिजरी क़मरी को ईरानी विद्वान और खगोलशास्त्री ओलोग़ बेग का जन्म हुआ। अमीर तैमूर गोरकानी के दरबार में उनका पालन पोषण हुआ जो उन के दादा थे और बाद में वह मध्य एशिया के गवर्नर बने। तैमूर के विपरीत ओलोग़ बेग को दूसरे देशों पर चढ़ाई करने और उनपर राज करने में कोई रुचि नहीं थी। उन्होंने 824 हिजरी क़मरी में समरक़ंद में एक स्कूल बनवाया जिसमें विशेषरूप से खगोलशास्त्र पढ़ाया जाता था। ओलोग़ बेग का एक और महत्त्वपूर्ण कार्य समरक़ंद में एक वेधशाला का निर्माण था। वर्ष 853 हिजरी क़मरी में उनका देहान्त हो गया।
19 जमादिउल अव्वल सन 911 हिजरी क़मरी को प्रसिद्ध धर्मशास्त्री, विद्वान और शब्दकोश के ज्ञानी अबुल फ़ज़्ल अब्दुर्रहमान जलालुद्दीन सियुती का क़ाहिरा में निधन हुआ। उन्होंने युवाकाल में ही पवित्र क़ुरआन को याद कर लिया था। उन्होंने वर्षों तक धर्मशास्त्र, हदीस, क़ुरआन की व्याख्या, अरबी व्याकरण और शब्दकोष की शिक्षा प्राप्त की और इन ज्ञानों में निपुण हो गये। उन्होंने तीन सौ से पांच सौ पुस्तकें लिखी हैं। अल किताबुल कबीर, तारीख़ुल ख़ोलफ़ा और अलफ़िया फ़िन्नहव उनकी महत्त्वपूर्ण पुस्तकें हैं।